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जन संकल्प से हारेगा कोरोना:मेरे दाेस्त ऑक्सीजन से कम नहीं थे, वे हौंसला देते रहे, मेरी सांसें चलती रही

गामड़ी अहाड़ा/डूंगरपुर4 दिन पहलेलेखक: सुबोधकांत नायक
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भर्ती रहने के दौरान वीडियो कॉल से दोस्त से बात करते हुए। - Dainik Bhaskar
भर्ती रहने के दौरान वीडियो कॉल से दोस्त से बात करते हुए।

एक बार ताे मुझे लगा कि मेरा बचना मुश्किल है। उम्मीदें भी टूटी। पर, यकीन मानिए, मुझे बचाने में मेरे जितना योगदान डॉक्टरों का था, उतना ही मेरे दाेस्ताें का रहा। दोस्त ठान ले तो कोविड से निराश हो रहे मरीज को एक नई आशा की किरण मिल सकती है। ऐसा ही एक अनुभव दामड़ी गांव निवासी एक युवक ने भास्कर के साथ साझा किया है।

दरअसल, कोरोना के चलते भयंकर फेफड़ों में संक्रमण से ग्रसित जिले के दामड़ी गांव निवासी मयंक जोशी पिछले 17 मार्च से अस्पताल में एडमिट थे। यह पहले शहर के निजी अस्पताल में एडमिट हुए। सात दिन अस्पताल में रहने के बाद भी सुधार होने की जगह मयंक का ऑक्सीजन लेवल और लंग्स इन्फेक्शन बढ़ता गया तो डॉक्टर ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद इसे कोविड अस्पताल में शिफ्ट किया गया। तब तक सीटी स्केन में स्कोर बढ़ कर 17.5% तक बढ़ गया।

यह कोविड के दौर में फेफड़ों के लिए गंभीर अवस्था कहलाती है, लेकिन इस विपरीत दौर में मयंक के मित्र लगातार इसका हाैसला बढ़ाते रहे। यह वीडियो, ऑडियो कॉल और हास्यप्रद मैसेज वीडियो भेज करके उसका मन बहलाते रहे। परिजन के साथ एक न एक दाेस्त हमेशा साथ रहा। परिणाम यह रहा कि अब कोविड अस्पताल में तकरीबन 10 दिन भर्ती रहने के बाद मंगलवार को मयंक जोशी को ऑक्सीजन लेवल 99 आने पर डिस्चार्ज कर दिया और घर लौट गए। मयंक अभी भी होम आइसोलेट रहेंगे।

30 अप्रैल को शादी थी, कार्ड बंट चुके थे, निरस्त की

मयंक की 30 अप्रैल को शादी थी और उसके निमंत्रण भी बंट चुके थे। इसी बीच कोविड के संक्रमण ने चपेट में ले लिया। इसके बाद ऐन वक्त पर शादी रद्द करनी पड़ गई। वहीं जीवन बचाने के लिए जूझना पड़ा, लेकिन मयंक इस भयंकर दौर से निकलने में कामयाब रहे। वे बताते हैं कि शादी निरस्त करने पर पहले तो सबको बूरा लग रहा था, लेकिन जोखिम को देखकर जो निर्णय लिया वो सही था। अब सब कुछ ठीक होने के बाद शादी करेंगे।

वार्ड में रोज कोई न कोई मरीज दम तोड़ रहा था

कोविड वार्ड में एडमिट मयंक जोशी ने भास्कर को बताया कि 10 दिन भर्ती रहने के दौरान कई लोगों को अपनी आंखों के सामने मरते देखा। एक दिन तो ऐसा हुआ जब एक तरफ एक मित्र का कॉल आया हुआ था उसी समय दोनों पड़ौस के बेड से मरीज ने दम तोड़ दिया। दूसरी ओर दोस्त से बातचीत शुरू रखी और खुद को हिम्मत दी। बहुत डरावना मंजर था।

कई बार ऐसा भी हुआ जब नींद में सोते वक्त अन्य मरीजों के परिजन के रोने की आवाज आती तो पता चलता था कि भर्ती मरीज की मौत हो गई है। मयंक ने बताया कि कोविड के दौर में इस बीमारी के लक्षण सामने आने के बाद भी लोग इसे हल्के में ले रहे हैं। जबकि जरूरी है बीमारी से जुड़े लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क कर इलाज शुरू करें।

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