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मनमानी:रेलवे का 2021 में ट्रेन चलाने का दावा, काम की गति इतनी धीमी कि दो साल तक पटरी पर आना मुश्किल

डूंगरपुरएक महीने पहले
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  • डूंगरपुर से हिम्मतनगर ट्रैक का 90 %काम पूरा हो चुका है, ऐसे में अगर ट्रेन चल जाती है तो वागड़ के यात्रियों को होगा फायदा

उदयपुर-हिम्मतनगर आमान परिवर्तन का काम 2021 दिसम्बर तक पूर्ण होकर ट्रेन संचालन का दावा किया जा रहा है लेकिन हकीकत मंे कोरोना संकटकाल के चलते काम की गति इतनी धीमी हो चुकी है कि दिसम्बर 2022 से पहले ट्रेन चलने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण उदयपुर खंड में खारवा चांदा टनल है।

टनल 840 मीटर लंबी है तथा टनल की खुदाई तो पूरी हो चुकी है लेकिन अभी इसकी पैकिंग होने के साथ ही फिनिशिंग और रेल लाइन बिछना बाकी है। इसके अलावा डूंगरपुर से उदयपुर के बीच रेल लाइन का काम भी काफी बाकी है। इस काम को पूरा होने में ही कम से कम दो साल का समय लग जाएगा।

रेल इंजीनियर्स के अनुसार यह टनल इस परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी है। तीन-चार पुल छोड़ इस परियोजना के अधिकांश पुलों का काम हो चुका है। खारवा चांदा-जावर के मध्य इस टनल में ब्रॉडगेज बैलास्टलेस ट्रैक का निर्माण किया जाएगा। यह विशेष तकनीक से होने वाला निर्माण है जिसमें पटरियों व स्लीपर के नीचे गिट्टी-रोड़ी नहीं बिछाई जाती वरन कंक्रीट स्लैब होते हैं जिन्हें हाईस्पीड या भारी ट्रेन संचालन के लिए उपयुक्त माना जाता है व इसका रखरखाव भी आसान होता है।

इसी तकनीक से दौसा-गंगापुरसिटी नई रेललाइन परियोजना के डीडवाना-लालसोट रेलखण्ड के बीच भी एक टनल का निर्माण होगा। दोनों टनल की कुल लम्बाई 3.10 किमी है। दोनों टनल में बनने वाले बैलास्टलेस ट्रैक पर करीब 12 करोड़ रुपए लागत आई है। इस लिहाज से खारवाचांदा टनल में बैलास्टिलेस ट्रैक निर्माण में करीब दो करोड़ की लागत की संभावना है। क्योंकि टनल की लंबाई 840 मीटर है। अभी बैलास्टेलेस ट्रैक का निर्माण शुरू नहीं किया गया है, निर्माण जल्द शुरू किया जाएगा।

ट्रैक निर्माण के साथ ही रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस ट्रैक को तैयार होने में करीब एक साल का समय लग सकता है। इसके बाद उदयपुर से डूंगरपुर के बीच अनेक पुलों का निर्माण भी अधूरा पड़ा है। इनको पूरा करने के साथ ही ट्रैक की पैकिंग, अलाइनमेंट, फिनिशिंग, सिग्नल केबलिंग, रेलवे स्टेशन भवनों की रंगाई पुताई सहित अन्य काम भी पूरे करने हैं। रेल इंजीनियर्स का मानना है कि अभी दो साल का समय और लगेगा।

जनप्रतिनिधि प्रयास करें तो ट्रेन चल सकती है
गत 28 अगस्त को उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक आनंद प्रकाश ने उदयपुर-डूंगरपुर रेलखंड का दौरा किया था। उस समय उन्होंने कहा कि कोरोना के कारण परियोजना के कार्य की गति पर भी असर पड़ा है, लेकिन अगले साल 2021 की दीपावली तक सुरंग व अन्य शेष कार्य हो जाएगा और रेलवे इस मार्ग पर गाड़ी दौड़ा सकने की स्थिति में होगा। जनप्रतिनिधि और व्यापारी वर्ग कोशिश करे तो डूंगरपुर से हिम्मतनगर और अहमदाबाद तक ट्रेन शुरू हो सकती है।

डूंगरपुर से हिम्मतनगर के बीच सभी स्टेशन भवन बन चुके, रंगाई -पुताई भी हो चुकी

>डूंगरपुर से हिम्मतनगर के बीच रेल लाइन, भवनों व पुलों का निर्माण पूर्ण हो चुका है। अधिकारी चाहें तो इस खंड पर अब रेल लाइन का संचालन शुरू कर सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। जबकि पहले रेल अधिकारियों का कहना था कि उदयपुर से हिम्मतनगर रेल खंड पर दो हिस्सों मे ट्रेन चलाई जाएगी।

उदयपुर से डूंगरपुर और डूंगरपुर से हिम्मतनगर दो हिस्से बनाए गए थे। इसमें डूंगरपुर से हिम्मतनगर रेल खंड पर इसी वर्ष ट्रेन चलनी थी। ट्रेन चलाने के लिए अधिकारियों ने इस खंड पर रेल लाइन बिछाने के बाद उसकी पैकिंग, अलाइनमेंट क्लियर करने के बाद गत दिनों इसकी फिनिशिंग भी पूरी कर दी। डूंगरपुर से हिम्मतनगर के बीच सभी स्टेशन भवन पूर्ण हो चुके है तथा रंगाई पुताई भी करीब करीब पूरी हो चुकी है।

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