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पदयात्री छोटे अंबाजी मंदिर पहुंचे, ध्वजा चढ़ाई:1993 में 51 पदयात्रियों के साथ अंबाजी पदयात्रा सर्वप्रथम पदयात्रा प्रारंभ की गई थी

डूंगरपुर14 दिन पहले
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छोटे अम्बाजी मंदिर में ध्वजा चढ़ाते हुए। - Dainik Bhaskar
छोटे अम्बाजी मंदिर में ध्वजा चढ़ाते हुए।

जय अम्बे पदयात्रा मित्र संघ, डूंगरपुर के सदस्य 28 वीं पदयात्रा वर्ष के उपलक्ष में रविवार दोपहर छोटे अंबाजी मंदिर सकुशल पहुंच गए हैं तथा यहां उन्होंने माताजी के जयकारों के बीच ध्वजा चढ़ा दी है। सोमवार शाम को दल के सभी सदस्य बड़े अंबाजी मंदिर पहुंच जाएंगे और यहां ध्वजा चढ़ाएंगे। संघ के संस्थापक पदमेश गांधी ने बताया कि 1993 में 51 पदयात्रियों के साथ अंबाजी पदयात्रा सर्वप्रथम पदयात्रा प्रारंभ की।

यह भक्ति रथ लगातार 25 वर्षों तक पदयात्रा के रूप में चलता रहा। प्रति वर्ष डूंगरपुर नगर व जिले से 25000 से अधिक पदयात्री अंबाजी यात्रा कर रहे हैं। लगभग पांच वर्षों तक भुवनेश्वर मंदिर में अंबाजी पदयात्रियों के लिए भंडारा व विश्राम का आयोजन उनके संगठन द्वारा किया गया। अंबाजी पदयात्रा परंपरा गत रूप से चली आ रही है।

डूंगरपुर के श्री महाकाली मंदिर से पदयात्रा शुरू होती है और पूजन विधान के साथ ध्वजा अंबाजी धाम पर चढ़ाई जाती है। इस वर्ष श्री महाकाली मंदिर कंसारा चौक डूंगरपुर से सेवक रवि पहाड़ द्वारा ध्वजा पूजन की गई। पदयात्रियों में संस्थापक पदमेश गांधी, अध्यक्ष प्रदीप श्रीमाल, रजनीश चौबीसा, गजेन्द्र श्रीमाल, गोपाल श्रीमाल, चतरलाल डांगी, मनीष भावसार, मोतीलाल पंचाल, संजय पंचाल, राजेन्द्र साद, विकी सिसोदिया शामिल है।

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