पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

गंभीर मामला:500 से ज्यादा डोज फ्रीज में माइनस तापमान में रहने से खराब, 11 दिन मामला दबाए रखा

डूंगरपुर8 दिन पहलेलेखक: विश्वजीत गाेले
  • कॉपी लिंक
बीसीएमओ द्वारा रघुनाथपुरा पीएचसी एमओ को जारी किया नोटिस। - Dainik Bhaskar
बीसीएमओ द्वारा रघुनाथपुरा पीएचसी एमओ को जारी किया नोटिस।
  • रघुनाथपुरा पीएचसी का मामला, प्रभारी डॉक्टर ने कहा- एक भी कोरोना डोज खराब नहीं हुई, बीसीएमओ बोले- डोज खराब हुई, इसलिए नोटिस देकर जवाब मांगा है

कोरोना संक्रमण से लड़ने के लिए वैक्सीन की एक-एक डोज कीमती लेकिन चिकित्सा विभाग के कर्मचारी अपनी लापरवाहियों से बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसी ही लापरवाही का एक गंभीर मामला रघुनाथपुरा पीएचसी पर सामने आया है। य

हां मेडिकल ऑफिसर की लापरवाही से 45 प्लस कोटे की कोवीशील्ड वैक्सीन की 50 से अधिक बाउल यानी 500 से अधिक डोज खराब हो गए। सीएमएचओ व विभागीय अधिकारियों को जब इसका पता चला तो उन्होंने कार्रवाई करने की बजाय मामले को दबाने का प्रयास किया। यहां तक कि जिला प्रशासन को भी इसकी अभी तक भनक नहीं लगने दी।

25 मई से पहले पीएचसी का कोल्डचेन के आईएलआर फ्रीज का तापमान माइनस में चला जाने से उसके अंदर रखी वैक्सीन डोज जमकर खराब हो गई। 26 मई को जब जिला मुख्यालय से मैकेनिक उसे सुधारने गया तो वैक्सीन डैमेज होने का खुलासा हुआ। घटना के 11 दिन बाद भी कोई अधिकारी पीएचसी पर मामले की जांच करने नहीं पहुंचा है। यही नहीं इतनी गंभीर चूक की सूचना चिकित्सा विभाग ने प्रशासन काे भी नहीं दी अाैर पूरे मामले पर गुपचुप पर्दा डालने की काेशिश कर रहे हैं।

भास्कर के पास दो सबूत हैं कि वैक्सीन खराब हुई हैं

बीसीएमओ ने जारी किया नोटिस

4121 जेड 034 बैच नंबर की वैक्सीन खराब, 15 दिन पहले ही बनाई थी नई कोल्ड चेन रघुनाथपुरा पीएचसी पर कोल्डचेन करीब 15 दिन पूर्व ही बनाई है। वैक्सीन वाइल को रखने के लिए आईएलआर फ्रीज दिया था। इससे पहले पीएचसी को फलोज सीएचसी से प्रतिदिन की खपत के अनुसार आइस बॉक्स में वैक्सीन उपलब्ध मिलती थी। वैक्सीनेशन के बाद शाम को शेष वाइल फलोज सीएचसी में ही जमा करानी होती थी।

जब तक वैक्सीन की देखरेख फलोज सीएचसी पर रही, कोई वैक्सीन खराब नहीं हुई। कोल्डचेन बनाने के बाद रघुनाथपुरा पीएचसी को 4121जेड034 बैच नंबर की करीब 60 वैक्सीन दी थी। इनमें से 45 प्लस उम्र के लोगों को एक दिन वैक्सीन लगाई थी, शेष करीब 50 को आईएलआर फ्रीज में रखा था। इधर, जानकारी में आया कि बीसीएमओ ने इसकी जानकारी 29 मई को ही सीएमएचओ को दे दी थी। लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। 9 दिन बाद भी बड़े पैमाने पर डोज खराब होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से कई सवाल खड़े होते हैं।

आईएलआर फ्रीज का तापमान माइनस में जा रहा था, आइस बॉक्स में शिफ्ट कर डैमेज होने से बचानी थी वैक्सीन

गाइडलाइन के कोवीशील्ड वैक्सीन को आईएलआर फ्रीज में प्लस 2 से प्लस 8 के बीच तापमान पर रखा जाता है। अगर तापमान इससे कम या ज्यादा होता है तो वाइल के अंदर का वैक्सीन लिक्विड डैमेज हो जाता है। इस घटना में भी ऐसा ही हुआ है। पीएचसी पर कोल्डचेन हैंडलर न होने से आईएलआर फ्रीज का तापमान चैक करने की जिम्मेदारी मेडिकल ऑफिसर डॉ. रामचंद शर्मा की थी। डॉ. रामचंद शर्मा ने फ्रीज के गिरते तापमान को नजरअंदाज कर दिया। जबकि ऐसी परिस्थिति में उनको वैक्सीन को निकालकर आइस बॉक्स में शिफ्ट करना था। इससे बाउल को सुरक्षित रखने के लिए निर्धारित तापमान बना रहता और यह खराब नहीं होती।

जांच करने पहुंचे तो नहीं दी फ्रीज की चाबी
26 मई को घटना के खुलासे के बाद बीसीएमओ डॉ. अमोल परमार शाम को रघुनाथपुरा पीएचसी पहुंचे थे। लेकिन डॉ. रामचंद शर्मा ने उनको फ्रीज की चाबी किसी कर्मचारी के पास होने का बहाना कर वैक्सीन की डैमेज नहीं दिखाई। बीसीएमओ ने अगले दिन 27 मई को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।

वैक्सीन खराब नहीं हुई, काेई नोटिस नहीं मिला

डॉ. रामचंद शर्मा ने बताया कि मुझे कोई नोटिस नहीं मिला है और कोई वैक्सीन खराब नहीं हुई है। यदि आपके पास कोई नोटिस है तो मुझे भेजो। जब नोटिस की काॅपी उनके व्हाट्सएप पर भेजी ताे इसके बाद से कॉल रिसीव करना ही बंद कर दिया।

वैक्सीन खराब नहीं हुई, काेई नोटिस नहीं मिला

मैंने नोटिस जारी कर जवाब मांगा था। व्हाट्सएप पर सिर्फ इतना जवाब भेजा कि फ्रीज का तापमान माइनस में चला गया और वैक्सीन खराब हो गई। सीएमएचओ को बताया है।
- डॉ. अमोल परमार, बीसीएमओ, ब्लॉक डूंगरपुर

खबरें और भी हैं...