फसल खराबे की सर्वे रिपाेर्ट:खरीफ के लिए 47 हजार किसानों ने भरा दो करोड़ प्रीमियम गत साल के मुकाबले आवेदकों की 11 हजार कम रही

डूंगरपुर2 महीने पहले
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प्रशासन की खरीफ फसल खराबे की सर्वे रिपाेर्ट में 24.98 कराेड़ रुपए का नुकसान का आंकलन ताे सामने अा गया है, लेकिन अब किसानाें काे प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना से खराबे की राशि मिलने की अास बनी हुई है। डूंगरपुर जिले में खरीफ 2021 के लिए ऋणी व गैर ऋणी काे मिला कर 47 हजार 652 किसानाें ने दाे कराेड़ रुपए से अधिक का प्रीमियम भर कर अपनी उपज काे सुरक्षित किया है।

समय पर पानी नहीं मिलने व सूखे के हालात ने किसानाें की मेहनत पर पानी फेर दिया था। इस वजह से अब किसानाें काे अपनी प्रीमियम का 3 से गुना राशि मिलने की अास बनी हुई है। बताया जा रहा है कि किसानाें ने अपने हिस्से का 2 कराेड़ एक लाख 25 हजार 141 रुपए की राशि भर कर 31 हजार 665 हैक्टयर क्षेत्रफल काे बीमित कराया है यानि 1.89 लाख बीघा भूमि का बीमा कराया है। यानि कुल क्षेत्रफल का 25.30 प्रतिशत हैक्टेयर भूमि काे बीमा याेजना के तहत बीमित कराने का काम किया है।

जानकारी के अनुसार प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसल को काफी नुकसान होता है। जिसकी वजह से किसानों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण होने वाली फसल के नुकसान की वजह से किसानों की आर्थिक स्थिति भी खराब हो जाती है। केंद्र सरकार द्वारा इस समस्या को दूर करने के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का शुभारंभ किया गया। इस योजना के माध्यम से किसानों को किसी भी प्रकार की आपदा के कारण हुए फसल के नुकसान पर बीमा प्रदान किया जाता है।

इस योजना में केवल प्राकृतिक आपदा जैसे कि सूखा पड़ना, ओले पड़ना आदि शामिल है। यदि किसी और वजह से फसल का नुकसान होता है तो बीमे की राशि नहीं प्रदान की जाएगी। बीमा योजना के जरिये किसानों को खेती में रूचि बनाए रखने, स्थायी आमदनी उपलब्ध कराने एवं फसलों में होने वाले नुकसान व चिंताओं से मुक्त कराना है। इस याेजना का मकसद यह भी है कि लगातार खेती करने के लिए किसानो को बढ़ावा देना है। लाेग परंपरागत खेती के साथ अाधुनिक खेती की तरफ कदम बढ़ाए है।

सीमलवाड़ा व चिखली तहसील के 202 गांव के किसानाें ने कराया हाेगा बीमा ताे मिल सकता है लाभ, यहां पर 6 हजार 951 हैक्टेयर फसल हुई है खराब...किसानाें का कहना है कि खेती का काम अब अधिक जाेखिम वाला हाे गया है। सीजन में बरसात कितनी मात्रा में होगी, पशुओं से फसलों का रखरखाव आदि विभिन्न चीजों को ध्यान में रखना पड़ता है। उसके बाद ही फसल तैयार होती है। किसानों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। इस कारण परेशान हाेना पड़ता है। इस बार प्रशासन की तरफ से 33 प्रतिशत काे मानक अाधार मान कर तीन तहसील के 344 गांव काे मुअावजे की सूची में शामिल किया है, लेकिन जिले की दाे तहसीलों में भी 20 से 27.99 प्रतिशत तक नुकसान का आंकलन किया है।

यह नुकसान 33 प्रतिशत से कम है। सीमलवाड़ा तहसील के 117 गांवों के 4051 हैक्टेयर में बोई फसल खराब हुई है, जो कुल प्रतिशत का 20.02 प्रतिशत है। इसके अलावा चिखली तहसील क्षेत्र में 85 गांव में 27.99 प्रतिशत फसल खराब हुई है। यानि 10 हजार 359 हैक्टेयर में 2900 हैक्टेयर में फसल खराबा हुआ। सरकार की तरफ से इनकाे मुअावजा मिलने की उम्मीद बहुत कम है, लेकिन फसल बीमा याेजना के तहत बीमा कराने की स्थिति में बीमा राशि मिलने की उम्मीद बनी हुई है। गत साल 3 कराेड़ के प्रीमियम पर 14 हजार से अधिक किसानाें काे मिले थे 11.74 कराेड़ : कृषि विभाग के अांकड़ाें पर नजर डाले ताे गत साल 2020 में 59 हजार 195 किसानाें ने प्रधानमंत्री फसल बीमा याेजना के तहत अावेदन कर 37 हजार 445 हैक्टेयर भूमि की उपज काे सुरक्षित करने बीमा कराया था। गत साल भी किसानाें काे नुकसान हुअा था। इस दाैरान किसानाें की तरफ से करीब तीन कराेड़ रुपए की प्रीमियम कृषक हिस्से की भरी गई थी।

इसमें से 14563 किसानाें काे याेजना के तहत लाभान्वित कर 11.74 कराेड़ रुपए की बीमा राशि का वितरण किया गया। हालांकि देखा जाए ताे गत साल के मुकाबले इस साल किसानाें काे अधिक नुकसान हुअा है। गत साल की अपेक्षा करीब 11 हजार 543 किसानाें ने इस साल बीमा याेजना के लिए अावेदन नहीं किया।

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