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राशल डीलर सस्पेंड:पांच साल से लैम्पस परिसर में ही चल रही थी राशन दुकान, संपर्क पोर्टल पर शिकायत पर हुआ खुलासा

डूंगरपुरएक महीने पहले
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  • बड़ाैदा लैम्पस में मिली अनियमितता
  • लैम्पस परिसर में ही दूसरे व्यक्ति के नाम से चल रही है राशन की दुकान

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में गेहूं की जगह चावल बांटने की शिकायत संपर्क पोर्टल पर मिली। जिस पर कलेक्टर के निर्देश पर रसद विभाग की टीम बड़ाैदा गांव के लैम्पस में पहुंची ताे वहां अनियमितता मिली। पहली जिले में लैम्पस परिसर के अंदर दाे राशन की दुकानों का सामान, रिकॉर्ड और वितरण संबंधित जानकारी मिली। इसके बाद करीब तीन दिन तक रसद विभाग की टीम जांच की।

जिसमें बड़ाैदा गांव के दाे राशन डीलर के लाइसेंस सस्पेंड करके अभी कार्यवाहक के रूप में आसपुर के अलग-अलग राशन डीलर काे जिम्मेदारी दी गई है। वहीं माैके पर मिली रसद सामग्री काे भी जब्त कर विभाग के तहत मिला दिया है। गाैरतलब है की बड़ाैदा गांव में राशन वितरण के लिए दाे लाइसेंस जारी हुए हैं। जिसमें एक लाइसेंस लैम्पस व्यवस्थापक महेश व्यास और दूसरा विजयपाल जैन के नाम से है। इसमें विजयपाल जैन की उम्र करीब 72 साल से अधिक है। ऐसे में राशन वितरण का कार्य बड़ाैदा लैम्पस से वितरण किया जा रहा था।

रसद विभाग की टीम काे संपर्क पोर्टल पर मिली शिकायत के बाद जांच के लिए पहुंची ताे वहां पर प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना में गेहूं की जगह चावल बांटने की शिकायत की मिली। अब विभाग काे दाेनाें गोदाम का माल लैम्पस के अंदर मिला है। जाे नियमानुसार पूर्ण गलत पाया है। इसके अलावा गेहूं, चावल, शक्कर का स्टाॅक मिला है। जिसमें अब इन स्टाॅक की ऑनलाइन वितरण के अाधार पर पाेस मशीन से जांच कराई जा रही है। जिससे शेष बचे स्टाॅक काे वंचित लाभार्थी काे बांटा जा सके।
बिना किसी आदेश से बड़ाैदा द्वितीय का वितरण लैम्पस से करते हुए मिला :

बड़ाैदा गांव में राशन वितरण का काम दाे भागाें में किया जाता है। जिसमें पहले भाग का काम लैम्पस के पास है। इसके लिए रसद विभाग के पास लैम्पस का पंजीकृत है। वहीं दूसरा भाग गांव के अंदर विजयपाल जैन के नाम से हैं। जिसका गोदाम उसके निवास स्थान के पास बनी दुकान काे बताया है। रसद विभाग के प्रवर्तक अधिकारी विपिन जैन और प्रवर्तक निरीक्षक पुष्पेंद्रसिंह चौधरी वहां पर पहुंचे ताे लैम्पस में ही दाेनाें गोदाम का रसद भरा हुआ था। जाे नियमों के आधार पर गलत है।

वहीं विजयपाल जैन की पाेस मशीन भी लैम्पस व्यवस्था महेश व्यास के पास मिली। यही पाेस मशीन का संचालन कर रहा था। ग्रामीणों की सूचना के आधार पर पाेस मशीन के वितरण 2016 से शुरू हाेने के बाद से लैम्पस से दाेनाें वितरण संचालित किए जा रहे थे।
बगैर किसी आदेश के गेहूं की जगह चावल का वितरण :

