7000 छात्रों की शिक्षा केवल 21 नियमित शिक्षकों के भरोसे:एसबीपी कॉलेज में 1 महीने में 16 प्रोफेसर का तबादला, बॉटनी राजनीति विज्ञान तथा वाणिज्य संकाय में कोई पढ़ाने वाला नहीं

डूंगरपुर15 दिन पहलेलेखक: डॉ. सुबोधकांत नायक
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जिले में कोरोनाकाल के दौर से उबरने और हालात सामान्य होने पर नियमित कॉलेज जाने और कक्षाएं लगने का ख्वाब देख रहे राजकीय महाविद्यालय के हजारों छात्रों को नया सत्र शुरू होने के पहले ही जोरदार झटका लगा है। विगत एक माह में डूंगरपुर के एसबीपी राजकीय कॉलेज से 16 प्रोफेसर्स का तबादला हो गया है।7000 छात्र संख्या वाले कॉलेज की शिक्षण व्यवस्था केवल 21 स्थायी प्रोफेसर्स के भरोसे है।

30 साल पहले जब नियमित छात्रों की संख्या 2000 हुआ करती थी तब यहां करीब 55 शिक्षक थे। वर्तमान में स्वीकृत शैक्षणिक पदों की संख्या 80 है। जबकि वर्तमान छात्रों की संख्या के अनुपात में कम से कम यहां 125 शिक्षक होने चाहिए। लेकिन पदो की संख्या भरने के बजाय इसमें लगातार कमी आती गयी है। और अब केवल 21 व्याख्याताओं के भरोसे पूरा कॉलेज हो गया है।

इसके चलते यहां उच्च शिक्षा के क्षेत्र में प्रतिभाशाली छात्रों का कॉलेज के प्रति रुझान घट गया है। दक्षिणी राजस्थान में उच्च शिक्षा के सबसे केंद्र से इस तरह लगातार शिक्षकों के तबादलों से कई फैकल्टी में शून्य की स्थिति बन गयी है।

अंग्रेजी संकाय अब पूरी तरह संविदा व्याख्याता के भरोसे :

एसबीपी राजकीय महाविद्यालय में पिछले एक माह के भीतर वाणिज्य एवं बॉटनी संकाय पूरी तरह से खाली हो चुका है। वही राजनीति विज्ञान विभाग में कई वर्षों से सेवाएं दे रहे एकमात्र सहायक आचार्य प्रो. उपेंद्र कुमार सिंह का भी आयुक्तालय ने सप्ताह भर पहले चीखली महाविद्यालय में तबादला कर दिया है। टीएसपी क्षेत्र में राजनीति विज्ञान एक प्रमुख विषय है।

इसमें बीए और एमए के तकरीबन 2000 से ज्यादा नियमित छात्र अध्ययनरत है। बटनी विभाग में बचे एक मात्र सहायक प्रोफेसर डॉ पूंजाराम इन्केश्वर के स्थानांतरण के बाद लगभग 300 से अधिक विद्यार्थियों वाला यह विभाग भी शिक्षक रहित हो गया है। अंग्रेजी संकाय अब पूरी तरह संविदा व्याख्याता के भरोसे है।

2000 से अधिक विद्यार्थियों वाले अन्य विभाग जैसे हिंदी साहित्य, समाजशास्त्र व भूगोल की स्थिति भी ठीक नहीं है। यहां भी कई स्वीकृत पद वर्षों से खाली पड़े हैं। कॉलेज के दो सीनियर प्रोफेसर डॉ. नारायणलाल गुप्ता और चंद्रेश पारिख प्रतिनियुक्ति पर अन्यत्र कॉलेज में पदस्थापित है। ऐसे में अब 18 अक्टूबर से नवीन सत्र की कक्षाएं शुरू होते ही छात्रों के सामने नियमित अध्ययन के लिए क्लास तो होंगी लेकिन अधिकांश संकायों में पढ़ाने वाला एक भी शिक्षक नही होगा।

हाल ही में ट्रांसफर हुए कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. अनिल पालीवाल ने जाते समय किसी अन्य सीनियर प्रोफेसर को चार्ज नही सौंपा है। इससे कॉलेज में प्रशासनिक व्यवस्थाएं भी डगमगा गयी है। एसबीपी कॉलेज में में पिछले दिनों स्थानांतरित होने वाले सभी शिक्षकों को लेकर कोई स्पष्ट स्थानांतरण नीति नही होने से कई संकाय खाली हो गए है। लेकिन, संकायों की शून्य स्थिति को लेकर आयुक्तालय भी मौन है।

इन 16 शिक्षकों का हुआ ट्रांसफर:

चेतन प्रकाश मीणा अर्थशास्त्र, राजेन्द्र कुमार मीणा कॉमर्स, अन्नू मीणा कॉमर्स, पूंजाराम इन्केश्वर बॉटनी, सुमन खींचड़ बॉटनी, विनोद खुडिवाल इंग्लिश, अर्जुनलाल जाट समाजशास्त्र, अशोक कुमार इतिहास, विमित इतिहास, वर्षा सिखवाल हिंदी, सुनीता आर्य संस्कृत, प्रदीप मिठारवाल रसायन शास्त्र, मुकेश मीणा रसायन शास्त्र, उपेन्द्र सिंह राजनीति विज्ञान, नितेश शर्मा जीव विज्ञान, डॉ. अनिल पालीवाल समाजशास्त्र का तबादला एक माह के दरम्यान हाे गया। काॅलेज में अधिकांश विद्यार्थी जनजाति वर्ग के है और यहां सभी सांसद विधायक भी जनजाति वर्ग के है।

नए खुले कॉलेजो की स्थिति और भी बदतर :

बिछीवाड़ा,सीमलवाड़ा,सागवाड़ा,कन्या महाविद्यालय डूंगरपुर और चिखली कॉलेज की हालत भी ज्यादा अच्छी नही है। कन्या महाविद्यालय में जहां वर्तमान में 5 पद ही भरे है वही अन्य नए खुले महाविद्यालय में पूरा कॉलेज एक या दो शिक्षकों के भरोसे है।

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