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गर्मी की दस्तक के साथ ही सूखने लगे हलक:जिले के 800 गांव और 15 लाख आबादी हैंडपंप पर निर्भर, गर्मी आते ही अधिकांश हैडपंप देने लगे जवाब

डूंगरपुर13 दिन पहले
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  • जिले में फ्लाेराइड और नाईट्रेट की अधिकता के कारण कई फिल्टर प्लांट हुए खराब, जनता जल मिशन में 31 गांवाें के लिए स्वीकृति, 972 गांवाें काे अभी भी हैंडपंप पर ही गुजारने पडे़गे दिन

आजादी के 73 साल बाद भी लाेगाेे काे शुद्ध पेयजल पिलाने के लिए राज्य सरकार काेई सफलता नहीं मिली हैं। जिले के 972 गांवाें में सिर्फ 131 गांवाें में विभिन्न याेजना के तहत पेयजल पहुंचाया जा रहा हैं। वहीं 800 गांव आज भी हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं। इन गांवाें के लिए अभी तक काेई बड़ी याेजना या प्लान नहीं बना हैं।

इसके कारण हर साल गर्मी के माैसम में उन्हें यह परेशानी झेलनी पड़ती हैं। इस वर्ष से भले ही जनता जल मिशन याेजना के तहत केंद्र सरकार 31 गांवाें के लिए वित्तीय स्वीकृत दी है लेकिन इस याेजना में भी 768 गांवाें के लिए अभी तक काेई प्लान नहीं बन पा रहा हैं।

इसके चलते इन लाेगाें काे कई सालाें तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने कई साल इंतजार करना पडे़गा। इसके अलावा जिले की 15 लाख से अधिक आबादी अभी भी कुंओँ, बाेरवेल या हैंडपंप के पानी पर निर्भर हैं।

जिसमें फ्लाेराइड, नाईटे्रट और कई घातक खनिज तत्व घुले हुए हाेते हैं। विभाग इन प्राकृतिक जल स्त्राेत में ब्लिचिंग पाउडर डालते हैं। इसके बावजूद इन खनिज तत्वाें काे पूर्ण हटा नहीं पाते हैं।

यहां के लाेगाे काे फ्लाेराेसिस सहित कई बीमारी से पीडित हैं। हालांकि कुछ गांवाें में डीफ्लाेराइड यूनिट लगी हुई है लेकिन जिले की भाेगाेलिक परिस्थिति के अनुसान फले या ढ़ाणिया में बिखरी हुई बस्ती हैं। जिससे उन्हें पानी के लिए लम्बी दूरी तय करनी पड़ती हैं। वहीं, गर्मी के बढ़ते प्रकाेप के साथ एक के बाद एक कई हैडपंप जवाब देते जा रहे हैं।

जिले में पेयजल व्यवस्था की स्थिति: जिले की 2011 की जनसंख्या के अनुसार कुल 16 लाख आबादी के अनुसार पेयजल याेजना चल रही हैं। जिसमें डूंगरपुर शहर, सागवाड़ा और गलियकाेट काे शहरी पेयजल याेजना के तहत राेज पाइपलाइन के माध्यम से घराें तक पानी पहुंचाया जाता हैं। इसके अलावा बिछीवाड़ा, सीमलवाड़ा, आसपुर और साबला में पेयजल याेजना विकसित की हैं। इसमें 28 गांवाें में पाइपलाइन याेजना के तहत कुंओं या बाेरवेल से पानी खिंचकर पंप हाऊस के माध्यम से टंकी में भरा जाता हैं।

जहां से पाइपलाइन के माध्यम से घराें तक पहुंचाया जाता हैं। यहां पर पानी काे फिल्टर करने के लिए काेई व्यवस्था नहीं हैं। इसके अलावा 41 पंप एवं टेंक याेजना के तहत गांव जुडे हुए हैं। इन याेजना में गांव के कुंआ या बाेरवेल से पानी खिंचकर टंकी में भर दिया जाता हैं। टंकी पर पानी के नल लगा दिए हैं। यहां पर पानी भरकर ग्रामीण ले जाते हैं।

