शहर में आए विदेशी मेहमान:16 साल बाद साइबेरिया से आया 15 हवाशील का झुंड, डूंगरपुर की गेपसागर झील में दिखे विदेशी मेहमान

डूंगरपुर11 दिन पहले
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डूंगरपुर। उदयबिलास पैलेस के पीछे हवाशील का झुंड।  फोटो-विभस गांधी - Dainik Bhaskar
डूंगरपुर। उदयबिलास पैलेस के पीछे हवाशील का झुंड। फोटो-विभस गांधी

इस बार प्रवासी पक्षियों लेकर बड़ी खुशखबरी आई है। वर्ष 2005 के बाद यानी पूरे 16 साल बाद हजारों किमी दूर साइबेरिया से डालमेशियन पेलिकन यानी हवाशील नामक प्रवासी पक्षी डूंगरपुर शहर की गेपसागर झील में देखा गया। उडते समय इसकी रफ्तार बहुत तेज होती है। इसमें खास बात यह है कि यह प्रवासी पक्षी स्वच्छ पानी की झील पर ही आता है, जहां उसे भोजन में मछलियां भी भरपूर मात्रा में मिल सके।

यह पक्षी शीत प्रदेशों का है तथा जहां सर्दी अच्छी रहने की संभावना इसे लगती है वहां ही अपना प्रवास करता है। यानी इस बार डूंगरपुर शहर में अच्छी सर्दी रहने की संभावना है। शहर के वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर विभस गांधी ने गुरुवार अलसुबह गेपसागर के पिछले हिस्से में भ्रमण करते हुए जब प्रवासी पक्षी हवाशीलों के झुंड को तैरते देखा। इन हवाशीलों को वर्ष 2005 के बाद गेपसागर झील में देखा गया है। प्रवासी पक्षी हवाशील पृथ्वी के सबसे बड़े समुद्री पक्षियों में से एक है। इनमें एक लंबी चोंच और एक बड़े गले की थैली की विशेषता होती है जिनकी सहायता से ये अपनी चोंच की थैली में पर्याप्त पानी और भोजन रख सकते है।

विशेषता - यह पक्षी स्वच्छ पानी की झील पर ही आता है, तेज सर्दी के भी दिए संकेत

  • इनके घुंघराले पंख करते हैं वन्यजीव प्रेमियों को आकर्षित।
  • डालमेशियन पेलिकन नाम पक्षी पेलिकन प्रजाति के सबसे बड़े पक्षियों में गिने जाते हैं।
  • सफेद रंग के इन पक्षियों के लंबी गर्दन व चोंच होती है। जिसकी मदद से पानी में बड़ी मछली भी आसानी से पकड़ लेते हैं।
  • ज्यादातर समय जलाशयों में ही तैरते रहते हुए मछलियों को अपना शिकार बनाते हैं, मछलियां ही इनका मुख्य भोजन है।
  • इनके सिर पर घुंघराले पंख, भूरे गहरे रंग के पैर लोगों को अपनी आकर्षित करते हैं।
  • इनके घोंसले वनस्पति के कच्चे ढेर होते हैं। जिन्हें जमीन पर या वनस्पति के घने मैट पर रखा जाता है।
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