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भ्रष्टाचार का मामला:41 लाख के वैक्सीन भवन में 12 खामियां फिर भी किया भुगतान, हैंडओवर का विवाद

बांसवाड़ा11 दिन पहले
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बांसवाड़ा, सीएमएचओ कार्यालय के पास बना वैक्सीन भवन। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा, सीएमएचओ कार्यालय के पास बना वैक्सीन भवन।

कोरोना महामारी में सबसे बड़ा हथियार वैक्सीन है, लेकिन जिले में इस जीवन रक्षक बेशकीमती वैक्सीन को रखने के लिए सुरक्षित जगह तक नहीं है। क्योंकि 41 लाख की लागत से 2 हजार वर्ग फीट क्षेत्र में बनाया गया वैक्सीन स्टाेर बनने के बाद से एक बार भी इस्तेमाल तक नहीं हाे पाया है। लाखाें सरकारी रुपए खर्च करने के बाद भी 3 साल बाद भी सेंटर नाकारा पड़ा है।

इसका असर ये पड़ रहा है कि काेराेना वैक्सीनेशन का भंडार खस्ताहाल भवन में करना पड़ रहा है। इससे न वैक्सीन के सुरक्षित रखरखाव में दिक्कतें आ रही है। फिलहाल एमजी अस्पताल परिसर में एक छोटे से भवन में वैक्सीन रखी जा रही है। जहां से अस्पतालाें में लाने ले जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। भवन पुराना होने से वैक्सीन बिगड़ने की भी आशंका रहती है।

मुख्यालय पर कोल्ड चैन स्टोरेज की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। इससे सभी सामुदायिक केंद्रों प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के साथ चिन्हित उपकेंद्रों पर पूरी सावधानी के साथ टीको को पहुंचाया जा सके। काेल्ड चैन स्टाेर हाेने से काेराेना वैक्सीन के भंडार काे लेकर भी विभाग काे काफी राहत मिलती।

बिना नक्शे के मनमर्जी से बनवा दिया भवन
सरकार और चिकित्सा विभाग ने स्टोरेज के लिए 41 लाख रुपए बिल्डिंग निर्माण के लिए स्वीकृत किए थे, लेकिन विभाग के एनआरएचएम की सिविल विंग ने बिना नक्शे के मनमर्जी से बिल्डिंग बनवा दी और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए सीएमएचओ को हेंडओवर किए बिना ही पूरा भुगतान कर दिया। अब यह भवन खंडहर बन गया है और असामाजिक तत्वों का अड्डा बन चुका है।

इस पूरे कार्य में एनआरएचएम द्वारा जो अनियमितता बरती गई है उसमें साफ तौर पर ठेकेदार और विभाग की मिलीभगत से भ्रष्टाचार उजागर हुआ है। हैंडओवर से पहले चिकित्सा विभाग द्वारा जांच की गई तो एक या दो नहीं बल्कि भवन निर्माण में एक, दाे नहीं बल्कि पूरी 12 खामियां सामने आई है। इसी कारण सीएमएचओ ने भवन का टेक ओवर नहीं लिया गया। अब सीएमएचओ कई बार सुधार कर भवन हैंडओवर करने के लिए लिखित में पत्राचार कर चुके हैं, लेकिन भुगतान हो जाने के कारण ठेकेदार खुद ही सुध नहीं ले रहा।

2 हजार वर्गफीट में बना भवन
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय के पास ही करीब 2 हजार वर्गफीट में यह भवन बना है। आरसीएचओ डॉ. नरेंद्र कोहली ने बताया कि डेढ़ साल पहले भी सीएमएचओ की ओर से गठित टीम ने भवन की जांच कर आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए थे, लेकिन ठेकेदार ने उसे अनसुना कर दिया।

मामले में बड़ी लापरवाही एनआरएचएम सिविल विंग की सामने आ रही है। क्योंकि जिस दौरान भवन निर्माण किया जा रहा था, उस वक्त अधिकारियों ने इसकी मॉनिटरिंग नहीं की। भवन के मुख्य द्वार पर ताला नहीं किए जाने के कारण अंदर से इलेक्ट्रिकल सामान, एसी और पंखे तक चोरी हो चुके हैं। वहीं भवन के मुख्य दरवाजे से लेकर अन्य सभी दरवाजे भी खराब होकर टूट चुके हैं।

ये 2 जिम्मेदार...
एनआरएचएम सिविल विंग: भवन निर्माण के समय निरीक्षण और काम की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग करनी थी। निर्माण के लिए विशेषज्ञों द्वारा निर्धारित मापदंड का नक्शा दिया जाता है।

ठेकेदार: एनआरएचएम की सिविल विंग द्वारा जारी किए गए निर्धारित नक्शे के अनुसार भवन का निर्माण नहीं किया। घटिया निर्माण सामग्री का उपयोग किया।

इनका कहना है
बिल्डिंग स्टोरेज पॉइंट के मापदंडों के अनुसार नही बनी है। इस कारण हमने इसका टेकन ओवर नहीं किया। ठेकेदार को और एनआरएचएम को भी जो आवश्यक सुधार है वो करने के लिए कहा गया है, लेकिन कुछ काम नहीं किया जा रहा। इस पूरे मामले को लेकर कलेक्टर सहित निदेशालय में भी वीसी और पत्राचार में जरिये समस्या बताई गई है। हमें पुराने भवन में वैक्सीन स्टोर करने में परेशानी आ रही है। -डॉ. एचएल ताबियार, सीएमएचओ, बांसवाड़ा

हमनें जी-शेड्यूल के हिसाब से काम किया है। एनआरएचएम की ओर से इसकी नियमित माॅनिटरिंग भी की गई। एनआरएचएम की सिविल विंग और स्वास्थ्य विभाग के बीच सांमजस्य नहीं हाेने से हैंडओवर हाेने की प्रक्रिया पूरी नहीं हाे पाई है। -राजीव ओझा, ठेकेदार

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