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2 वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया:3 साल बाद मिली बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट को मंजूरी, डूंगरपुर समेत 3 जिलों के जैविक कचरे को करेंगे डिस्पोज

डूंगरपुर21 दिन पहले
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वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते जिला कलेक्टर सुरेश कुमार। - Dainik Bhaskar
वाहनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करते जिला कलेक्टर सुरेश कुमार।

शहर के भंडारिया में 3 साल से तैयार कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट को आखिरकार राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की मंजूरी मिल गई है। इसके बाद तीन जिलों के अस्पतालों से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट का डूंगरपुर में निस्तारण होगा। इसके लिए बायो मेडिकल वेस्ट एकत्रित करने वाले दो वाहनों को डूंगरपुर कलेक्टर ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

डूंगरपुर नगर परिषद की ओर से तीन साल पहले ही भंडारिया गांव में बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट तैयार कर लिया गया है, लेकिन यह प्लांट राज्य प्रदूषण बोर्ड की ओर से मंजूरी नहीं मिलने के कारण अटका हुआ था। इस कारण डूंगरपुर का बायो मेडिकल वेस्ट भी अब तक उदयपुर ही जाता था। जिला कलेक्टर सुरेश कुमार ओला ने बताया भंडारिया में नगरपरिषद की ओर से बनाये गये कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी मिल गई है।

इसके बाद अब ई-टेक प्रोजेक्ट कम्पनी की ओर से प्लांट का संचालन शुरू कर दिया गया है। डूंगरपुर जिले के भंडारिया में स्थित कोमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट में डूंगरपुर, बांसवाडा और प्रतापगढ़ जिलों के समस्त सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों से निकलने वाले जीव चिकित्सा अपशिष्ट का निस्तारण किया जा सकेगा।

इसके लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित दरों पर ही इसका कलेक्शन भी किया जाएगा। तीनों जिलों के अस्पतालों से बायो मेडिकल वेस्ट को एकत्रित करने के लिए दोनों वाहनों को रवाना किया गया है। ये वहां सम्बंधित जिलों में जाकर बायो मेडिकल वेस्ट को डूंगरपुर कॉमन बायो मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट तक लाएंगे। इसके बाद मेडिकल वेस्ट को अलग-अलग करते हुए उसका नियमानुसार निस्तारण किया जाएगा।

अब तक उदयपुर व चित्तौड़गढ़ की कंपनी उठाती थी मेडिकल वेस्ट
जिले में बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण को लेकर प्लांट नहीं होने से अब तक उदयपुर या चित्तौड़गढ़ की कंपनी ही ठेका लेती थी। यह कंपनी सप्ताहभर में एक बार जिला अस्पताल सहित जिले के सभी सरकारी व निजी अस्पतालों से बायो मेडिकल वेस्ट को एकत्रित करने के बाद उदयपुर ले जाती थी और निस्तारण किया जाता था।

इसके लिए अस्पतालों की ओर से लाखों रुपये का भुगतान भी होता था, लेकिन बायो मेडिकल वेस्ट का रोजाना एकत्रित नहीं होने से कई बार इधर-उधर पड़ा रहता था ओर कई बार कुत्ते भी उठाकर ले जाते थे। ऐसी समस्या से भी अब राहत मिलेगी।

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