ज्ञान / धन संग्रह करना सबसे बड़ा पाप है, क्योंकि इससे पूरे राष्ट्र का नुकसान होता है : आचार्य

Accumulating wealth is the biggest sin, because it causes loss of entire nation: Acharya
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Accumulating wealth is the biggest sin, because it causes loss of entire nation: Acharya

  • बाहुबली कॉलोनी के सुमतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर मंे पुलकसागरजी ने सुख हासिल करने का तरीका बताया

दैनिक भास्कर

May 27, 2020, 05:00 AM IST

बांसवाड़ा. बाहुबली कॉलोनी में स्थित सुमतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में आचार्य पुलक सागर महाराज ने प्रवचनों के माध्यम से बताया कि धन का उपयोग करते समय यह मत भूलना कि एक दिन यह सब छूट जाएगा। भगवान महावीर की नजरों में दुनिया में सबसे बड़ा पाप धन को संग्रह करना है। महावीर कहते हैं कि इतना पापी तो हिंसा करने वाला भी नहीं है जितना पापी धन का लोभी व्यक्ति है। चोरी करने वाला, झूठ बोलने वाला, हिंसा करने वाला तो एक व्यक्ति का नुकसान करता है बल्कि धन संग्रह करने वाला तो पूरे राष्ट्र का नुकसान करता है। हर आदमी दुखी है। वह अपने जीवन में हर पल, हर समय सुख की तलाश करता है। बच्चा रो रहा है तो भी वह सुख के लिए कर रहा है।

जवान आदमी भी भाग दौड़ कर रहा है तो भी वह सुख के लिए ही कर रहा है हर व्यक्ति जीवन में सुख के लिए ही दौड़ भाग करता है, जो आदमी चोरी कर रहा है, हत्या कर रहा है, हिंसा कर रहा है, सभी आखिरी परिणति सुख के लिए ही कर रहा है। आदमी पढ़ता है, मेहनत मजदूरी करता है, बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां लगाता है, वह सोचता है खूब धन कमाएंगे तो सुखी हो जाएंगे। सभी लोग मेरे पास आते हैं बंगला है, गाड़ी है, बच्चे हैं, नौकर चाकर है फिर भी मेरे चरण छूता है।

आचार्यजी ने कहा कि ऐसे लोगों से जब मैं पूछता हूं की आपको कोई दुख तो नहीं तो यह सुनकर उनकी आंखें झुक जाती हैं। आचार्यजीने कहा कि क्या कारण है करोड़पति और अरबपति के चेहरे पर वो आनंद शांति नहीं है जो एक साधु के चेहरे पर रहती है। दुनिया में ऐसा कोई मजहब नहीं होगा जिसमें संत को स्वीकार नहीं किया हो। भारतीय संस्कृति में तो सम्राट भी संतों को पूजता है।

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