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कोविड-19:संक्रमित वृद्धा काे जिस आईसीयू में रखा, वहां सामान्य मरीज भी थे, माैत के 3 घंटे बाद तक शव खुले में पड़ा रहा

डूंगरपुरएक महीने पहले
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  • पीएमओ ने झूठ बाेला था कि सामान्य मरीजाें काे आईसीयू से शिफ्ट कर दिया था
  • वृद्धा का शव अंदर रखा हाेने के दाैरान भी एक मरीज काे भर्ती किया, 13 घंटे बाद आईसीयू पर लगाया ताला

(विश्वजीत गोले) जिले में पहली कोरोना संक्रमित वृद्धा की मौत के मामले में भास्कर की पड़ताल में अस्पताल प्रबंंधन की कई लापरवाही सामने आई है। सबसे बड़ी लापरवाही तो यह रही कि कोविड-19 अस्पताल में 11 बेड का आईसीयू व्यवस्थित होने के बावजूद सामान्य आईसीयू में लेकर आए, जबकि वृद्धा में आईएलआई लक्षण साफ दिख रहे थे।

वृद्धा की मौत के बाद उसका शव आईसीयू में तीन घंटे तक खुला पड़ा रहा, जबकि आईसीयू वार्ड में दो मरीज पहले से भर्ती थे। स्टाफ काे एक दिन बाद आइसाेलेटेड किया गया। अस्पताल प्रबंधन ने एक दिन पहले कहा था कि वृद्धा को नार्मल आईसीयू में शिफ्ट करने से पहले यहां भर्ती मरीजों को दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया था, जबकि ऐसा नहीं किया गया। वृद्धा की मौत 2 जुलाई की सुबह 5.15 बजे हुई थी, इससे पहले यहां भर्ती एक वृद्ध की 4.50 पर मौत हो चुकी थी।

वृद्धा की मौत के बाद करीब 7 बजे एक मरीज और भर्ती किया गया था। वृद्धा को सीमलवाड़ा अस्पताल से 1 जुलाई की दोपहर जिला कोविड-19 अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया था। वृद्धा की हालत काफी खराब थी। शाम करीब 7 बजे सांस लेने में तकलीफ बढ़ी ताे आइसोलेशन वार्ड के ऑनकॉल डॉक्टर ने तत्काल पीएमओ डॉ. कांतिलाल मेघवाल से संपर्क किया और मार्गदर्शन मांगा। पीएमओ ने वृद्धा को सामान्य अस्पताल के नार्मल आईसीयू में शिफ्ट करने के निर्देश दिए। जबकि पीएमओ को वृद्धा की पूरी स्थिति पता थी।

अस्पताल के ही डॉक्टराें का कहना है कि अगर वृद्धा पॉजिटिव वार्ड के आईसीयू में पहुंचती तो जान बच सकती थी। जिला कोविड-19 अस्पताल में 11 बेड का आईसीयू व्यवस्थित किया गया है और इसमें फिलहाल कोई मरीज भी भर्ती नहीं था। जबकि नार्मल आईसीयू में सामान्य मरीजों के होने से उनको संक्रमण का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

वृद्धा से पहले मरने वाले वृद्ध के परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया तो हटाया शव

नार्मल आईसीयू में वृद्धा को 1 जुलाई की शाम 7 बजे भर्ती किया गया था। उस समय यहां वार्ड में वीरजी नाम का एक मरीज पहले से ही भर्ती था। वह डायबिटिक होने के साथ ही अस्थमा का मरीज था। वृद्धा को जब नार्मल आईसीयू में भर्ती किया गया था तो वृद्ध के परिजनों ने उसे आइसोलेशन वार्ड से लाते हुए देख लिया था।

वृद्धा को यहां लाने का विरोध भी किया था लेकिन जब सुबह 4.50 पर इस वृद्ध की मौत हो हाेने पर परिजन आक्रोशित होकर डॉक्टर और नर्सिंग स्टॉफ पर भड़क उठे थे। परिजनों और डॉक्टरों के बीच गहमागहमी हो ही रही थी कि इसी दौरान 5.15 बजे वृद्धा की भी मौत हो गई। वृद्ध की डेडबॉडी को कोरोना संक्रमण की आशंका को लेकर परिजनों का गुस्सा बढ़ गया था। इसके बाद वहां से वृद्ध की शव को तत्काल हटाया गया।

मुंबई में एक्स-रे में सीने में कफ, सीटी स्केन में निमोनिया निकला था, अस्पताल में भीड़ ज्यादा होने से कोविड जांच नहीं कराई: पुत्र

वृद्धा के पुत्र ने भास्कर को बताया कि उसकी मां की तबीयत ज्यादा बिगड़ी तो वह मां को भिवंडी के एक निजी अस्पताल में लेकर गया था। वहां एक्स-रे कराया तो उसमें सीने में कफ जमा निकला। एचआर रिपोर्ट में भी सीने में कफ मिला। सीटी स्केन में निमोनिया मिला तो डॉक्टर ने कोविड-19 जांच को बोला। मां की कोविड जांच के लिए इंदिरा गांधी मेमोरियल अस्पताल में गया, लेकिन वहां मरीजों की भरमार देखकर वह घबरा गया और बिना जांच कराए ही मां को डूंगरपुर लेकर निकल पड़ा। डूंगरपुर में कोरोना के सभी मरीज ठीक हो रहे थे, उसने सोचा था कि मां का यहां अच्छी तरह से इलाज हो जाएगा।

सफाईकर्मियाें काे भी रखा धाेखे में... वृद्धा के शव को शिफ्ट करने वाले स्वीपरों को संक्रमण के बारे में बताया ही नहीं, वे शव काे एेसे ही माेर्चरी ले गए

नार्मल आईसीयू में वृद्धा की मौत 2 जुलाई की सुबह 5.15 बजे हो गई थी तथा यहां से डेडबॉडी को 8 बजे मोर्चरी में शिफ्ट किया गया। तीन घंटे तक डेडबॉडी आईसीयू के बेड पर ही पड़ी रही थी। संक्रमण को देखते हुए डेडबॉडी को कवर तक नहीं किया गया था। नाइट स्टाफ ने डेडबॉडी को उठाने से मना कर दिया था। सुबह जब दूसरा स्टॉफ आया तो डेडबॉडी हटाई गई।

डेडबॉडी शिफ्ट करने वाले स्वीपरों ने बताया कि उनको आईसीयू में किसी की डेथ होने का बताया गया था, यह मौत कोरोना संक्रमण से हुई है, यह उनको नहीं बताया। उन्होंने इसे सामान्य डेडबॉडी समझकर स्ट्रेचर रखकर मेन गेट पर लाए और यहां से इमरजेंसी के सामने से होते हुए मोर्चरी ले गए। इस दौरान रास्ते में कई मर्तबा डेडबॉडी के कपड़े संभालने, उसे स्ट्रेचर पर लिटाने और मोर्चरी में उतारने के दौरान छुआ गया है। शाम को जब इस महिला की मौत कोरोना संक्रमण से होने का पता चला तो चारों स्वीपर काफी तनाव में आ गए।

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