यहां पर पानी के फिल्टर करने की काेई व्यवस्था नहीं हैं। इसके अलावा 20 में जनता जल याेजना के तहत टंकी और पाइपलाइन बिछे हुए हैं। जहां पर पानी लाेगाे तक पहुंचाया जाता हैं। डूंगरपुर, आसपुर, सीमलवाड़ा औश्र सागवाड़ा काे छाैड़कर पूरे जिले में बगैर फिल्टर के प्रक्रतिक स्त्राैत से पानी पिलाया जाता हैं।

गुजरात जल संधि पर काेई नहीं करता बात: जिले में पेयजल स्त्राैत का सबसे बडा केंद्र कडाणा बांध का बेक वाटर हैं। राजस्थान और गुजरात सरकार की जलसंधि के तहत इस पानी का सीधा उपयाेग डूंगरपुर जिला नहीं कर पाता हैं। इसके कारण कड़ाणा बेक वाटर से जुडे चिखली, गलियाकाेट, सागवाड़ा, साबला तहसील क्षेत्र के सैकडाें गांवाें काे पानी हाेने के बावजूद उपयाेग नहीं कर पाते हैं। इस ओर काेई भी जनप्रतिनिधि ध्यान नहीं दे रहा हैं। इसके कारण जिले की 10 लाख से अधिक आबादी काे शुद्ध पेयजल से वंचित रहना पड़ता हैं।

पीठ के वार्ड 3 में तीन माह से हैंडपंप नकारा, पेयजल को परेशान ग्रामीण
पीठ. कस्बे में वार्ड 3 बैंक ऑफ बड़ौदा के पास स्थित हैंडपम्प तीन महीने से नकारा पड़ा है। इस हैंडपम्प से रोजाना 50 घरों के लोग पानी पीते है लेकिन हेंडपम्प खराब होने से लोग अगल बगल से पानी का जुगाड़ कर कर रहे हैं। पास ही बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखा है लेन देन के लिए आने वाले लोग भी पानी पीने के लिए इस हैंडपम्प पर ही निर्भर रहते।

हैंडपम्प खराब होने से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लालसिह चौहान, हीरालाल खराड़ी सहित लोगों ने बताया कि तीन महीनों से हैंडपम्प से पानी बाहर नहीं निकल रहा है। सीमलवाड़ा पंचायत समिति में पुरानी पाईप जमा कराई लेकिन उसके बदले में आज तक नई पाईप नहीं दी है। इस कारण हैंडपम्प में पाईप हीं नहीं है फिर पानी बाहर कैसे निकलेगा। ग्रामीणों ने जल्द ही नई पाइप दिलाने की मांग की।

फ्लाेराइड और नाइट्रेट प्रभावित गांवाें में सबसे ज्यादा प्रभावित
पूरा जिला फ्लाेराइड या फैल्सपार खनिज से प्रभावित हैं। जिसके कारण भूमिगत जल, स्तही जल और प्राकृतिक स्त्राैत में माैजूदा जल में फ्लाेराइड ज्यादा मिलता हैं। जिसके शरीर में उपयेाग से फ़्लाेराेसिस राेग हाेता हैं। जाे शरीर के लिए नुकसान दायक हाेता हैं। इसके लिए सरकार स्तर पर पूरे जिले में 420 गांवाें में डीसाेलराइज फिल्टर प्लांट लगा रखे हैं। भूमिगत जल स्त्राैत से साैलर सिस्टम से पानी काे फिल्टर करके आमजन काे उपलब्ध कराती हैं।

इसके बावजूद करीब 90 प्रतिशत आबादी बगैर फिल्टर पानी पीने काे मजबूर हैं। इसके अलावा जिलेभर में 67 से अधिक गांव भी नाईट्रेट की अधिकता पाई जाती हैं। जिसमें इन गांवाें में पानी पीने से बीमारी हाेने का खतरा रहता हैं।

करीब 800 गांव हैंडपंप पर निर्भर हैं। सरकार स्तर पर जनता जल मिशन के तहत 31 गांवाें में याेजना शुरू हाेगी। आने वाले कुछ वर्षाें में सभी के घराें तक पेयजल पहुंचेंगा। फिल्टर अभी दाेनाें शहर और आसपुर में बना हुआ हैं। जल्द ही गांवाें में शुद्ध पेयजल पहुंचाने की दिशा में विभाग काम कर रहा हैं। प्रमाेद वर्मा, एक्सईएन जलदाय विभाग डूंगरपुर।

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