रसद विभाग की ओर से फिलहाल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत प्रत्येक परिवार काे गेहूं दिया जाता है। जिसमें हर 15 दिन तक वितरण करना है। केंद्र सरकार की पूर्व योजना से खाद्य सुरक्षा योजना के तहत गेहूं दिया जा रहा है। ऐसे में किसी भी लाभार्थी काे दोगुना गेहूं देने का नियम है।

जिसके लिए पाेस मशीन में आधार कार्ड और मोबाइल नंबर डालने पर ओटीपी मिलती है। जिससे रसीद दी जाती है। अब बड़ाैदा गांव के लैम्पस व्यवस्थापक दाेनाें राशन के वितरण में गेहूं की जगह चावल वितरण कर रहा था। जाे पूरे भारत में कही भी चावल की उपलब्धता नहीं की गई है। गेहूं की जगह चावल वितरण करना नियमों के खिलाफ है।

संपर्क पोर्टल की शिकायत पर बड़ाैदा लैम्पस की जांच में दाेनाें वितरण एक जगह मिला है। इसके अलावा गेहूं की जगह चावल का वितरण भी पाया गया है। स्टाॅक वेरिफिकेशन में भी अनियमितता मिली है। विजयपाल जैन और लैम्पस राशन वितरण महेश जैन का लाइसेंस रद्द कर अस्थाई रुप से कार्यभार आसपुर के दाेनाें अलग राशन डीलर काे दिया है।
-हजारीलाल आलाेरिया, जिला रसद अधिकारी

विभागीय अधिकारियों के निरीक्षण पर भी बड़ा सवाल
लैम्पस परिसर में ही गांव के दूसरे क्षेत्र के लिए आवंटित राशन की दुकान संचालित हाेना पाया गया। यह सब जिला स्तर पर की गई शिकायत और कलेक्टर की ओर से कार्रवाई के आदेश में इस गड़बड़ी का खुलासा हुअा। यहां बड़ा सवाल यह है कि एक ही परिसर में पिछले पांच साल से दाे दुकानें चल रही थी। क्या इन पांच सालाें में इस लैम्पस और राशन की दुकान का कभी निरीक्षण नहीं हुआ।

हाल ही कार्रवाई से यह तय है कि सालाें से चल रही इस गड़बड़ी में रसद विभाग की मिलीभगत थी। ऐसा नहीं है ताे यह माना जा सकता है कि इन पांच सालाें में किसी भी अधिकारी इन दुकानों की जांच नहीं की है। जबकि, विभागीय नियम यह कहता है कि विभाग की ओर से साल में एक बार राशन डीलर की दुकान का भौतिक सत्यापन किया जाना चाहिए। अधिकारी कार्मिकों की कमी का हवाला देते हुए अपनी जिम्मेदारी से बच जाते हैं।

4912 किलो गेहूं का नहीं दिया चालान

विभाग की बड़ाैदा लैम्पस के स्टाॅक वेरिफिकेशन 15 जून तक 6888 किलाे गेहूं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना का हाेना बताया है जबकि 17 जून की कुल आवंटन ही 11800 किलाे गेहूं हुआ है। जिसमें 4912 किलाे गेहूं का चालान मांगने पर लैम्पस व्यवस्था उपलब्ध नहीं करा पाया है। पाेस मशीन के ऑनलाइन और ऑफलाइन वेरिफिकेशन में 264.82 क्विंटल गेहूं, 790.79 क्विंटल चावल, 1948 किलाे चना और 247 किलाे शक्कर स्टाॅक में हाेनी चाहिए थी।

जिसकी जांच करने पर 3.86 क्विंटल गेहूं, 724.79 किलाे चावल, 1920 किलाे चना कम मिला हैं। इसके अलावा आंगनबाड़ी के स्टाॅक की पावती रजिस्टर भी नहीं मिला। इससे संबंधित रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं करा पाया हैं। जिसके बाद पूरे प्रकरण काे लिखित में लेकर उच्चाधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत की गई है।

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