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मौताणे की वापस उठी मांग,शव नहीं उठाया:आज दोपहर 41 घंटे बाद 5 लाख पर राजीनामा हुआ,पुलिस ने पोस्टमार्टम करवाया,लेकिन परिजन रुपए मिलने पर ही अंतिम संस्कार करने पर अड़े

डूंगरपुर10 महीने पहले
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मृतक के गांव में मौजूद पुलिस व ग्रामीण। - Dainik Bhaskar
मृतक के गांव में मौजूद पुलिस व ग्रामीण।

बिछीवाड़ा थाना क्षेत्र के शिशोद गांव में आरएसी जवान रमेश लिम्बात के हत्या मामले मौताणे पर विवाद बढ़ता ही जा रहा है। आज दोपहर 5 लाख रुपए मौताणा तय होने के बाद 41 घंटे बाद पोस्टमार्टम करवाया गया। इसके बाद अचानक परिजनों ने शव लेने से मना कर दिया। शव को अस्पताल छोड़कर वापस गांव चले गए। गांव आकर मौताण के रुपए नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़ गए। अनहोनी की आशंका में गांव में पुलिस बल तैनात हैं। सुबह से शाम तक चले घटनाक्रम ने पुलिस की भागा दौड़ करा दी।

गांव में पुलिस बल तैनात
पुलिस रविवार दोपहर ढाई बजे दोनों पक्षों में राजीनामा होने के बाद मृतक के परिजनों को अस्पताल लेकर गए। पोस्टमार्टम करवाकर शव परिजनों को सौंपने लगे तो,मामला फिर बढ़ गया। परिजन शव छोड़कर वापस गांव चले गए। सामने आया है कि परिजन मौताणे की राशि नहीं मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने पर अड़े हुए हैं। वहीं थानाधिकारी रणजीत सिंह का कहना है कि रात होने के कारण अंतिम संस्कार नहीं किया गया।

आज दोपहर हुआ था राजीनामा
17 सितंबर की रात 12 हमलावरों ने आरएसी जवान रमेश लिम्बात को घर में घुसकर मौत के घाट उतार दिया था। मौत के बाद परिजनों के पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दिया। मौताणे और आरोपियों की गिरफ्तार की मांग पर अड़ गए। शनिवार से चला विवाद 41 घंटे बाद रविवार दोपहर ढाई बजे जाकर खत्म हुआ था। दोनों पक्षों के बीच 5 लाख के मौताणे पर सहमति बनी लेकिन विवाद वापस उठ गया। थानाधिकारी ने बताया कि घटना में अंकित अहारी, राहुल गमेती व मयंक अहारी तीन युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई हैं। लैमर एसपी सुधीर जोशी, एएसपी अनिल मीणा और डीएसपी मनोज सामरिया मामले पर लगातार नजर हुए हैं।

मृतक जवान का फाइल फोटो
मृतक जवान का फाइल फोटो

12 हमलावरों ने घर में घुसकर मारा था
पुलिस के अनुसार शिशोद फला अंबाव गांव में 17 सितंबर की रात को 12 हमलावरों ने आरएसी जवान रमेश लिम्बात के परिवार पर हमला कर दिया था। घर में जवान रमेश,उसकी पत्नी शमशु और दो बेटी व दो बेटे मौजूद थे। हमलावरों ने लट्ठ, पत्थर, तलवार से घर में जमकर तोड़फोड़ की और रमेश को पीट-पीटकर गंभीर घायल कर दिया। परिवार के लोगों ने खेत और घर में छुपकर अपनी जान बचाई थी। रमेश ने इलाज के लिए गुजरात अस्पताल ले जाते हुए रास्ते में दम तोड़ दिया था। शव को डूंगरपुर जिला अस्पताल के मुर्दाघर में रखवाया गया। इसके बाद परिजनों ने आरोपियों को गिरफ्तार करने की मांग को लेकर पोस्टमार्टम करवाने से मना कर दिया था।

गाड़ियों में सवार होकर आए हमलावरों ने किया पथराव, तोड़फोड़ कर मकान में घुसे तो परिवार ने खेतों में भाग कर बचाई जान, तलवार व डंडे से किए कई वार

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