बच्चों को धार्मिक शिक्षा से जोड़े:इससे वह संस्कारवान बनेंगे: शांति स्वरूप महाराज

डूंगरपुर11 दिन पहले
  • कॉपी लिंक

आसपुर उपखण्ड क्षेत्र के वसुंधर बड़ी गांव में मां वसुंधरा सेवा समिति के तत्वावधान में वसुंधरा माताजी मंदिर परिसर में चल रही श्रीमद् भागवत भक्ति ज्ञान कथा के पांचवे दिन शुक्रवार को कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कथावाचक ने किया।

शनिवार को श्री कृष्ण रुक्मणी विवाह होगा। रविवार को कृष्ण सुदामा मिलन के साथ ही कथा की पूर्णाहुति होगी। कथा वाचक पंडित शांति स्वरूप महाराज ने व्यास पीठ से कहा कि आज के युग मे इंसान मन्दिर नही जाता और भोजन करना नहीं छोड़ता है, यह बहुत ही गलत है। मनुष्य को जितना भोजन करना जरूरी होता है, उतना ही मन्दिर जाना भी आवश्यक है। माता पिता द्वारा बच्चों को विद्यालय में प्रवेश दिलाकर शिक्षा तो दी जाती है, किन्तु बच्चों को धार्मिक शिक्षा से जोड़ना होगा। पहले बच्चे माता पिता के चरण स्पर्श करते थे। अब तो घुटनों तक ही झुकते है।

यही समय रहा तो जो हाथ चरण स्पर्श करने चाहिए वो माता पिता की गर्दन तक रहेंगे। इसलिए बच्चों को संस्कारवान बनाना अति आवश्यक है। संगीतकार संजय पांडे, अतियेंद्र मिश्रा, रोहित पांडे, मनोज, सोनू व अनिकेतन ने वाद्ययंत्रों के माध्यम से भक्ति गीतों की प्रस्तुति देकर भक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। इससे पूर्व व्यास पीठ का वसुंधरा माताजी के महंत गजानंद गिरी के सानिध्य में पूजन किया। कथा में वसुंधर छोटी, बड़ी, बड़ौदा, चुण्डियावाडा, कतिसौर, अंतिया, माल, अमृतिया, वाडा घोड़िया, टोंक वासा आदि गांवों के भक्तगण मौजूद रहे।

खबरें और भी हैं...