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हर सड़क दुर्घटना का आईआईटी मद्रास करेगी एनालिसिस:अब तक 211 घटनाओं की रिपोर्ट भेजी, आईआईटी के सुझाव पर जिले में दुर्घटना स्थल

डूंगरपुर15 दिन पहलेलेखक: सिद्धार्थ शाह
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  • सड़क डिजाइन और अन्य खामियों को दूर करेंगे

एकीकृत इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट (आईरेड) एप के जरिये अब पुलिस काे पता चलेगा कि सड़क दुर्घटना क्याें हाे रही हैं। जिले में कितने ब्लैक स्पाॅट है, जहां आए दिन सड़क दुर्घटना हाे रही हैं। एप के जरिए पूरा डाटाबेस तैयार हाेकर पुलिस के साथ आईआईटी मद्रास के पास पहुंचेगा। सड़क दुर्घटना वाली जगह का विश्लेषण किया जाएगा आईआईटी मद्रास से सुझाव आने के बाद पीडब्ल्यूडी-परिवहन विभाग के एक्सपर्ट दुर्घटना के स्थल का दौरा करेंगे, सड़क का डिज़ाइन और दूसरी खामियों को दूर करने का काम किया जाएगा।

इन दिनाें डूंगरपुर पुलिस की तरफ से इस एप पर लाइव एंट्री की जा रही हैं। यही सारी सूचना एप के जरिये मद्रास पहुंच रही हैं। इसके बाद ब्लेक स्पाॅट चिन्हित करने का काम शुरू हाेगा। दरअसल, परियोजना सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय भारत सरकार की एक पहल है। परियोजना का मुख्य उद्देश्य देश के हर हिस्से से दुर्घटना डेटाबेस को समृद्ध करने के लिए एकीकृत सड़क दुर्घटना डेटाबेस (आइ-रेड) का विकास करना है। सड़क दुर्घटना डेटा का विश्लेषण करके विभिन्न प्रकार की नीतिया बनायीं जाएगी।

इस एप में वन प्लेटफार्म, मल्टीपल डिपार्टमेंट का ध्यान रखा है, जिससे यह सभी विभाग एक दूसरे से इसी एप के माध्यम से जुड़े रहेंगे और कहीं भी सड़क दुर्घटना होने पर जल्दी एक्शन ले पाएंगे। इसमें हादसे के स्पाॅट का बारीकी से अध्ययन किया जाएगा। पुलिस मोबाइल एप पर दुर्घटना स्थल से व्यक्ति का नाम, उम्र, पता, वाहन नंबर, लाइसेंस संख्या, स्थान, दुर्घटना का सम्भावित कारण, फोटो, वीडियो आदि अपलोड करेगी।

राजस्थान में प्रथम चरण में जयपुर, जोधपुर, अजमेर, अलवर जिलों मे पायलट प्रोजेक्ट से शुरु हो कर 15 मार्च से सम्पूर्ण राजस्थान में इसकी शुरुआत हुई थी। दुर्घटना के बाद रेस्पोंस टाइम और विभिन्न विभागों मे समन्वय से शीघ्रता से कार्य किया जा सकेगा। आईरेड ऐप्लिकेशन के बारे मे पुलिस कर्मियाें काे समय समय पर जानकारी प्रदान की जा रही है।

पुलिस ने दुर्घटना होने पर एप पर लाइव एंट्री का काम शुरू कर दिया है

अाईरेड एक मोबाइल एप्लीकेशन है। इसका प्रयोग पुलिस, हेल्थ, ट्रांसपोर्ट व इंजीनियरिंग विभाग की तरफ से किया जाएगा। इसमें अभी पुलिस विभाग तथा ट्रांसपोर्ट विभाग को इसका प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इसमें दुर्घटना स्थल पर ऑन द स्पॉट जा कर दुर्घटना की जानकारी भरी जाएगी। इसमें दुर्घटना से संबंधित तथ्य, व्यक्तियों व वाहन आदि के विवरण सहित वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा। इसमें जीपीएस लोकेशन, फोटो, वीडियो, ऑडियो रिकॉर्ड जैसे ऑप्शन के बारे मे विस्तृत जानकारी होगी।

इससे उसके कारण तथा जिले में ब्लैक स्पॉट निर्धारित किए जा सकेंगे। उच्च स्तर पर सडक दुर्घटनाओं में कमी लाने नीति निर्धारण किया जा सकेगा। दुर्घटना की गंभीरता, वाहनों की संख्या एवं घायलो की संख्या दर्ज की जाएगी। भविष्य में इस एप को स्वास्थ्य विभाग से जोड़ा जाएगा। इसमे पुलिसकर्मी द्वारा दुर्घटना को एप में दर्ज करने के बाद निकटतम रोड एक्सीडेंट हॉस्पिटल को अलर्ट मैसेज चला जाएगा। और उसके अनुसार हॉस्पिटल में व्यवस्था की जाएगी और घायलों को जल्द से जल्द इलाज मिल सकें।

इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा में सुधार करना है। एप पर दुर्घटना के फोटो और वीडियो भी भेजने होंगे। सड़क हादसों में कमी लाने के लिए एकीकृत इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट (आईरेड) एप के माध्यम से एकीकृत डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। इस सिस्टम से हादसे में घायल होने वाले मरीजों को भी जल्द इलाज मिलने का रास्ता खुलेगा। ऐसे में उनकी जान बचने की संभावना भी कई गुणा तक बढ़ जाएगी।

हमारे लिए इसलिए जरूरी, क्योंकि पिछले 7 साल में 1400 से अधिक लाेगाें की हादसों में मौत हो गई

दरअसल, यह एप डूंगरपुर जिले के लिए काफी उपयाेगी साबित हाे सकता है। यहां पर सड़क हादसाें के मामले काफी अधिक है। हर दूसरे दिन एक व्यक्ति की माैत हाे जाती है। पिछले 7 साल में 1400 से अधिक लाेगाें ने सड़क दुर्घटना के दाैरान माैत हाे गई। बड़ी संख़्या में लाेग घायल हाे गए। एप के जरिये डाटाबेस तैयार हाेने पर डूंगरपुर पुलिस व प्रशासन इस दिशा पर काम कर पाएगा ताकि सड़क हादसाें में कमी लाई जा सकें।

नये सिरे से ब्लेक स्पाॅट चिन्हित करने का काम हाेगा। नेशनल हाईवे 8 पर हाेने वाली सड़क दुर्घटना काे काफी हद तक राेका जा सकेगा। जिले की सड़कों की बनावट भी ऐसी है कि यहां पर एक तय गति सीमा से अधिक पर वाहन चलाने पर हादसे होते है। यहां की सड़कों का निर्माण अकाल राहत कार्य के दौरान हुआ है जिसमें मापदंड की पालना नहीं की गई थी।

इस एप से एकत्रित आंकड़ाें का अध्ययन आईआईटी मद्रास द्वारा किया जाएगा। इससे सड़क दुर्घटनाएं रोकने के उपाय किए जा सकेंगे। भविष्य में होने वाली दुर्घटनाओं में कमी लाने में आसानी होगी। इस एप के जरिये सड़क हादसाें की लाइव एंट्री की जा रही है ताकि हादसाें के वास्तविक कारण सामने आ सकें। अब तक 211 लाइव एंट्री हो चुकी हैं।

-अशाेक कुमार मीना, एएसपी, नोडल अधिकारी, डूंगरपुर

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