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शरद पूर्णिमा आज:अश्वगंधा, गिलाेय और शहद से करेंगे महादेव का अभिषेक, फिर इन्हें आयुर्वेद विभाग को देकर काढ़ा बनवाकर बांटेंगे

अलवरएक महीने पहले
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  • आज मंदिरों में नहीं होंगे भजन-कीर्तन, कुछ मंदिरों में शुक्रवार को भी मनाई गई
  • त्रिपाेलिया महादेव मंदिर की ओर से सामान्य अस्पताल में भर्ती काेराेना राेगियाें के लिए 21 किलाे दूध भेजा जाएगा

शनिवार 31 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी, लेकिन कोरोना महामारी के चलते इस बार मंदिरों में भजन-कीर्तन नहीं होंगे। कुछ मंदिरों में शुक्रवार को भी शरद पूर्णिमा मनाई गई। त्रिपाेलिया महादेव मंदिर में शरद पूर्णिमा शनिवार को मनाई जाएगी। महंत जितेंद्र खेड़ापति ने बताया कि इस अवसर पर भगवान का अभिषेक व रुद्री पाठ का आयोजन होगा।

महादेव का अश्वगंधा, शतवारी, गिलाेय, कालीमिर्च, लाेंग, मुनक्का, जायफल, गुड़ व शहद से अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद ये सभी सामग्री आयुर्वेद विभाग काे दे दी जाएगी। आयुर्वेद विभाग इस सामग्री का काढ़ा बनवाएगा। यह काढ़ा लोगों को निशुल्क बांटा जाएगा। इसके अलावा सामान्य अस्पताल में भर्ती काेराेना राेगियाें के लिए 21 किलाे दूध भी भेजा जाएगा।

पं. शिब्बूराम शास्त्री का कहना है कि बंशीधर पंचांग के अनुसार 30 अक्टूबर की शाम 5.46 से 31 अक्टूबर काे रात 8.19 बजे तक पूर्णिमा है। सूर्याेदय कालीन तिथि के अनुसार पूर्णिमा 31 अक्टूबर है। पं. यज्ञदत्त शर्मा का कहना है कि बंशीधर पंचांग व ब्रजभूमि पंचांग के अनुसार 30 अक्टूबर काे शाम 5.46 से 31 अक्टूबर की रात 8.19 बजे तक पूर्णिमा तिथि है।

शनिवार को उदीयमान पूर्णिमा तिथि हाेने के कारण इस दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। अग्रसेन मार्ग व मनुमार्ग के लक्ष्मीनारायण मंदिर, बजाजा बाजार स्थित महावर गाेविंददेव मंदिर, अट्‌टा मंदिर, सुभाष चाैक स्थित राधाकृष्ण मंदिर व मालाखेड़ा बाजार के बाहर स्थित सीताराम मंदिर में शनिवार काे शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। इन मंदिरों में मध्यरात्रि काे भगवान काे खीर का भाेग लगाया जाएगा।

इनमें शुक्रवार को मनाई गई : शुक्रवार को सुभाष चाैक स्थित जगन्नाथ मंदिर व रामकिशन काॅलाेनी स्थित वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम में शरद पूर्णिमा मनाई गई। वेंकटेश बालाजी दिव्य धाम में श्रीमद् भागवत पुराण के पंचाध्याय का पाठ किया।
कार्तिक मास स्नान आज से
31 अक्टूबर काे कार्तिक मास स्नान प्रारंभ हाेगा। 30 नवंबर काे देव दिवाली मनाई जाएगी। इसी के साथ कार्तिक मास स्नान संपन्न हाेगा। कार्तिक मास में कथा सुनने, दान करने, तालाब व नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। पं. यज्ञदत्त शर्मा का कहना है कि स्कंद पुराण के अनुसार कार्तिक मास में किया गया स्नान व व्रत भगवान विष्णु की पूजा के समान है।

तालाब व नदी में स्नान से अश्व मेघ यज्ञ जितना लाभ मिलता है। कार्तिक मास में स्नान से सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य लाभ की प्राप्ति हाेती है। इस मास में दान का कई गुना फल मिलता है। कार्तिक मास स्नान करने वाली महिलाएं अलसुबह स्नान कर पथवारी, तुलसी, बड़ और आंवले के पेड़ की पूजा करने के बाद कार्तिक महात्म्य की कथा सुनती हैं और परिक्रमा करती हैं। कार्तिक स्नान करने वाली महिलाएं उपवास करती हैं जबकि कई महिलाएं ताराें काे अर्घ्य देने के बाद खाना खाती हैं।

25 से भीष्म पंचक

कार्तिक मास में 25 से 29 नवंबर तक भीष्म पंचक है। महाभारत के बाद पांडवाें की जीत हाे गई, तब भगवान श्रीकृष्ण पांडवाें काे भीष्म पितामह के पास ले गए और उनसे अनुराेध किया कि पांडवाें काे ज्ञान प्रदान करें। भीष्म पितामह ने उन्हें राज धर्म, वर्ण धर्म और माेक्ष धर्म का ज्ञान दिया।

भीष्म द्वारा ज्ञान देने का क्रम कार्तिक शुक्ल एकादशी से पूर्णिमा तक चलता रहा, तब भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि कार्तिक के ये अंतिम पांच दिन भीष्म पंचक के नाम से जाने जाएंगे। जाे श्रद्धालु इन पांच दिनाें में जप, तप, व्रत करेगा और दान करेगा, उसे कार्तिक मास के पूरे महीने का पुण्य लाभ, सुख और ऐश्वर्य की प्राप्ति हाेगी।

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