खेती किसानी:कम बारिश होने से सोयाबीन की 70 प्रतिशत फसल खराब

बांसवाड़ाएक वर्ष पहले
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  • घाटोल, लाेहारिया, कुशलगढ़ में बारिश होने से फसलों को राहत मिली

जिले में देरी से आए मानसून और कम बारिश के कारण सोयाबीन की 70 प्रतिशत फसल खराब हो गई। शहर के बांसवाड़ा उपखंड में अब तक एक एक दिन के अंतराल में पांच और 1 मिलीमीटर ही बारिश हुई है। ऐसे में यहां सोयाबीन की फसल ज्यादा खराब होने से किसान चिंतित हैं। वहीं घाटोल, लाेहारिया, कुशलगढ़ में पिछले तीन चार दिन में अच्छी बारिश होने से फसलों को राहत मिली है। 

किसानाें का कहना है कि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो आने वाले कुछ दिनों में खेतों में बोई गई फसल खराब हो जाएगी। बारिश कम होने के कारण सोयाबीन की फसल में पीलिया रोग भी लग चुका है। प्री मानसून में 94 मिलीमीटर हाेने से किसानाें ने खेतों में मक्का, सोयाबीन और कपास की बुवाई कर दी है। लेकिन उस बुवाई के बाद अब जब आशानुरूप बारिश नहीं हुई तो किसानों को फसल खराब होने की आशंका सताने लगी।

भारतीय किसान संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रणछोड़ पाटीदार का कहना है कि एक या दो दिनों में बारिश नहीं आई तो जिले में सोयाबीन की फसल में 70 प्रतिशत खराब हो सकता है। पाटीदार ने बताया कि अभी तक जर्मीनेशन के दौरान ही सोयाबीन की फसल पानी नहीं बरसने से खराब हो चुकी है। वहीं किसानों ने जहां नुकसान हुआ है वहां पर फिर से खेतों को जोतना प्रारंभ कर दिया है जिसका कारण पहले सोयाबीन की बुवाई करने से उसका अंकुरण ठीक से नहीं होना है।

फसल खराबा हुआ तो बीज उपलब्ध नहीं होंगे

किसान संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रणछोड़ पाटीदार ने कहा कि सच तो ये है कि पानी नहीं बरसा तो 30 से 40 प्रतिशत क्षेत्रों में किसानों को फिर से सोयाबीन की बुवाई करनी होगी और खेत को जोतना होगा। इसमें दुगुनी मेहनत होगी और किसानों पर दूसरी बार बीज और खाद लेने से उनकी जेबों पर आर्थिक भार पड़ेगा।

गौरतलब है कि अभी तक जिले के किसानों को पिछले साल खरीफ सीजन में फसल खराबे का पूरा मुआवजा नहीं मिला है और आठ हजार किसान आज भी फसल बीमा क्लेम की राशि पाने से वंचित हैं जिनके लिए प्रशासन द्वारा कार्यवाही नहीं की जा रही है। जबकि ये समय ऐसा है कि किसानों को आर्थिक समस्या से उबारने के लिए उन्हें आर्थिक रूप से संबल दिया जाना जरूरी है।
उपनिदेशक ने कहा- देरी से मानसून से किसानों को होगा नुकसान : उप निदेशक कृषि विस्तार विभाग भूरालाल पाटीदार ने कहा कि किसानों की चिंता सही है, क्योंकि पहले प्री मानसून की अच्छी बारिश हुई तो उन्होंने खेतों में बुवाई कर दी और अब मानसून की दस्तक में हो रही देरी खरीफ की फसलों के लिए नुकसान देह साबित हो सकती है।

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