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मांग:कोर्ट ने वरिष्ठ अध्यापक शिक्षक पद पर दिए नियुक्ति के आदेश

डूंगरपुर6 दिन पहले
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  • विभाग ने सामाजिक रीति रिवाज से किया गया विवाह विच्छेद मान्य नहीं था, डूंगरपुर जिले की संचिया गांव की युवती का मामला

जिले के संचिया गांव की युवती का वरिष्ठ अध्यापक विषय संस्कृत के पद पर परित्यक्ता श्रेणी में अंतरिम रूप से चयन हुआ था। संबंधित विभाग ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति यह कहते हुए रोकी थी कि उसकी ओर से सामाजिक रीति रिवाज यानि छेड़ा फाडना से किया गया विवाह विच्छेद मान्य नहीं है।

इसके बाद युवती ने अधिवक्ता के जरिए काेर्ट की शरण ली। प्रतिवादी यानि शिक्षा विभाग के सचिव, माध्यमिक शिक्षा विभाग के निदेशक, आरपीएएसी सचिव व उपसचिव के खिलाफ वाद दायर किया। काेर्ट ने तर्काें काे सुनने के बाद वरिष्ठ शिक्षक पद पर नियुक्ति के आदेश दिए। छेडा फाड़ना सामाजिक रीति-रिवाज से युवती का तलाक भी काेर्ट में मान्य हाे गया।

एडवाेकेट ऋतुराज सिंह राठौड़ (बारां) ने कोर्ट को बताया कि याचिकाकर्ता संचिया डूंगरपुर निवासी संगीता वरहात ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती में परित्यक्ता श्रेणी के अंदर आवेदन किया था। याचिका का विवाह विच्छेद यानि शादी के बंधन से अलग हाेना आदिवासी समाज में प्रचलित प्रथा छेड़ा फाड़ना के अंतर्गत हुआ था। यह विवाह विच्छेद हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 29(2) के अंतर्गत मान्य हैं।

छेडा फाड़ना सामाजिक रीति रिवाज की प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए याचिकाकर्ता ने ग्राम पंचायत चिड़ियावास एवं पंचायत समिति तलवाड़ा की ओर से जारी किए गए प्रमाण पत्र भी काेर्ट में पेश किए। यह भी बताया कि कि ग्राम सेवक 2016 भर्ती पेपर में प्रश्न संख्या 53 पर पूछा गया था कि भील समाज के संदर्भ में छेड़ा फाड़ना का क्या मतलब होता है जिसका सही उत्तर विवाह विच्छेद था।

एडवाेकेट ने काेर्ट काे बताया कि प्रतिवादी विभाग ने याचिकाकर्ता को 6 मई 2019 को एक पत्र जारी किया गया था। याचिकाकर्ता संगीता को सूचित किया गया था कि उसका वरिष्ठ अध्यापक विषय संस्कृत के पद पर परित्यक्ता श्रेणी में अंतरिम रूप से चयन कर लिया गया है।

प्रतिवादी विभाग ने याचिकाकर्ता को परित्यक्ता संबंधी प्रमाण पत्र/न्यायालय की ओर से जारी डिक्री प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। उस समय पारिवारिक न्यायालय से डिक्री के अभाव में याचिकाकर्ता के छेड़ा फाड़ना हो जाने से संबंधित दस्तावेज प्रतिवादी विभाग को जमा कराए गए।

हालांकि बाद में याचिकाकर्ता ने पारिवारिक न्यायालय से भी विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त कर ली थी। प्रतिवादी विभाग ने याचिकाकर्ता की नियुक्ति यह कहते हुए रोकी गई थी कि उसके द्वारा सामाजिक रीति रिवाज से किया गया विवाह विच्छेद मान्य नहीं है।

याचिकाकर्ता के तर्कों को सुनने के बाद जज दिनेश मेहता ने याचिकाकर्ता को विवाह विच्छेद की डिक्री सहित प्रतिवादी विभाग के समस्त प्रस्तुत होने के निर्देश दिए। 8 हफ्ते के अंदर वरिष्ठ अध्यापक पद पर याचिकाकर्ता को नियुक्ति (अगर मेरिट में है तो) देने के आदेश पारित किए।

सामाजिक रीति रिवाज छेड़ा फाडना यानि विवाह से अलग हाेना काेर्ट में मान्य
एडवाेकेट ऋतुराज सिंह राठौड़ ने बताया कि यह काेर्ट के लिए स्पेशल केस था। टीएसपी के जनजाति वर्ग में सामाजिक रीति रिवाज छेड़ा फाडना यानि विवाह से अलग हाेना हाेना ही काेर्ट के लिए मान्य है। क्याेंकि जनजाति वर्ग में शादी के बंधन से अलग हाेना छेड़ा फाड़ना कहलाता है।

यह पंरपरा इनकी हजाराें सालाें से चली आ रही है।इस केस में दाेनाें तरफ के पंचाें की तरफ से लिखा गया दस्तावेज पेश किया। इस केस में छेड़ा फाडना के दस्तावेज पेश करने के बाद पारिवारिक न्यायालय से भी विवाह विच्छेद की डिक्री प्राप्त कर ली थी। इसलिए काेर्ट ने यहीं कहा कि इन्हाेेंने सामाजिक स्तर पर तलाक ले लिया। अब पारिवारिक काेर्ट की डिक्री भी आ गई। ऐसे मेेंं नियुक्ति के आदेश जारी किए।

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