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वेबिनार:समाज विज्ञान के शोध में सामाजिक समरसता बढ़ाने वाली भावना होनी चाहिए : प्राे. यादव

अलवर8 महीने पहले
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बाबू शोभाराम राजकीय कला महाविद्यालय के लोक प्रशासन एवं राजनीति विज्ञान विभाग व न्यू पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन सोसाइटी ऑफ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में “समाज विज्ञान शोध में नूतन प्रवृतियां’” विषय पर एक दिवसीय वेबिनार का आयोजन किया गया। वेबिनार का उद्घाटन डॉ जे.पी. यादव उपकुलपति आर आरबीएम विश्वविद्यालय अलवर तथा कला महाविद्यालय प्राचार्य डॉ स्मिता मिश्रा ने किया।

इस अवसर पर मुख्य वक्ता डॉ जनक सिंह मीणा की पुस्तक “भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था एंव शासन प्रणाली” तथा डॉ. महेश गोठवाल की पुस्तक “कार्मिक प्रशासन : स्थानांतरण नीति, नियम एवं व्यवहार” का विमोचन किया गया। वेबिनार संयोजक डॉ रमेश बैरवा ने विषय प्रवर्तन किया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि प्रो. जे पी यादव ने कहा कि यदि शोध समाज उपयोगी नहीं होगा तो निरर्थक होगा। इन्होंने आह्वान किया कि समाज विज्ञान के शोधों मे सामाजिक समरसता को बढ़ाने वाली भावना रहनी चाहिए।

उन्होंंने कहा कि शोध का महत्व तब ही रहेगा जब सामाजिक समस्याओं के समाधान हेतु सुझाव भी दिए जाए। मुख्य वक्ता डॉ. जनक सिंह मीणा प्रोफेसर जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर ने कहा कि विज्ञान के क्षेत्र में शोध तकनीक पहले से ही ही विकसित थी लेकिन समाज विज्ञानों में शोध तकनीक अभी विकासशील हैं। डॉ. पी एम बैरवा ने कहा कि शोध को हम जितना क्षेत्रीय स्तर पर करेंगे उतना ही गहराई और सूक्ष्मता से अध्ययन कर पाएंगे।

वेबिनार में प्रो. ममता चंद्रशेखर, डॉ. इंद्रजीत सिंह सोढ़ी, डॉ. भरतलाल मीणा ने भी विचार रखे। वेबिनार का सार प्रस्तुतिकरण डॉ. भरत मीणा ने किया। संचालन डॉ. सुंदर बसवाल व डॉ महेश गोठवाल ने किया। सह संयोजक डॉ. महेश गोठवाल ने बताया कि वेबिनार में 1400 से अधिक प्रतिभागियों द्वारा पंजीकरण करवाया गया तथा 900 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

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