• Hindi News
  • Local
  • Rajasthan
  • Alwar
  • Traders' Question Green Crackers Are Being Sold All Over The Country Except Delhi And Haryana, Permission Has Also Been Given In Rajasthan

पटाखों पर रोक से ‌8 से 10 करोड़ का नुकसान:व्यापारियाें का सवाल-दिल्ली व हरियाणा को छोड़ पूरे देश में बिक रहे हैं ग्रीन पटाखे, राजस्थान में भी मिले अनुमति

अलवर2 महीने पहलेलेखक: चंद्रशेखर शर्मा
  • कॉपी लिंक
पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के कारण पटाखा व्यापारी निराश हैं। - Dainik Bhaskar
पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के कारण पटाखा व्यापारी निराश हैं।
  • पटाखा कारोबारियों ने सीएम, मुख्य सचिव व गृह सचिव को लिखा पत्र, कहा-गोदामों में रखा माल डंप हो जाएगा, काफी नुकसान झेलना पड़ेगा

पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध के कारण पटाखा व्यापारी निराश हैं। रोक के कारण हर साल लगने वाली शहर में 100 से ज्यादा अस्थाई दुकानें नहीं लग सकी हैं। पटाखा व्यापारियों का कहना है कि जिले में दीपावली पर 8 से 10 करोड़ का कारोबार होता रहा है। लगातार दूसरे साल रोक लगने से पटाखा कारोबारियों में नाराजगी है। प्रदेश भर के पटाखा व्यापारी एकजुट होकर सरकार के फैसले के विरोध में उतर आए हैं।

राजस्थान पटाखा मैन्युफेक्चर एंड डीलर एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव व गृह सचिव को पत्र भेजकर अगले सप्ताह तक पटाखों की अस्थाई दुकानों के लाइसेंस देने की मांग की है। जिले में महेंद्र एंड कंपनी खारेड़ा मालाखेड़ा, जीतू जनरल स्टोर टपूकड़ा, हरप्रसाद पूरणमल गोविंदगढ़, तुलसी जनरल स्टोर खैरथल, चौधरी प्रोविजन स्टोर बहरोड़ व उधोदास ईश्वरी लाल खैरथल पटाखों के प्रमुख कारोबारी हैं।

पत्र में व्यापारियों ने यह लिखा

व्यापारियों ने कहा कि आतिशबाजी उत्साह और खुशियां फैलाती है, प्रदूषण नहीं। प्रदेश में लगभग 15 पटाखा उत्पादक इकाइयां हैं। साल के शुरुआती महीनों में पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध हटाने से इन उत्पादकों ने भी दिवाली सीजन के लिए पटाखों का उत्पादन शुरू कर दिया था, लेकिन मौजूदा आदेशों से इनका माल डंप हो जाएगा और उत्पादकों को नुकसान झेलना पड़ेगा। यह देखते हुए सरकार को अपने निर्णय पर दोबारा से विचार करना चाहिए। दि‍ल्ली व हरियाणा को छोड़कर पूरे देश में कहीं भी पटाखों की बिक्री पर पाबंदी नहीं है, ऐसे में प्रदेश में पाबंदी लगाने का औचित्य नहीं है।

दीपावली पर ‌8 से 10 करोड़ रुपये का कारोबार होता था

20 स्थाई पटाखा कारोबारी हैं जिले में

  • 100 से अधिक लोग छोटी-बड़ी अस्थाई दुकानें लगाते थे।
  • 1000 लोग पटाखा कारोबार से जुड़े हुए थे जिले में
  • 8 से 10 करोड़ रुपए का कारोबार दीपावली के सीजन में होता था जिले में
  • 15 से 20 स्थाई पटाखा कारोबारी हैं अलवर जिले में, जो साल भर सिर्फ पटाखा और आतिशबाजी का ही कारोबार करते हैं। जिनके पास पटाखा गोदाम के लाइसेंस हैं।
  • 100 से ज्यादा छोटी-बड़ी दुकानें लगती थीं अलवर शहर में

कारोबारियों का माल गोदामों में रखा बर्बाद हो जाएगा

ककराली जाट स्थित लक्ष्मी ट्रेडर्स के संचालक पवन जसूजा ने बताया कि पटाखा विक्रेताओं ने दीपावली के मद्देनजर तमिलनाडु के शिवाकाशी से माल मंगवा लिया था। पिछले साल भी रोक के कारण करोड़ों का माल गोदामों में पड़ा खराब हो गया था। पटाखा खरीद के ऑर्डर देने के बाद अब रोक लगने से इस बार भी माल बर्बाद हो जाएगा। कई जगह से फैंसी आतिशबाजी मंगवा ली गई, उसके बाद त्योहार के उत्साह पर रोक लगाई गई है।

राज्य सरकार ग्रीन पटाखों की बिक्री की अनुमति दे

ककराली जाट स्थित लक्ष्मी ट्रेडर्स के तनुज जसूजा ने बताया कि राज्य सरकार ने इस साल के शुरुआत में पटाखों की बिक्री से रोक हटा ली थी। इसके मद्देनजर व्यापारियों ने शिवकाशी के पटाखा उत्पादकों को ऑर्डर देकर एडवांस दे दिया था। अब अगर व्यापारी शिवकाशी से माल नहीं मंगवाते हैं, तो उनका करोड़ों रुपए डूब जाएंगे। राज्य सरकार भी ग्रीन पटाखों की बिक्री करने की अनुमति दे सकती है।

सरकारी आदेशों में उलझा पटाखा काराेबार

केडलगंज स्थित महेंद्र कुमार एंड कंपनी के संचालक महेंद्र कुमार का कहना है कि इस साल फरवरी में सरकार ने पटाखों की बिक्री पर पाबंदी हटा ली थी। इसे देखते हुए व्यापारियों ने एडवांस पेमेंट देकर तमिलनाडु शिवकाशी में पटाखे बुक करा दिए। अब अचानक पाबंदी लगा दी गई। ऐसे में पटाखा कारोबारी मुश्किल में फंस गए और उनको करोड़ों रुपए का नुकसान तय है। इसके मद्देनजर सरकार को सहानुभूतिपूर्वक फैसला करना चाहिए।

खबरें और भी हैं...