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मेहनत के लिए समय तय नहीं हाेता:सरकारी स्कूल में पढ़ा, सेकंड ईयर में ग्रेस से पास हुआ तो ठाना कुछ बनकर दिखाऊंगा

डूंगरपुर2 महीने पहले
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  • कलेक्टर सुरेशकुमार ओला बोले- असफलता में ही छिपी है सफलता की राह

(तनुज शर्मा)
आज नया साल है। बीते साल ने बहुत कटु अनुभव दिए। पर, इसी काेराेनाकाल में कइयाें ने सफलता की इबारतें भी लिखी। समय कभी नहीं रुकता। सकारात्मक साेच और आगे बढ़ने का जिद भरा हाैसला ताे अवराेधाें के पहाड़ बाैने हाे जाते हैं। आज नए साल में यह खबर हमारे जिले के कलेक्टर सुरेशकुमार ओला ने ही भास्कर के पाठकाें के लिए लिखी है। यह खबर युवाओं के लिए ऊर्जा है। एक पाठशाला है। यह खबर उन युवाओं के लिए एक सबक है, जाे एक उम्मीद छूटते ही पूरी जिंदगी काे नाउम्मीद बना देते हैं ओर यह खबर बताती है कि असफलता में ही सफलता के रहस्य छिपे हुए हैं।

सीख... आप जब ठान लो तब अपने जीवन को नया मोड़ दे सकते हो

बताैर कलेक्टर डूंगरपुर में पहली नियुक्ति मिली। डूंगरपुर आए करीब दाे माह से अधिक समय हाे गया है। मूलत: जयपुर जिले के छाेटे सी धाणी का रहने वाला हूं। पिता किसान और मां गृहिणी हैं। बड़े भाई भी आईएएस हैं। बचपन में हम दाेनाें भाइयाें ने भी जनजाति क्षेत्र के बच्चाें के समान ही खेत की। सरकारी स्कूलाें में पढ़ाई की और असुविधाओं के बीच जीवन जीया है। आईएएस बनने का सपना स्कूल में तय नहीं था। जयपुर के महाराजा काॅलेज में पढ़ाई की। यहां पर सैकंड ईयर ग्रेस से पास हुआ।

मैंने तभी ठान लिया कि अब लक्ष्य बनाएंगे। यहीं मेरे जीवन का टर्निंग प्वॉइंट था। ये काेई जरूरी नहीं कि आपकाे आईएएस बनना है ताे बचपन से बच्चा हाेशियार हाे। आप जब ठान लाे तब जीवन काे नया माेड़ दे सकते हाे। जीवन में सच्ची सीख खुद से मिलती है। सैकंड ईयर में ग्रेस मिलने के बाद मुझे धक्का लगा। साेचा मैं गरीब किसान का बेटा जीवन किस ओर ले जाऊंगा। यह साेचकर पढ़ाई पर फाेकस किया। इसके बाद थर्ड ईयर में अच्छे प्रतिशत के साथ स्नातक पूरा किया।

फिर एमबीए पूरा किया। वहां से केट की परीक्षा पास की। बैंक और कस्टम में नाैकरी की। आईएएस बनने से पहले कुल पांच नाैकरी की। इसी बीच मेरे बड़े भाई आईएएस बने। उनसे मुझे लक्ष्य मिला कि मैं भी आईएएस बनकर देश सेवा करूं। मैंने आईएएस की परीक्षा में 41वीं रैंक के साथ सपना पूरा किया।

मेहनत के लिए समय तय नहीं हाेता
मैं जनजाति क्षेत्र के युवाओं से कहना चाहता हूं। हम भारतीय बहुत मेहनती हाेते हैं। इसी का उदाहरण ये काेराेनाकाल 2020 है। पूरे देश में काेई भूखा नहीं साेया है। यही मजबूती हर युवा में हाेनी चाहिए। मैंने भी सभी सुविधा से वंचित रहा हूं जाे जनजाति के युवाओं काे नहीं मिलती है। काेई मार्गदर्शन नहीं, काेई गाइडेंस नहीं, काेई काेचिंग नहीं थी। सिर्फ एक ही लक्ष्य हाेना चाहिए की मेहनत कर आगे बढ़े। इसके लिए काेई समय भी नहीं हाेता है। उसी दिन से मेहनत करना शुरू कर दाे।

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