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कोरोना जांच के लिए लग रही लंबी कतार:दोपहरी में घंटों इंतजार के बाद आ रहा नंबर, सोशल डिस्टेंसिंग की भी पालना नहीं; रिपोर्ट मिलने में लग रहे पांच दिन

बांसवाड़ा14 दिन पहले
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महात्मा गांधी राजकीय चिकित्स में जांच के लिए आए लोगों की लंबी कतार। - Dainik Bhaskar
महात्मा गांधी राजकीय चिकित्स में जांच के लिए आए लोगों की लंबी कतार।
  • महात्मा गांधी चिकित्सालय की टेस्ट लैब से कई दिनों बाद मिल रही रिपोर्ट

जिले के एक मात्र कोविड सेंटर की लैब के बाहर कोरोना जांच कराने के लिए सोमवार दोपहर लोगों का तांता लगा रहा। नमूना प्रक्रिया की कछुआ चाल के बीच रोगियों को भरी दोपहरी में घंटों कतार में खड़े रहकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ा।

कतार में लोगों को बीच कई बार आपसी विवाद भी बने रहे। वहीं कतार में सोशल डिस्टेंसिंग जैसे कायदों की बिल्कुल भी पालना नहीं हो पाई। दूसरी ओर क्षमता से अधिक नमूनों के कारण लैब से मरीजों को मिलने वाली रिपोर्ट की पेंडेंसी बढ़ती जा रही है। इससे संक्रमण का खतरा अधिक गहरा गया है। रिपोर्ट में देरी को लेकर व्यवस्था सुधार के कथित प्रयास भी हो रहे हैं। बावजूद इसके संक्रमण की रफ्तार में कमी आती हुई नहीं दिख रही है।

लैब के भीतर लगी मरीजों की कतार।
लैब के भीतर लगी मरीजों की कतार।

यहां पर ऐसी व्यवस्था : जिला मुख्यालय के महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय में कोरोना जांच के लिए एक लैब है। इसके भीतर एक पैथोलॉजिस्ट डॉक्टर एवं अधीनस्थ करीब 12 तकनीशियन काम कर रहे हैं। वर्तमान में यह लैब दो शिफ्टों में चल रही है। लैब की वर्तमान जांच क्षमता करीब 5 सौ लोगों की है, जिसमें डबल ड्यूटी के तहत बीते तीन दिन से एक हजार से अधिक जांचों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। बावजूद इसके अभी सैंपल देने के पांच दिन बाद जांच रिपोर्ट मिल रही है।

वृक्षों की छांव में सुस्ताते मरीज अपनी बारी के इंतजार में।
वृक्षों की छांव में सुस्ताते मरीज अपनी बारी के इंतजार में।

इसलिए लगती है कतारें : वर्तमान व्यवस्था के तहत लैब में पर्ची बनाने के साथ मोबाइल से एसआरएफ आईडी लॉग इन की जाती है। इसके बाद नमूने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस व्यवस्था से एक रोगी पर करीब चार का स्टाफ लगता है। तब कहीं जाकर नमूना प्रक्रिया पूरी होती है। यानी 12 लोगों का स्टाफ एक बार की उपस्थिति में केवल तीन सैंपल ले सकता है।

यहां चिकित्सालय के एक ओर बनी लैब के परिसर में मरीजों को छाया देने के लिए पंडाल बनाए गए हैं। बावजूद इसके लंबी कतारें लग रही हैं। समझदार वर्ग तो सोशल डिस्टेंसिंग बनाकर कतार में खड़ा है, लेकिन जागरूकता के अभाव में कुछ लोग इस प्रोटोकॉल को तोड़ रहे हैं। ऐसे में बीमारी थमने की बजाए संक्रमण का खतरा ज्यादा गहरा रहा है। सोमवार को करीब तीन सौ रोगी कतार में देखे गए। एक औसत से यहां प्रतिदिन तीन से चार सौ नमूने लिए जा रहे हैं।

हर संभव प्रयास : जिला कोविड प्रभारी डॉ. दीपक निनामा ने बताया कि प्रशासन की ओर से मरीज हित में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सोशल डिस्टेंसिंग के लिए मरीजों को जागरूक होना पड़ेगा। कतार में अनुशासन बना रहे। इसके लिए सिक्यूरिटी गार्ड भी लगाया हुआ है। लैब में क्षमता से डबल काम किया जा रहा है। इसके लिए जिले के अन्य स्वास्थ्य केंद्रों से तकनीशियन बुलाए गए हैं। सेंपल लेने के दौरान हमारा कई स्टाफ भी चपेट में आ रहा है, जिन्हें अभी आइसोलेशन पर रखा हुआ है।

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