टेक्निकल हेल्पर परीक्षा के अभ्यर्थियों ​​​​​​​रास्ते में बस से उतारा:परमिशन लेटर दिखाने के बाद भी रुपए लेने पर अड़ा कंडेक्टर

बांसवाड़ाएक महीने पहले
रोडवेज बस स्टैंड पर प्रवेशपत्र दिखाते हुए अभ्यर्थी। - Dainik Bhaskar
रोडवेज बस स्टैंड पर प्रवेशपत्र दिखाते हुए अभ्यर्थी।

टेक्निकल हेल्पर की परीक्षा देने जा रहे अभ्यर्थियों के साथ रोडवेज बस में धोखा हो गया। रोडवेज के टिकिट काउंटर पर उन्हें प्रवेश पत्र के आधार पर बकायदे सीट नंबर अलोट किया गया, लेकिन बस में यात्रा करने के 7 KM बाद बस कंडेक्टर ने उन्हें नीचे उतार दिया। बोला कि जाना है तो पैसे लगेंगे। सरकार की ओर से फ्री यात्रा का लाभ परीक्षा के एक दिन पहले ही ले सकते हैं। मर्जी मुताबिक प्रवेश पत्र पर यात्रा संभव नहीं। इसके बाद बस रुकवाकर अभ्यर्थियों को नीचे उतार दिया। अभ्यर्थी ऑटो करके वापस बस स्टैंड पर आए और निजी बस में टिकिट लेकर जयपुर यात्रा की।

बस से उतारने के बाद पैदल चलते हुए अभ्यर्थियों ने ली सैल्फी।
बस से उतारने के बाद पैदल चलते हुए अभ्यर्थियों ने ली सैल्फी।

दरअसल, कुशलगढ़ निवासी संतराम सिंह पुत्र प्रकाशचंद्र, सज्जनगढ़ निवासी राकेश पुत्र शांतू, सज्जनगढ़ निवासी महेंद्र कटारा पुत्र मानसिंह रविवार शाम को गांव से रोडवेज से बांसवाड़ा के लिए निकले। यहां रोडवेज ने उनसे बस में किराया नहीं लिया। इसके बाद जयपुर में 24 मई को प्रस्तावित परीक्षा के लिए 22 की शाम को रोडवेज बस काउंटर पर बांसवाड़ा से जयपुर के लिए प्रवेश पत्र दिखाया। वहां बैठे कर्मचारी ने तीन प्रवेशपत्र एक साथ देखकर उन्हें 34, 35 और 36 सीट नंबर अलोट कर दिया। बस से वह तेजपुर तक पहुंचे। तभी कंडेक्टर उनके पास पहुंच गया। परीक्षा 24 और यात्रा 22 मई देखकर उसने अभ्यर्थियों को नीचे उतार दिया। बाेला आगे यात्रा करनी है तो किराया लगेगा। अभ्यर्थी कुछ समझते इससे पहले उन्हें नीचे उतार दिया गया। ऐसी ही समस्या से देर शाम कई बच्चे परेशान रहे।

राजस्थान रोडवेज।
राजस्थान रोडवेज।

खुद के पास टाइम टेबल नहीं
हकीकत में रोडवेज के पास प्रस्तावित परीक्षाओं को लेकर टाइम टेबल नहीं है। इससे काउंटर खिड़की पर भीड़ में कर्मचारी प्रवेश-पत्र नहीं देखता। वह तो उपलब्धता के आधार पर सीट नंबर दे देता है। अगर, काउंटर पर ही परीक्षाओं का टाइम टेबल हो तो कर्मचारी इसी खिड़की पर ही प्रवेशपत्र देने वाले अभ्यर्थी को रोक सकता है। ताकि बीच रास्ते से उन्हें वापस नहीं लौटना पड़े।
इसलिए जा रहे एक दिन पहले
बांसवाड़ा और डूंगरपुर में अधिकांश परीक्षार्थी जनजाति वर्ग से हैं, जो कि जयपुर जैसे शहर में परीक्षा केंद्र को लेकर धाेखा नहीं खाना चाहते। शाम को चलने वाली बस उन्हें सुबह जयपुर पहुंचाती है, जहां जाकर अभ्यर्थी परीक्षा से एक दिन पहले परीक्षा केंद्र को फिजिकली देखकर रात वहीं बस स्टैंड पर गुजार लेता है। अगले दिन समय पर वहां पहुंच जाता है।
नियम ही ऐसे हैं
इधर, रोडवेज के ट्रैफिक मैनेजर मनीष जोशी ने बताया कि परीक्षार्थियों के लिए एक दिन पहले की ही यात्रा तय हैं। वह पहले जाते हैं तो किराए का प्रावधान है। शाम को जाने की बजाय अभ्यर्थी सुबह वाली बस से निकल सकता है। टुकड़ों-टुकड़ों में भी जयपुर तक जा सकता है।