रैणी सीएचसी में धांधली:सीएचसी में 13 बेड थे, डॉक्टरों ने इन पर 16 दिन में 973 रोगी भर्ती कर डाले

अलवर24 दिन पहले
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| जिले की रैणी सीएचसी के डॉक्टरों ने रिकॉर्ड में 13 बेड पर 16 दिनाें में 973 मरीज भर्ती होना बता दिया। इन वायरल बुखार के मरीजाें काे 2500 ड्रिप सैट लगा दिए गए। इसका खुलासा जिला औषधि भंडार के प्रभारी डाॅ. छबील कुमार द्वारा की गई जांच में हुआ। इस मामले में जिलाऔषधि भंडार प्रभारी ने रैणी सीएचसी प्रभारी काे नाेटिस जारी कर लापरवाही के मामले में स्पष्टीकरण मांगा है।

जांच में सामने आया है कि रैणी सीएचसी में कार्यरत डाॅक्टर मरीजाें काे सिर्फ ड्रिप लगाने के लिए भर्ती करते रहे, जबकि मरीजों में बीमारी की गंभीरता के काेई लक्षण नहीं मिले। भर्ती पर्ची की जांच में सामने आया कि डाॅक्टर मरीजाें की जांच नहीं करा रहे हैं, जाे मरीज गंभीर नहीं हैं, उन्हें भी भर्ती कर इलाज कर रहे हैं, जबकि वे दवा लेने से घर पर स्वस्थ हाे सकते हैं। 30 सितंबर से 16 अक्टूबर तक सीएचसी में उपलब्ध 13 बेड पर 973 मरीज भर्ती कर दिए गए, यानि औसतन 60 मरीज प्रतिदिन और 4 मरीज प्रति बेड भर्ती किए गए हैं, जाे संभव ही नहीं है।

भर्ती किए मरीजाें काे 2500 ड्रिप सेट लगा दिए गए, जबकि विशेष परिस्थितियाें काे छाेड़कर एक मरीज काे 3 दिन तक भर्ती रहने तक एक ड्रिप सेट से काम चलाया जा सकता है। जिला औषधि भंडार प्रभारी का कहना है कि ड्रिप सैट का जरूरत से ज्यादा उपयाेग वित्तीयऔर भाैतिक अनियमितता है। हालात ये हैं कि सीएचसी के सब स्टाेर में दवाओं काे खुले में फर्श पर पटका हुआ है, जबकि इन दवाओं की गुणवत्ता के लिए रैक में रखा जाना जरूरी है।

{ चिकित्सा विशेषज्ञाें की राय : चिकित्सा विशेषज्ञाें का कहना है कि बिना बीमारी मलेरिया की दवा से शरीर में ऐसे रेसिस्टेंस बन जाएंगे कि फेल्सीपेरम मलेरिया हाेने पर अगर ये दवा दी गई ताे काम ही नहीं करेगी। यह इंजेक्शन नेशनल मलेरिया ड्रग पाॅलिसी 2013 के तहत क्लाेराेक्विन रेसिस्टेट फेल्सीपेरम मलेरिया के इलाज में ही उपयाेग किया जा सकता है। { मरीजाें काे बाजार से दवा खरीदने की सलाह भी दे रहे : सीएचसी के डाॅक्टर मुख्यमंत्री निशुल्क दवा याेजना में शामिल दवाओँ काे मरीजाें से बाजार के मेडिकल स्टाेर से मंगवा रहे हैं। अगर दवा मुख्यमंत्री निशुल्क दवा याेजना के सब स्टाेर में उपलब्ध नहीं हैं ताे एनएसी लेकर सीएचसी के बजट से खरीदकर मरीजाें काे उपलब्ध कराने का प्रावधान है, लेकिन सीएचसी पर दवाओँ की स्थानीय स्तर पर खरीद ही नहीं की गई। जांच में सामने आया कि मरीज फ्लूड, आईवी सैट, रेनिटीडिन, पेंटाेप्रेजाेल, अमिकासिन व डाइक्लाेफेनिक जैसी दवाएं बाजार से खरीदकर लाए।

वायरल वालों को मलेरिया के इंजेक्शन लगाए

सीएचसी में भर्ती किए वायरल बुखार के मरीजाें काे डाॅक्टराें ने घातक फेल्सीपेरम मलेरिया के आर्टीसुनेट इंजेक्शन लगा दिए। जबकि सीएचसी में पहुंचे बुखार के किसी भी मरीज की मलेरिया जांच नहीं कराई गई। गंभीर बात ये है कि डाॅक्टराें ने जिस मलेरिया की दवा मरीजाें काे दी, उस मरीज की जांच तक नहीं कराई और ना ही सलाह दी। जबकि जिले में 10 महीने में मात्र 14 मलेरिया वाईवैक्स के मरीज मिले हैं।

^सीएचसी में बिना जांच कराए वायरल के मरीजाें काे धड़ल्ले से आर्टीसुनेट इंजेक्शन लगा दिए गए, जबकि ये जीवनरक्षक इंजेक्शन फेल्सीपेरम मलेरिया पाॅजिटिव मरीजाें काे ही लगाए जाते हैं। 13 बेड पर 973 मरीज भर्ती नहीं किए जा सकते और उनके इलाज में 2500 आईवी सेट का उपयाेग भी नहीं हाे सकता। रैणी सीएचसी प्रभारी काे नाेटिस देकर जवाब मांगा है।
- डाॅ. छबील कुमार, जिला औषधि भंडार प्रभारी
^मैंने डाॅ. दीपक शर्माऔर डाॅ. ओपी मीणा काे नाेटिस जारी कर इस मामले में जवाब मांगा है। कई बार नाेटिस जारी किए कि मरीजाें काे मलेरिया के इंजेक्शन नहीं लगाएं। मरीजाें काे सिर्फ ड्रिप लगाने के लिए भर्ती नहीं दिखाएं, लेकिन ये मरीजाें काे ड्रिप लगाने के लिए भर्ती करते रहे। डाॅक्टराें ने आदेश की अवहेलना की है।
- डाॅ. सुगनचंद मीणा, प्रभारी सीएचसी रैणी
^मलेरिया के इंजेक्शन हमने मरीजाें की क्लीनिकल जांच के अाधार पर लगाए। जरूरी नहीं कि जांच में मलेरिया पाॅजिटिव अा ही जाए। कई बार रिपाेर्ट पाॅजिटिव नहीं आती व मलेरिया हाेता है। सीएचसी में माैसमी बीमारी में मरीज बढ़े ताे अतिरिक्त बेड लगा मरीजाें काे भर्ती किया। काेई कुछ भी कह सकता है।
- डाॅ. ओपी मीणा, सीएचसी रैणी
^हमें मेडिकल काॅलेज स्तर पर सिखाया है कि मलेरिया और थंपाेसाइटाेपीनिया के मरीजाें काे क्लीनिकल अाधार पर मलेरिया की दवा लगाई जाती है। सीएचसी स्तर पर मरीज 24 घंटे नहीं रुकते हैं अाैर 3-4 घंटे भर्ती रहकर आराम मिलने पर चले जाते हैं। ऐसी स्थिति में उनकी कंडीशन के हिसाब से मरीज काे भर्ती कर इलाज करते हैं।
- डाॅ. दीपक शर्मा, सीएचसी, रैणी

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