10वीं-12वीं पास 3 लड़कियों ने अमेरिकन को ठगा:मुंबई के 4 लड़के भी गैंग में शामिल, साथ में रहते हुए 15 लाख को शिकार बनाया

डूंगरपुर2 महीने पहले

डूंगरपुर में 6 दिन पहले पकड़े गए फर्जी कॉल सेंटर के तार मुंबई से जुड़े हैं। पूरे खेल का मास्टर माइंड मुंबई का बॉथम रोड्रिक्स है। उसने अपने गैंग में बेरोजगारी और आर्थिक तंगी से परेशान युवाओं को शामिल किया। बाकायदा उन्हें ट्रेनिंग दी। अमेरिकी लोगों से किस तरीके से बात करनी है, इंटरनेट कॉलिंग कर अमेजॉन कंपनी से माल डिलीवरी के बारे में क्या कहना है आदि जानकारी देकर ट्रेंड किया गया। यह भी बताया कि झांसा देकर 'स्क्रीन शेयरिंग एप' डाउनलोड करवाकर कोड किस तरह लेना है। इस तरीके से 15 लाख से ज्यादा लोगों को ठगी का शिकार बनाया।

गिरोह के कुछ सदस्य बीकॉम तक पढ़े-लिखे हैं। मुंबई के रहने वाले आरोपी आपस में सभी यार-दोस्त हैं। दो लड़के-लड़कियां गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड भी हैं। गिरोह के एक नाबालिग सहित 9 लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस मुख्य आरोपी की तलाश में जगह-जगह दबिश दे रही है।

मास्टर माइंड ने 10 से 20 हजार में नौकरी पर रखा
डूंगरपुर की डीएसटी टीम ने 18 नवंबर को सागवाडा में किराए के मकान में चल रहे फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा किया था। गैंग के सरगना बॉथम ने कॉल सेंटर पर काम करने लिए लड़के-लड़कियों को 10 से 20 हजार की सैलरी पर रखा था। मुंबई से सागवाडा आकर एक स्थानीय निवासी को अपने साथ मिलाया। उसने एक किराए का मकान दिलवाया। एक कमरे से फर्जी कॉल सेंटर पर काम शुरू किया। अमेरिकी लोगों का डेटा चोरी कर ठगी की।

स्क्रीन शेयरिंग एप डाउनलोड करवाते
सीआई सुरेंद्र सोलंकी ने बताया कि मास्टर माइंड ने एक कमरे में कॉल सेंटर का पूरा सेटअप लगा रखा था। एंड्रॉयड मोबाइल फोन, लैपटॉप, कप्पा की इंटरनेट लाइन और कई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगा रखे थे। इंटरनेट कॉलिंग करके अमेरिका के लोगों से बात करते। अमेजॉन कंपनी से माल डिलीवरी की बात करते। कस्टमर माल ऑर्डर नहीं करने की बात कहता। ऑर्डर को कैंसिल करने के लिए एनी डेक्स एप ( स्क्रीन शेयरिंग एप) डाउनलोड करने को कहते। एप डाउनलोड करने पर 9 डिजिट का कोड आता। गिरोह के सदस्य बातों में उलझा कर कोड पूछकर बॉथम को देते।

फर्जी कॉल सेंटर से पकड़ी गई मुंबई की 3 लड़कियां।
फर्जी कॉल सेंटर से पकड़ी गई मुंबई की 3 लड़कियां।

मुंबई के रहने वाले हैं गिरोह के सदस्य
मास्टर माइंड बॉथम के साथ ही पकड़े गए गिरोह के सदस्यों में 6 लड़के-लड़कियां मुंबई के रहने वाले हैं। पुलिस ने केरिना किनी (19), जारा (19), कुणाल (24), लक्ष्मण सिंह नेगी (25), कल्पेश नायक (28), रूथ फेलीक्स डिमेलो (19), रितेश सुनकारे (21) निवासी मुंबई और सागवाड़ा के रहने वाले रोशन कलाल (24) को गिरफ्तार किया है। एक नाबालिग भी पकड़ा गया है। सभी आपस में एक-दूसरे को जानते हैं। कोरोनाकाल में बेरोजगार हो गए थे। आर्थिक तंगी के कारण परेशान थे। इस दौरान बॉथम से जान-पहचान हुई। वह सागवाड़ा लेकर आ गया। किराए के कमरे में कॉल सेंटर शुरू किया।

