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भास्कर खास:काेराेनाकाल में बदल गया कवि सम्मेलन का स्वरूप, अब ऑनलाइन हाेते हैं, समय भी घटा

अलवर6 दिन पहले
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अलवर. ऑनलाइन कवि सम्मेलन में शामिल कवि। (फाइल फाेटाे) - Dainik Bhaskar
अलवर. ऑनलाइन कवि सम्मेलन में शामिल कवि। (फाइल फाेटाे)
  • अलवर के 5 कवि ऑनलाइन सम्मेलनाें में राष्ट्रीय स्तर पर देते हैं प्रस्तुतियां

काेराेनाकाल में सार्वजनिक कार्यक्रमाें पर राेक लगने से कवि सम्मेलनाें का स्वरूप भी बदल गया है। अब ऑनलाइन कवि सम्मेलन हाे रहे हैं। इनके माध्यम से ही कवि अपनी रचनाएं श्राेताओं काे सुना रहे हैं। ऑनलाइन सम्मेलनाें में प्रस्तुति देने वालाें में अलवर के 5 कवि भी शामिल हैं। इनमें विनीत चाैहान, बलबीर सिंह करुण, प्रवेंद्र पंडित, सुरेंद्र सार्थक व त्रिलाेक शर्मा हैं।

अगला ऑनलाइन कवि सम्मेलन प्रताप गाैरव केंद्र की ओर से महाराणा प्रताप जयंती पर 12 से 20 जून तक प्रतिदिन रात 9 बजे हाेगा। कवि विनीत चाैहान का कहना है कि काेराेनाकाल से पहले विभिन्न संस्थाअाें और संगठनाें की ओर से राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त, 26 जनवरी, महापुरुषाें की जयंती, त्याेहार खासकर हाेली-दिवाली, नवसंवत् सहित अन्य अवसराें पर कवि सम्मेलनाें का आयाेजन हाेता था। पिछले साल काेराेना महामारी के कारण सरकार द्वारा सार्वजनिक कार्यक्रमाें पर राेक लगाने के कारण फिजीकल रूप से आयाेजित हाेने वाले कवि सम्मेलनाें के स्थान पर अब ऑनलाइन हाेते हैं। काेराेनाकाल से पहले एक महीने में देश में करीब 80 कवि सम्मेलनाें का आयाेजन हाेता था। अब एक महीने में करीब 30 ऑनलाइन कवि सम्मेलन हाे रहे हैं। पहले सम्मेलन 3 से 4 घंटे का हाेता था, अब 1 से 1.30 घंटे का हाेता है।

फिजीकल रूप से हाेने वाले सम्मेलन में 8-10 कवि प्रस्तुति देते थे। ऑनलाइन सम्मेलन में 4 से 5 कवि हाेते हैं। देश के कवियाें की ओर से साेशल मीडिया पर दाे प्लेटफाॅर्म बनाए गए हैं। एक प्लेटफाॅर्म पर कवि ताजा विषयाें पर चर्चा करते हैं और दिवंगत व्यक्ति काे श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। दूसरे प्लेटफार्म के जरिए काेराेना मरीज व जरूरतमंद की कवि मदद करते हैं। दाेनाें प्लेटफाॅर्म पर देशभर के करीब 300 कवि जुड़े हुए हैं।

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