पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

Install App
  • Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Alwar
  • The Proposal For The Allocation Of Land For The Sainik School, Which Was Approved By The Chief Minister, Is Reserved For The BRICS Agriculture Research Center.

Ads से है परेशान? बिना Ads खबरों के लिए इनस्टॉल करें दैनिक भास्कर ऐप

जमीन का झमेला:सैनिक स्कूल के लिए जिस जमीन को सरकार ने मंजूरी दी, वह पहले से ही ब्रिक्स एग्रीकल्चर रिसर्च सेन्टर के नाम आरक्षित

अलवरएक महीने पहलेलेखक: धर्मेंद्र यादव
  • कॉपी लिंक
यह जमीन सैनिक स्कूल को आवंटित होगी। फिलहाल ब्रिक्स के नाम से आरक्षित है। - Dainik Bhaskar
यह जमीन सैनिक स्कूल को आवंटित होगी। फिलहाल ब्रिक्स के नाम से आरक्षित है।
  • जिला कलेक्टर को पहले जमीन का आरक्षण रद्द करना पड़ेगा, उसके बाद ही जमीन का नए सिरे से आवंटन हो सकेगा
  • मुख्यमंत्री को प्रस्ताव भेजने से पहले जमीन का टाइटल साफ होना जरूरी था

एक दिन पहले प्रदेश सरकार ने अलवर में जिस जमीन का आवंटन सैनिक स्कूल के लिए किया है। वह जमीन 2018 से ही ब्रिक्स एग्रीकल्चर रिसर्च सेंटर के नाम से आरक्षित है। जमीन की जमाबंदी में बकायदा ब्रिक्स एग्रीकल्चर सेंटर का नोट भी डला हुआ है। मतलब सरकार ने इतना बड़ा निर्णय कर लिया लेकिन, उससे पहले से आरक्षित जमीन का आरक्षण रद्द नहीं किया गया।

ऐसे में अब जब तक उस जमीन का आरक्षण रद्द नहीं होगा तब तक जमीन सैनिक स्कूल के नाम आवंटित नहीं हो सकती। पुराना आरक्षण रद्द किए बिना सैनिक स्कूल को जमीन आवंटित करने से कानूनी पेचीदगी खड़ी हो सकती है। जिला प्रशासन के स्तर पर यह मुख्यमंत्री कार्यालय से आदेश जारी होने के अगले दिन भी जमीन का आरक्षण रद्द नहीं हो सका है।

पहले 2013 में यही जमीन सैनिक स्कूल को आरक्षित की
पहले वर्ष 2013 में हल्दीना की यही जमीन सैनिक स्कूल को आरक्षित की गई थी। लेकिन भाजपा सरकार आने के बाद जुलाई 2018 में जमीन सैनिक स्कूल की बजाय ब्रिक्स को आरक्षित कर दी। उसी समय से जमाबंदी में जमीन का आरक्षण ब्रिक्स के नाम से चला आ रहा है।

आदेश से पहले ही आरक्षण रद्द होता
दरअसल हाेना यह चाहिए था कि मुख्यमंत्री की ओर से नि:शुल्क जमीन देने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले जमीन का टाइटल क्लीयर होना जरूरी था। ताकि मुख्यमंत्री के आदेश के तुरंत बाद उस जमीन का आवंटन किया जाता। अब ब्रिक्स एग्रीक्ल्चर सेन्टर का रोड़ा हो सकता है। हालांकि यह भी सरकारी उपक्रम है। इसलिए जमीन का आरक्षण रद्द करने में दिक्कत नहीं आएगी। लेकिन, अभी तक जमीन का आरक्षण रद्द नहीं हो सका है।

कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र का मसला
वैसे तो जमीन का आरक्षण रद्द करना व आरक्षित करना कलेक्टर के अधिकार क्षेत्र में आता है। लेकिन, सैनिक स्कूल जैसे बडे़े प्रोजेक्ट के लिए जमीन के मसले को सुलझाने में प्रशासन की सुस्ती रही है। जो कि अब तक जमीन का टाइअल क्लियर नहीं किया है। जबकि मुख्यमंत्री ने जमीन का नि:शुल्क आवंटन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। होना यह चाहिए था कि सरकार को प्रस्ताव भेजने से पहले ही ब्रिक्स के नाम जमीन का आरक्षण रद्द किया जाता है। उसके बाद मुख्यमंत्री के पास प्रस्ताव मंजूरी को भेजा जाता।

दो साल तक सोता रहा प्रशासन
जब सरकार अलवर के हल्दीना में ही सैनिक स्कूल खोलना चाहती है, जिसके लिए 2013 में जमीन आरक्षित हो गई थी। लेकिन, 2018 में भाजपा सरकार ने इस जमीन को ब्रिक्स को आरक्षित कर दिया। इस बीच दो साल तक प्रशासन सुस्त रहा। न सरकार ने ध्यान दिया। अब जल्दबाजी में उसी जमीन के आवंटन की मंजूरी दे दी।

अभी आदेश नहीं
यह सही है कि हल्दीना में सैनिक स्कूल को नि:शुल्क आवंटित की जाने वाली जमीन अभी तक ब्रिक्स के नाम आरक्षित है। आदेश मिलते ही आरक्षण रद्द हो जाएगा। पहले भी ऐसा हुआ है।
गंगाराम, पटवारी, हल्दीना

खबरें और भी हैं...

आज का राशिफल

मेष
Rashi - मेष|Aries - Dainik Bhaskar
मेष|Aries

पॉजिटिव- आज आप बहुत ही शांतिपूर्ण तरीके से अपने काम संपन्न करने में सक्षम रहेंगे। सभी का सहयोग रहेगा। सरकारी कार्यों में सफलता मिलेगी। घर के बड़े बुजुर्गों का मार्गदर्शन आपके लिए सुकून दायक रहेगा। न...

और पढ़ें