जन संकल्प से हारेगा कोरोना:भाई को साइनस था, इसलिए वह बार-बार मास्क हटाने की काेशिश करता, बहन ने उसे बचाने तीन दिन-तीन रात तक झपकी तक नहीं ली

डूंगरपुर6 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
बहन वीणा जाेशी अपने भाई विनाेद भट्ट के साथ। - Dainik Bhaskar
बहन वीणा जाेशी अपने भाई विनाेद भट्ट के साथ।

काेराेना काल के इस निराशा भरे दौर में जीने की खिलखिलाने वाली कहानियां भी सामने आ रही है। जिले के सागवाड़ा क्षेत्र के दीवड़ा छाेटा गांव के 42 वर्षीय युवक की अप्रैल के पहले सप्ताह में अचानक से तबीयत खराब हाेने लगी। 10 अप्रैल काे सांस फूलने की समस्या हाेने लगी। इस पर परिजन सागवाड़ा लेकर गए। यहां से डूंगरपुर अस्पताल ले जाने के लिए कहा।

डूंगरपुर के काेविड अस्पताल में 9 दिन तक इलाज चला। ऑक्सीजन लेवल डाउन हाेने से 10 सिलेंडर लगे। अब वह स्वस्थ हाेकर घर लाैट गए। इन दिनाें घर पर पर ही परिवार के साथ समय बीता रहे है। काेराेना वायरस के चलते संक्रमित हाेने व काेराेना से लड़ाई जीत कर घर लाैटने की कहानी काे युवक की बहन ने भास्कर के साथ सांझा किया। विनाेद भट्ट की बांसवाड़ा के सुवाला में रहने वाली बहन वीणा ने बताया कि 10 अप्रैल काे विनाेद की सांस फूलने लगी। घर में एक जगह से दूसरे जगह घूम रहा था। यह बात मां ने काॅल पर शाम 6.30 बजे बताई।

इस पर भाई विनाेद से बात की ताे उसने कहा कि तेरे भाई काे बचाना है ताे जल्दी आ जा। इस पर वीणा अपने भाई काे अस्पताल ले जाने के लिए गांव पहुंच गई। इस दिन पेट्राेल पंप की हड़ताल हाेने से पेट्राेल नहीं मिल रहा था। यहां वहां से पेट्राेल अरेंज करके डूंगरपुर अस्पताल पहुंचे।

यहां पर अस्पताल से गाैरांग व नीलेश पाटीदार का अच्छा सहयाेग मिला। ऑक्सीमीटर से जांच करने पर ऑक्सीजन लेवल 65 से 70 तक आ गया था। वीणा कहती है कि मैं अस्पताल में तीन दिन व तीन रात काे भाई की देखरेख के लिए जागी।

एक पल के लिए भी झपकी नहीं ली। भाई काे साइनस हाेने से ऑक्सीजन मास्क हटाने का बार बार प्रयास करता था। इधर ऑक्सीजन लेवन नीचे जाने से मास्क काे कई बार पकड़े रखना पड़ता था। उसके बेड के पास खड़ी रह कर उसे बार बार राेकती रही।

10 ऑक्सीजन सिलेंडर लगे

वीणा जोशी ने बताया कि भाई काेविड अस्पताल में करीब 9 दिन तक भर्ती रहे। इस दाैरान वह वीडियाे काॅल के जरिये भाई की बात परिजनाें से कराती, इससे भाई काे हाैसला मिलता। साेशल मीडिया पर काेराेना काे लेकर आने वाले सकारात्मक मैसेज ही पढ़ने दिए। वह बताती है कि 9 दिन तक अस्पताल रहने के दाैरान यह महसूस किया कि लाेगाें में काेराेना के प्रति डर अधिक है।

इस पर नियंत्रण कर लिया जाए ताे सब कुछ ठीक हाे जाएगा। भाई के ऑक्सीजन की कमी के कारण करीब 10 सिलेंडर लगे। जाे ऑक्सीजन लेवल 65 से 70 तक पहुंच गया था, वह 80 से 85 हाेते हुए नार्मल स्थिति तक पहुंच गया। उन्हें मानसिक तनाव नहीं दिया। काेराेना काे लेकर जाे डर बिठाया जा रहा है, इसे राेकना चाहिए। यह कहती है कि विनाेद भैया के बेड के पास सागवाड़ा क्षेत्र से एक मरीज आया हुआ था।

वह काफी घबराया हुआ था। इस पर मैने ही ऑक्सीमीटर से उसका ऑक्सीजन लेवल चेक किया ताे सही आया। इस पर उसकाे समझाया कि तुझे कुछ नहीं हुआ है, इतना घबरा क्याें रहे हो। इसकाे माेटिवेट किया ताे वह तीन दिन में ठीक हाेकर डिस्चार्ज हाे गया। इस तरह से लोगो को प्रेरित करने व मन से डर को गायब करने की जरूरत है। इसलिए उत्साह बढ़ाना होगा।

खबरें और भी हैं...