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उपभोक्ता कोर्ट का फैसला:पाॅलिसी में जमा किए 1.81 लाख, समय पूरा होने पर मिले सिर्फ 96 हजार ही

डूंगरपुर2 महीने पहले
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  • अब शेष राशि देनी पड़ेगी एलआईसी काे

भारतीय जीवन बीमा निगम की ओर से पाॅलिसी पर कम राशि देने पर उपभोक्ता ने उपभोक्ता कोर्ट में परिवाद दायर किया। कोर्ट ने दोनों पक्ष की दलील सुनने के बाद भारतीय जीवन बीमा निगम को 85 हजार 162 रुपए की राशि उपभोक्ता को जमा कराने के आदेश दिए। परिवाद पेश करने की तारीख से भुगतान होने की अवधि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर की से ब्याज देने, पांच हजार रुपये परिवाद खर्च की राशि व साढ़े आठ हजार रुपए मानसिक क्षतिपूर्ति राशि अदा करने के भी आदेश गुरुवार को दिए है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के पीठासीन अधिकारी अध्यक्ष राजेश सिंह शेखावत, सदस्य जय दीक्षित, दीप्ति पंचाल ने हस्ताक्षर कर आदेश सुनाया।

टोकवासा निवासी सेवानिवृत पुलिसकर्मी सज्जनसिंह पुत्र कुरसिंह ने भारतीय जीवन बीमा निगम शाखा कार्यालय सागवाडा के शाखा प्रबंधक व भारतीय जीवन बीमा निगम मंडल कार्यालय उदयपुर के वरिष्ठ मंडल प्रबंधक के खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग में परिवाद दायर किया। इसमें बताया कि पाॅलिसी के तहत 10 साल में एक लाख 81 हजार 940 रुपए जमा करवाए। परिवादी ने उक्त पाॅलिसी के तहत 22 जून 2019 को भुगतान के लिए निवेदन किया।

इस पर परिवादी के खाते में 96 हजार 178 रुपए जमा हुए। परिवादी ने शेष राशि जमा कराने के लिए निवेदन किया। एलआईसी के अधिकारियों को कहा कि ब्याज, बोनस व अन्य परिलाभ मिला कर यह राशि जमा की गई राशि से अधिक होनी चाहिए। इस पर अधिकारियों ने परिवादी ने को कहा कि आपकी पाॅलिसी के अनुसार अधिक राशि नहीं दी जा सकती है। आपकी पाॅलिसी में पूर्ण अवधि बीमा धन रुपये 71 हजार 160 रुपये अंकित है।

इसलिए अधिक राशि दिया जाना संभव नहीं है। इस पर परिवादी ने पेंपलेट में जारी निर्देशों के बारे में बताया। परिवादी को पाॅलिसी जारी होने के करीब दो माह बाद प्राप्त हुई। इसके बाद परिवादी ने एजेंट से संपर्क किया। इसके बाद एजेंट ने एलआईसी के अधिकारियों को लिखा कि बीमा धारक को जमा राशि से अधिक राशि भुगतान करने का आश्वासन दिया था। एजेंट की तरफ से लिखित आवेदन के बाद भी बीमा कंपनी ने परिवादी को ब्याज, बोनस व परिलाभ दिए जाने पर कोई ध्यान नहीं दिया।

एलआईसी के अधिकारियों ने यह दिया था जवाब

इस पर एललाईसी के अधिकारियों ने जवाब दिया कि अनुबंध से परे जाकर किसी भी प्रकार का लाभ दिया जाना संभव नहीं होता है। कंपनी ने अधिकारियों ने प्रार्थी ने नाजायज लाभ प्राप्त करने की नियत से परिवाद किया है। परिवादी के साथ कोई अनुचित व्यापार, सेवा दोष नहीं किया गया है।

जीवन सरल योजना आईआरडीए द्वारा प्रमाणित योजना है। इसका मुख्य उदे्दश्य जोखिम को कवर करना है। इसमें मृत्यु हित लाभ बीमाधन का 250 गुणा होता है। पूर्णावधि बीमाधन की गणना प्रवेश के समय आयु व पाॅलिसी की अवधि के अनुसार होती है। पाॅलिसी बांड के मुख्य पृष्ठ पर सारी शर्ते अंकित है। परिवादी की ओर से दिए गए लीगल नोटिस का जवाब भी रजिस्टर्ड पत्र द्वारा दिया गया है। इसमें लिखा कि विज्ञापन व पेंपलेट से एलआईसी का कोई सरोकार नहीं है। परिवाद पत्र खारिज करने का आदेश करने की मांग की थी।

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