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  • When The Members Of The Josh Group Find Out At 10 Pm, They Will Get As Much Blood As They Want, Navtaj Will Be On The Ventilator For 10 Days.

4 घंटे ब्लड नहीं मिला 12 दिन के नवजात को:रात 10 बजे जोश ग्रुप के मेंबर्स को पता लगा तो बोले- जितना भी ब्लड चाहिए मिलेगा; 10 दिन से वेंटिलेटर पर है बच्चा

अलवर10 महीने पहले
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12 दिन का नवजात सेठी अस्पताल में भर्ती। - Dainik Bhaskar
12 दिन का नवजात सेठी अस्पताल में भर्ती।

12 दिन का नवजात 10 दिन से वेंटिलेटर पर है। शरीर में संक्रमण भी काफी ज्यादा था। बार-बार ब्लड की जरूरत पड़ी तो ओ-पॉजिटिव ब्लड डोनर नहीं मिला। यह घड़ी मासूम के लिए बहुत मुश्किल थी। परिजन भी परेशान होने लगे। उनकी उम्मीद टूटने लगी। शनिवार रात 10 बजे जोश ग्रुप के रोबिन व हितेश को सूचना लगी। वे दोनों मोती डूंगरी ब्लड बैंक पहुंच गए।

हितेश काे जैसे ही पता लगा कि 12 दिन का मासूम एक यूनिट ब्लड के भरोसे जिंदगी की जंग लड़ रहा है। इसके बाद उन्होंने एक मिनट फॉर्म भरने में लगाई और आधा घंटे में ब्लड डोनेट कर दिया। इसके बाद नवजात के परिजनों की आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कराहट लौटी। अगले दिन रविवार सुबह सेठी हॉस्पिटल के डॉ. चिराग ने बताया कि बच्चे की तबीयत में सुधार है। पहले बहुत अधिक संक्रमण था।

हितेश ठाकुर रात साढ़े 10 बजे ब्लड डोनेट करते हुए।
हितेश ठाकुर रात साढ़े 10 बजे ब्लड डोनेट करते हुए।

10 दिन से वेंटिलेटर पर है नवजात
खैरथल निवासी महिला दीप्ति का नवजात 10 दिन पहले सेठी हाॅस्पिटल में वेंटिलेटर पर है। शुरुआत में नवजात में काफी इंफेक्शन था। पैदा होने के बाद नवजात रोया भी नहीं। संक्रमण अधिक होने के कारण वेंटिलेटर पर रखा गया। फिर ब्लड की जरूरत पड़ी। एक दिन पहले ही प्लेटलेट्स 20 हजार आ गई थी।

उधर, अस्पताल में नवरजात वेंटिलेटर में होने के कारण जिंदगी की जंग लड़ता रहा। वहीं, इधर जैसे ही हितेश ठाकुर ने ब्लड डोनेट किया परिजनों ने गहरी सांस ली और हितेश व उनकी टीम का शुक्रिया किया। हालांकि, बाद में कई अन्य युवा भी ब्लड डोनेट करने पहुंच गए थे।

क्या है जोश ग्रुप?
अलवर शहर में जोश ग्रुप करीब आठ सालों से सामाजिक कार्यों में आगे है। जोश ग्रुप के करीब 100 से अधिक सदस्य जिले भर में सक्रिय रहते हैं। खासकर अलवर शहर में ब्लड डोनेशन के लिए आमजन को जागरूक करने का काम करता है। ग्रुप के प्रमुख रोबिन बेनीवाल ने बताया कि जब लोग ब्लड डोनेट करने से कतराते थे। तब ग्रुप के सदस्य खुद ब्लड डोनेट करते थे। दूसरों को जागरूक भी किया।