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आशियाना:500 बार उड़ान, तिनका-तिनका जुटा 28 दिन में बनाया घोंसला, बया का संदेश, छोटे-छोटे प्रयासों से मिलती है सफलता

बागीदौराएक महीने पहले
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बया घास के तिनके चोंच में लेकर घोंसला बुनते हुए। - Dainik Bhaskar
बया घास के तिनके चोंच में लेकर घोंसला बुनते हुए।
  • जन्म के 17 दिन बाद घोंसला छोड़ देते हैं बच्चे

जहां इंसान तमाम आधुनिक तकनीकी और मशीनरी की बदौलत कंक्रीट की इमारतें खड़ी कर तरक्की को लेकर भले ही इतरा रहा हैं। वहीं पक्षी, बिना किसी सहारे प्रकृति प्रदत्त हुनर से घास-फूस व तिनकों से महज अपनी चोंच द्वारा सलीके से अपना आशियाना अनूठे ढंग से बना लेते हैं। जिसे देख इंसान भी दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। इसी की बानगी हैं बया पक्षी का घोंसला। जो घास के तिनकों और पत्तियों से बुनकर लालटेन नुमा लटकता हुआ घोंसला तैयार करते हैं। बया पक्षी का वैज्ञानिक नाम प्लोसियस फिलीपीनस है।

ऐसे बनाते हैं घोंसलें

बया हमेशा एक वृक्ष पर कई घोंसले बनाते हैं। लगभग एक माह में घोंसला तैयार होता हैं। घोंसला बनने के बाद मिट्टी के गिले टुकड़े लाकर घोंसले को और मजबूत बनाते हैं। इस घोंसले में मादा 2 से 4 सफेद अंडे देती है, इन अंडों को 14 से 17 दिनों तक सेया जाता है। 17 दिन के बाद ही बच्चे घोंसला छोड़ देते हैं। बया पक्षी अपना घोंसला बनाने के लिए कांटेदार पेड़ों और ऐसे पेड़ों को चुनते हैं जो कि नदी के किनारे या झील, कुएं और तालाबों के किनारे होते हैं।

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