बहराेड़ / अफसराें से बाेले श्रमिक-हमारे साथ नारनौल जैसा बर्ताव मत करना, 7 दिन चक्कर लगवाने के बाद पैदल जाने काे मजबूर

Workers from Afraid - Don't treat us like Narnaul, forced to walk after 7 days of rotation
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Workers from Afraid - Don't treat us like Narnaul, forced to walk after 7 days of rotation

दैनिक भास्कर

May 17, 2020, 05:00 AM IST

अलवर. अपने घराें काे लाैटने के लिए सड़काें पर मजदूराें की आवाजाही जारी है। प्रत्येक राज्य की सरकार ने यूं ताे अधिकारियाें काे साफ निर्देश दिए हुए हैं कि मजदूराें काे परेशानी नहीं हाे, इसके लिए बसाें, शेल्टर हाेम के इंतजाम करें और उन्हें उनके गंतव्य तक पहुंचाएं। बहराेड़ में शनिवार काे मजदूराें का एक समूह अपनी चूरू से बहराेड़ की कठिन डगर से नहीं हारा, लेकिन नाैकरशाही के रवैये से हार गया। थकी हुई आवाज में मजदूराें ने कहा कि साहब हमारे साथ नारनौल जैसा बर्ताव मत कर देना, क्योंकि उन्होंने हमें 7 दिन चक्कर लगवाने के बाद पैदल जाने के लिए मजबूर कर दिया।

दरअसल उत्तर प्रदेश तथा मध्य प्रदेश के मजदूरों का आवागमन लगातार जारी है। शनिवार को बहरोड़ प्रशासन द्वारा यूपी के आजमगढ़ जिले के लिए 37 प्रवासी मजदूरों को रोडवेज बस से अलवर भेजा गया। अलवर से रेल के जरिए ये खुद के घराें के लिए रवाना हुए। शाम को करीब 50 मजदूर हरियाणा से बहरोड़ पहुंचे। उन्हें राउमा विद्यालय के शेल्टर हाेम में ठहराया। उत्तर प्रदेश के ललितपुर, जालौन व महोबा जिले के करीब 50 प्रवासी मजदूरों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

मजदूरी कर परिवार का पालन करने वाले यूपी के ललितपुर जिले के नीरज, मुन्नालाल, राजकुमार, राहुल, अक्ल भाई व राजकुमारी ने बताया  नारनौल के अधिकारियों ने उन्हें गांव भेजने के लिए 7 दिन तक बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन के चक्कर कटवाए। अपने गांव जाने की लालसा में न तो वे सो पाते थे और ना ही खा पाते थे। शनिवार को अपने स्तर पर उत्तर प्रदेश जाने के लिए छोड़ दिया। इसके बाद स्टेट हाईवे के रास्ते हरियाणा बॉर्डर क्रॉस कर बहरोड़ पहुंचे। यहां अधिकारियों से हाथ जोड़ते हुए कहा साहब हमारे साथ नारनौल जैसा बर्ताव मत करना। 

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