सभागार में धर्मसभा:आचार्य बोले - धर्म की रक्षा में समाज को जागरूक रखने के लिए साधु और संत कभी पीछे नहीं हटे

सागवाड़ाएक वर्ष पहले
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  • ज्ञानामृत वर्षायोग के तहत जैन बोर्डिंग के वात्सल्य सभागार में धर्मसभा

ज्ञानामृत वर्षायोग के तहत जैन बोर्डिंग के वात्सल्य सभागार में गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य अनुभव सागरजी महाराज कहा कि देश की रक्षा के लिए सीमा पर खड़े सैनिक और धर्म की रक्षा में समाज को सजग व जागरूक रखने के लिए साधु संत कभी पीछे नहीं हटे। आचार्य ने कहा कि सैनिक अपने घर- परिवार से दूर रहकर देश की सेवा में जीवन समर्पित करते हैं तो संत अपने त्यागीवर्ती भाव से धर्म की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित करते हैं।

साधु वही होता है जो आत्मीय संतोष व त्याग की भावना प्रबल रखते हुए तप साधना और स्वाध्याय द्वारा मानव जीवन को प्रभु भक्ति की ओर अग्रसर कर आत्म कल्याण के मार्ग पर ले जाते हैं और धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहते हैं। सीमा पर सैनिक और धर्म में संतों के योगदान का सबसे बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा है कि सैनिक के पास अस्त्र-शस्त्र होते हैं मगर साधु-संतों के पास केवल शास्त्र होते हैं। जिससे आत्मज्ञान ग्रहण करते हुए समाज को सही दिशा की ओर ले जाने का कार्य निरंतर करते रहते हैं।

आचार्य ने कहा कि जीवन में जिसे विसर्जन करना नहीं आता उसके द्वारा सर्जन करना भी व्यर्थ है क्योंकि जब छोड़ना नहीं आता तो जोड़ना भी नहीं चाहिए। जोडा हुआ तथा सर्जन किया हुआ जरूर आज तुम्हारा हो सकता है लेकिन निश्चित रूप से कल किसी और का ही होगा। धर्मसभा में आचार्य ने भय के प्रकार बताते हुए कहा कि मित्रता में भेद, सुख में खेद, संबंधों में विच्छेद, राज्य में नाश संपदा में सर्वनाश, भोग में रोग तथा रोग में वियोग के साथ की आयु में निरंतर क्षय होने का भय बना ही रहता है।

जबकि आत्मानुशासन ग्रंथ में गुणवंत देव कहते हैं कि भय सब जगह है मगर जहाँ वैराग्य हो वहा भय कभी नहीं होता है। आचार्य ने माताओं को सीख देते हुए कहा कि परिवार में बच्चों को गलती करने पर पहले समझाना, दूसरी बार रोकना और तीसरी बार ठोकना आवश्यक है। अन्यथा एक छोटी सी लापरवाही से बच्चे की जवानी बुरी तरह से बिगड़ जाएगी।

धर्म सभा से पूर्व आचार्य का पाद प्रक्षालन पवन कुमार गोवाडिया परिवार ने किया। आचार्य शांतिसागरजी महाराज के चित्र का अनावरण पुरुष वर्ग ने और आचार्य अभिनंदन सागरजी महाराज के चित्र का अनावरण महिला वर्ग ने किया। संचालन चातुर्मास कमेटी अध्यक्ष अश्विन बोबड़ा ने किया।

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