44 डिग्री तापमान में 55 फीसदी प्रतियोगी गायब:4 सेंटर और दो पारी में आने थे 6958 अभ्यर्थी, पुलिस परीक्षा देने आए केवल 3116

बांसवाड़ा3 महीने पहले
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गोविंद गुरु गवर्नमेंट कॉलेज के बाहर सेकंड पारी में प्रवेश करते प्रतियोगी। - Dainik Bhaskar
गोविंद गुरु गवर्नमेंट कॉलेज के बाहर सेकंड पारी में प्रवेश करते प्रतियोगी।

44 डिग्री तापमान में पुलिस परीक्षा देने आने वाले अभ्यर्थियों का उत्साह गर्मी के कारण फीका दिखा। शुक्रवार को हुए एक्जाम में करीब 55 फीसदी अभ्यर्थी परीक्षा से गायब रहे। दो शिफ्टों में यहां पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा हुई। पुलिस प्रशासन की ओर से 4 परीक्षा केंद्र बनाए गए थे, जहां दो शिफ्टों में 6 हजार 958 (3480 और 3478) अभ्यर्थियों की बैठक सुविधा थी। लेकिन परीक्षा देने के लिए केवल 3116 (1552 और 1564) परीक्षार्थी ही पहुंचे, जो आंकड़ा 15 फीसदी से भी कम था। परीक्षा के दौरान किसी तरह की नकल वाली बात सामने नहीं आई। अभी परीक्षाए दो दिन और जारी रहेगी।

इधर, परीक्षा के बाद रोडवेज बस स्टैंड पर भीड़ के बीच व्यवस्थाएं चरमरा गई। भीड़ के आगे रोडवेज की वाहनों की संख्या नाकाफी नजर आई। आलम यह रहा कि भीड़ को सीट बचाने के लिए खिड़कियों से भीतर घुसना पड़ा। गौरतलब है कि पुलिस की पहली पारी वाली परीक्षा सुबह 9 से 11 बजे के बीच हुई, जबकि शाम की परीक्षा 3 से 5 बजे के बीच हुई।

कुशलबाग मैदान में कंट्रोल रूम के सामने ड्रोन से शहर पर नजर रखता पुलिस कर्मचारी।
कुशलबाग मैदान में कंट्रोल रूम के सामने ड्रोन से शहर पर नजर रखता पुलिस कर्मचारी।

अनहोनी से पहले पुलिस सजग
परीक्षा केंद्रों तक पहुंचे अभ्यर्थी उदयपुर संभाग के बाहरी जिलों के थे। हजारों की संख्या में मौजूद युवाओं की ओर से किसी तरह की अप्रिय वारदात करने की आशंकाओं के बीच पुलिस सजग हो गई। पुलिस ने मौका संभाला और ड्रोन से पूरे शहर में नजर शुरू कर दी। देर शाम 5 बजे बाद पुलिस कंट्रोल रूम के बाहर पुलिस ने मोर्चा संभाला और ड्रोन से गली मोहल्लों के अलावा खास तौर पर रोडवेज बस स्टैंड क्षेत्र में नजर बनाए रखी।

शाम के समय रोडवेज बस स्टैंड का नजारा।
शाम के समय रोडवेज बस स्टैंड का नजारा।

रोडवेज बस डिपों पर अनकंट्रोल
शाम को परीक्षा समाप्त होने के बाद परीक्षार्थी सीधे बस स्टैंड पहुंचे। यहां मौजूद लंबी दूरी वाली बसों की अपेक्षा भीड़ ज्यादा थी। आलम ये था कि भीड़ अनियंत्रित थी। सीट लेने के चक्कर में अभ्यर्थी खिड़की के रास्ते भीतर घुसने लगे। स्थिति तब और बिगड़ गई, जब कतार में खड़े युवा कंडक्टर से माथापच्ची करने लगे। बच्चों को नियंत्रित करने के लिए यहां कोई पुलिस जवान भी नहीं थे।

रोडवेज बस में से सवार होते युवा।
रोडवेज बस में से सवार होते युवा।