डिजीटल व्यवस्था:पात्र बनकर सरकारी कार्मिकों ने वर्षों तक उठाया गरीब के हक का गेहूं, कार्रवाई की ताे दो महीने में ही जमा करवा दिए 30 लाख

डूंगरपुर2 महीने पहले
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  • 995 कार्मिक ऐसे है जाे अपात्र के रूप में चिन्हित हाे चुके हैं, लेकिन अब तक राशि काे जमा नहीं कराया है, अब अंतिम अवसर

पात्र बन कर सरकारी कार्मिकाें ने सालाें तक गरीबाें के हक का गेहूं उठाया, लेकिन व्यवस्था अाॅनलाइन हाेने से मामला पकड़ में अाया। अावश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्यवाही की चेतावनी ने दाे माह में 30 लाख से अधिक की राशि जमा हाे गई। अब तक 2627 सरकारी कार्मिकाें ने 3 कराेड़ 33 लाख 42 हजार रुपए की राशि काे सरकार काे जमा करा दिया है। दाे माह की स्थिति काे देखा जाए ताे करीब 300 से अधिक सरकारी कार्मिकाें ने राशि जमा कर एक्शन से पीछा छुड़ा लिया है। अब पात्र बन कर राशि जमा नहीं कराने की संख्या 995 हाे गई है, लेकिन राेजाना कर्मचारी की तरफ से राशि जमा करा कर इसे क्लियर कराने का काम किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार खाद्य एवं नागरिक अापूर्ति विभाग के शासन सचिव की तरफ से वीसी में अवैध रूप से गेहूं प्राप्त करने वाले सरकारी कर्मचारियाें से वसूली करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। अवैध रूप से लाभ प्राप्त करने वाले से वसूली करने के मामले में डूंगरपुर जिला टाॅप टेन में था, जाे अब टाॅप फाइव में पहुंच गया है। जिले में एेसे कर्मचारियाें की संख्या करीब 3622 थी। इस पर जिले में 27 रुपए प्रति किलाे गेहूं के हिसाब से 2627 सरकारी कर्मचारियाें से कुल 3 कराेड़ 33 लाख 42 हजार रुपए वसूल कर राजकाेष में जमा करा दिए।

नाैकरी लगने के बाद सूची से हटवाना था अपना नाम खाद्य सुरक्षा में चयन और निष्कासन का जिम्मा ग्राम विकास अधिकारी, विकास अधिकारी और उपखंड अधिकारी के पास हाेता है। काेई भी पात्र लाभार्थी ई-मित्र के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन करता है। स्वीकृति की सूची रसद विभाग के पास पहुंचने पर योजना का लाभ दिया जाता है। इसके अलावा किसी भी व्यक्ति की सरकारी नाैकरी लगने के बाद उसे नियमाें के अनुसार अपना नाम लाभार्थी सूची से हटाना जरूरी है, लेकिन डूंगरपुर जिले में एेसा नहीं हुअा।

प्रवर्तन निरीक्षक पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि सरकारी कार्मिक खाद्य सुरक्षा याेजना का लाभ नहीं ले सकते हैं। डूंगरपुर जिले में सरकारी कार्मिकाें ने राशन उठाया। इस पर लिस्ट तैयार कर रिकवरी की गई। अब तक 3 कराेड़ 33 लाख की रिकवरी की जा चुकी है। जिले में 27 रुपये प्रति किलाे के हिसाब से वसूली कर सरकार के राजकाेष में जमा कराई जा रही है। यदि किसी सरकारी कार्मिक की तरफ से फर्जी तरीके से उठाई गई राशि काे जमा नहीं कराया जाता है ताे संबंधित विभाग के प्रभारी काे इस संबंध में अवगत कराया जाएगा। उनके वेतनमान से इसकी कटाैती की जाएगी। इसके अलावा अावश्यक वस्तु अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कराने का भी प्रावधान है। रसद विभाग की तरफ से सरकारी कार्मिकाें की सूची काे राशन डीलर काे उपलब्ध करा कर वसूली के प्रयास किए जा रहे हैं। संबंधित व्यक्ति की तरफ से सामने अाने के बाद यह जांचा जा रहा है कि उसकी सरकारी नाैकरी कब लगी है।

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