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धोखाधड़ी का मामला दर्ज:राज्यसभा सांसद, तत्कालीन तहसीलदार, पटवारी समेत 5 लोगों के खिलाफ फर्जी दस्तावेज तैयार कर 40 बीघा जमीन हड़पने का मामला दर्ज, सीआईडी सीबी करेगी मामले की जांच

डूंगरपुर2 महीने पहले
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राज्यसभा सांसद हर्षवर्धनसिंह। - Dainik Bhaskar
राज्यसभा सांसद हर्षवर्धनसिंह।

जिले के कोतवाली थाने में राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह सहित 5 लोगों के खिलाफ कूटरचित दस्तावेज तैयार कर 40 बीघा जमीन हड़पने का मामला दर्ज हुआ है। मामला राज्यसभा सांसद से जुड़ा होने के कारण जांच सीआईडी सीबी को सौंप दी गई। ऐसे में पूरी कार्रवाई सीआईडी की ओर से ही की जाएगी। कोतवाली थानाधिकारी दिलीपदान ने बताया कि शहर के लालपुरा निवासी सलीम पुत्र पिरबक्ष मेवाफरोश मुसलमान ने सीजेएम कोर्ट में इस्तगासा पेश किया था। कोर्ट ने मामले में कोतवाली पुलिस को केस दर्ज करते हुए जांच के निर्देश दिए। इस पर राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह, तत्कालीन डूंगरपुर तहसीलदार, मांडवा खापरडा पटवारी, सरपंच और ग्राम सचिव के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज करवाया है। इस्तगासे में बताया था कि साल 1965 में डूंगरपुर महारावल के सेकेट्री अम्बालाल पटेल से उनके पिता पीरबक्ष मेवाफरोश ने 40 बीघा जमीन खरीदी थी। 1985 को उपपंजीयन कार्यालय में रजिस्ट्री भी करवाई थी लेकिन सीलिंग एक्ट लागू होने के बाद उनकी जमीन बिलानाम हो गई थी, जिसके चलते प्रार्थी का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हो सका था। इसके बाद प्रार्थी सलीम ने डूंगरपुर एसडीएम कोर्ट में खातेदारी हक के लिए प्रार्थना-पत्र दिया था। जिसमें 13 फ़रवरी 2001 को लेंड होल्डर डूंगरपुर तहसीलदार की ओर से सरकारी बिलानाम जमीन बताने पर डूंगरपुर एसडीएम ने प्रार्थना-पत्र खारिज कर दिया था। जिसके बाद प्रार्थी ने राजस्व अपील अधिकारी डूंगरपुर के समक्ष अपील की। जिसमें 14 अगस्त 2001 को राजस्व अपील अधिकारी ने डूंगरपुर एसडीएम कोर्ट के निर्णय को खारिज करते हुए रजिस्ट्रेड दस्तावेजों के आधार पर प्रार्थी को हिस्सेदार काश्तकार घोषित किया था। इस निर्णय के बाद डूंगरपुर तहसीलदार के राजस्व मंडल अजमेर में अपील की थी। राजस्व मंडल अजमेर ने तहसीलदार की अपील को खारिज कर दिया था। इसके बाद प्रार्थी सलीम ने 5 जुलाई 2004 को नामान्तरण खोलने के लिए डूंगरपुर तहसीलदार को प्रार्थना-पत्र पेश किया था। रेवेन्यु बोर्ड में मामला लंबित होने का हवाला देते हुए तहसीलदार ने नामान्तरण नहीं खोला था। 13 जून 2017 को राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह ने अपने प्रभाव से कूटरचित दस्तावेज तैयार कर तत्कालीन डूंगरपुर तहसीलदार, मांडवा खापरडा पटवारी, सरपंच और ग्राम सचिव से मिलीभगत कर 40 बीघा जमीन का नामान्तरण अपने नाम खुलवा लिया था। इसी मामले में पीड़ित सलीम मेवाफरोश ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस्तगासा दिया था। कोर्ट के आदेश से इस्तगासे के आधार पर कोतवाली थाना पुलिस ने राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह, तत्कालीन डूंगरपुर तहसीलदार, मांडवा खापरडा पटवारी, सरपंच और ग्राम सचिव के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। मामले की जांच अब सीआईडी सीबी की ओर से की जाएगी।

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