पायलट प्राेजेक्ट लागू:राजगढ़ में भूजल स्तर में 100 मीटर तक गि‍रावट आई

अलवर10 दिन पहले
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अटल भूजल याेजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अलवर जिले की राजगढ़ पंचायत समिति का चयन हुआ है। - Dainik Bhaskar
अटल भूजल याेजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अलवर जिले की राजगढ़ पंचायत समिति का चयन हुआ है।
  • अटल भूजल याेजना में राजगढ़ पंस की 34 पंचायताें के 146 गांव किए शामिल

अटल भूजल याेजना के तहत पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अलवर जिले की राजगढ़ पंचायत समिति का चयन हुआ है। इस पायलट प्राेजेक्ट में राज्य के 17 जिलाें की 38 पंचायत समितियाें की 1144 ग्राम पंचायताें के 4769 गांवाें काे शामिल किया गया है। इसमें राजगढ़ पंस की 34 ग्राम पंचायताें के 146 गांव शामिल हैं। राजगढ़ शहर में भूजल स्तर 100 मीटर (328.083 फीट) और ग्रामीण क्षेत्राें में 45 से 50 मीटर तक नीचे चला गया गया है।

देश के 7 राज्याें के 78 जिलाें के 193 ब्लाॅक और 8350 ग्राम पंचायताें काे इस याेजना में शामिल किया गया है। इनमें राजस्थान, गुजरात, हरियाणा, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश शामिल हैं। इन प्रदेशाें में देश के 25 प्रतिशत भूजल का दाेहन हाेता है। केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 6584 भूजल ब्लॉकों में से 1034 ब्लॉकों का अत्यधिक उपयोग हुआ है।

पायलट प्राेजेक्ट के तहत सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से गिरते भू जलस्तर काे राेकने का प्रयास किया जाएगा। प्राेजेक्ट 2025 तक चलेगा। इसके तहत वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम, एनिकट, छाेटे बांध व खेताें में तालाब बनाकर बरसात का पानी एकत्र किया जाएगा। इसी पानी काे खेताें में सिंचाई के काम लिया जाएगा।

किसानाें काे ऐसी फसल उगाने के लिए प्रेरित किया जाएगा जिसमें कम पानी की खपत हाे। इसके अलावा किसानाें काे सिंचाई के भी ऐसे ही साधन अपनाने काे प्रेरित किया जाएगा। भूजल विभाग का मानना है कि इससे भूजलस्तर में सुधार हाेगा। पायलट प्राेजेक्ट सफल हाेने पर अलवर सहित अन्य जिले में भी इसे लागू किया जाएगा।

हर साल भूजल में हाे रही एक से दाे मीटर की गिरावट

भूजल विभाग के अनुसार, पूरा अलवर जिला डार्क जाेन में शामिल है। हर साल जिले के भूजल स्तर में 1 से 2 मीटर की गिरावट अा रही है। सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र राजगढ़ हाेने के कारण इसे अटल भूजल याेजना में शामिल किया है।

राजगढ़ क्षेत्र का भूजल स्तर सबसे अधिक नीचे चले जाने के कारण इसे अटल भूजल याेजना में शामिल किया है। वहां काम भी शुरू हाे गया है। प्रचार प्रसार के तहत कई जगह हाेर्डिंग लगाए गए हैं।
-निरंजन माथुर, वरिष्ठ भूजल वैज्ञानिक

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