18 हजार रुपए सैलरी में रखा
19 साल की केरिना किनी पुत्री जोसफ बसिलसिले सांताक्रूज मुंबई की रहने वाली है। केरिना ने 12वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। पिता जोसफ की बीमारी पर हर महीने 6 से 7 हजार रुपए का खर्चा आता। बड़ा भाई जेवेश (25) 12वीं तक पढ़ा है, लेकिन कोई काम नहीं करता है। केरिना ने शांताक्रूज ईस्ट में सहारा क्रेडिट सॉल्युशन कंपनी में 8 हजार रुपए सैलरी में टेली कॉलर का काम किया। काम के बाद भी पूरी सैलरी नहीं मिलने पर काम छोड़ दिया। दिवाली पर बॉथम ने फोन कर कॉल सेंटर पर काम के लिए 18 हजार रुपए महीना देने की बात कही। पैसों की जरूरत होने से 18 अक्टूबर को सागवाडा आ गई।

बॉथम ने दी ट्रेनिंग
पकड़े गए 17 साल के नाबालिग के पिता की मुंबई के सांताक्रूज इलाके में चूड़ियों की दुकान है। 3 भाई-बहन है। बड़ी बहन की कनाडा में शादी हुई है। 2020 में 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। स्कूल में केरिसा ने नौकरी के लिए बॉथम से मिलवाया। 15 अक्टूबर को बॉथम ने फोन पर बात की। डिजिटल काम के लिए 12 से 15 हजार रुपए सैलरी देने की बात की। नौकरी फाइनल होने के बाद 17 अक्टूबर को बोरीवली बस स्टैंड से कल्पेश, लक्ष्मण उर्फ नेगी के साथ सागवाडा के लिए रवाना हुआ। 18 अक्टूबर को सागवाडा आकर एक होटल में रुके। केरिसा पहले से आ गई थी। 2 दिन बाद होटल से फ्लैट में शिफ्ट हुए। फ्लैट में केरिसा, रूत, ऋषभ, कल्पेश, लक्ष्मण उर्फ नेगी ओर शुभम सभी रुके। बॉथम 5-6 लैपटॉप लाया और सभी को ट्रेनिंग दी।

गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड दोनों फंसे
19 साल की जारा का घर नाला सुपारा वेस्ट मुंबई में है। उसके पिता इस्माइल रेलवे में काम करते थे। मगर नौकरी छूट गई। 12वीं तक पढ़ाई के बाद दोस्त कुणाल के साथ लिव इन रिलेशनशिप में रहती थी। कुणाल के दोस्त रितेश ने राजस्थान में कॉल सेंटर के लिए जॉब की बात की। रितेश ने बॉथम से बात कर दोनों को 12 हजार रुपए सैलरी में कॉल सेंटर में नौकरी लगवा दी। 28 अक्टूबर को दोनों सागवाडा आए और काम शुरू किया।

गर्लफ्रेंड ने दिलवाया काम
कुणाल माही (24) मोरी रोड माहिम वेस्ट मुम्बई का रहने वाला है। पिता विनोद की पिछले साल कोरोना में मौत हो गई। मां कमला की बीमारी के कारण मौत हो गई है। एक बड़ा भाई नानी के साथ रहता है। 10वीं के बाद पढ़ाई छोड़ दी। जारा शेख के साथ लिव इन में रहता था। जारा को रितेश ने फोन कर बॉथम से कॉल सेंटर पर काम दिलाया। 29 अक्टूबर को 12 हजार रुपए तनख्वाह पर सागवाडा में कॉल सेंटर पर काम करने आए, उसके साथ प्रेमिका जारा भी थी।

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