श्रीमद्भागवत का 10वां स्कंध अतिमहत्वपूर्ण:यह स्कंध भक्तों के प्रेरणा स्त्रोत है: नित्यानंदजी

डूंगरपुरएक महीने पहले
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शहर के पत्रकार काॅलाेनी में चल रही श्रीमद् भावगत कथा के छठवें दिन मंगलवार को कथावाचक नित्यानंदजी ने कहा कि भागवत का दसवां स्कंध महत्वपूर्ण है। सृष्टि के समस्त क्रियाकलापों का उसमें वर्णन है। भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से यह स्कंध भरा पड़ा है। श्रीकृष्ण के जन्म से लेकर स्वलोक जाने तक के हर पहलू को व्यापाक रूप से वर्णित किया गया है। यह स्कंध सगुण भक्ति का उत्तम और अत्यंत महान स्कंध है। यह स्कंध भक्तों के प्रेरणा स्त्रोत है। सूरदास और उसके अष्टसखा इसी से प्रभावित हुए थे।

कथावाचक नित्यानंदजी ने बताया कि श्रीकृष्ण और गोपियों के संग रास इसकी विशेष महत्ता है। इसमें गोपीगीत, भ्रमर गीत, वेणुगीत आदि अति महत्वपूर्ण है। श्रीकृष्ण की बृज की प्रेम और बाल लीलाएं मंत्रमुग्ध कर देती है। प्रेम के समक्ष अन्य सब नीरस है। उद्धव और गोपी संवाद से प्रेम की महिमा को सर्वोपरी बनाया है। श्रीकृष्ण को खूब महत्व देते हैं। महिलाओं को स्वयं अपना जीवनसाथी चुनने के समर्थक थे। रुक्मणि हरण इसका उत्तम उदाहरण है। भगवान भाव, भक्ति और प्रेम के वशीभूत होते हैं।

रुक्मणि के प्रेम से प्रभावित होकर उसका हरण भी करते हैं। भगवान घमंडी लोगों के घमंड को चूर करते हैं। शिशुपाल का वध कर उसके अहंकार और घमंड को चकनाचूर किया। नित्यानंदजी ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं को वर्णन किया। उन्होंने रुक्मणि विवाह भी सुनाया। रुक्मणि विवाह की कथा सुनने के लिए अनेक भक्त पीले वस्त्र धारण करके आए थे। विवाह जैसा माहौल, शादी विवाह के गीत आदि गाए गए। रास भी किया गया और गरवा नृत्य आदि किया गया।

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