प्राकृतिक कागदी नाले में भराव का मुद्दा गरमाया:शारदा नगर के पीछे से गुजर रहे नाले में लगा बड़े-बड़े पत्थरों और गिट्‌टी का ढेर, स्थानीय लोगों ने किया विरोध

बांसवाड़ा6 महीने पहले
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शहर के शारदा नगर क्षेत्र से हो रहा भराव। - Dainik Bhaskar
शहर के शारदा नगर क्षेत्र से हो रहा भराव।

शहर में कागदी नाले के प्राकृतिक बहाव वाले मार्ग पर भराव का मुद्दा गरमा रहा है। शारदा नगर के पीछे होकर गुजरते कागदी पिक-अप-वियर नाले में सैकड़ों की संख्या में डंपरों से भराव हो रहा है। युद्ध स्तर पर बड़े-बड़े पत्थरों और मौजूदा गिट्‌टी के ढेर से प्राकृतिक नाले के आधे हिस्से को पाटा जा चुका है। नाले में गतिरोध और बरसात के दिनों में उफान की आशंकाओं को देखते हुए शारदा नगर के लोगों ने इस गतिविधि पर विरोध दर्ज कराया। साथ ही राजस्व अमले से जारी भराव रोकने की मांग की। दूसरी ओर राजस्व अमला मौन साधे हुए है।

तहसीलदार के आदेश दिखाकर लोग भराव में जुटे हैं, जबकि आदेश में शामिल सभी शर्तों को मौके पर दरकिनार किया गया है। सच यह भी है कि ड्रेनेज एक्ट के तहत प्राकृतिक बहाव वाले नाले पर मूल अधिकार सिंचाई विभाग का होता है। इस पर निर्माण को लेकर नगर परिषद के साथ माही परियोजना के अधिकारियों की भी अनुमति का होना नियमानुसार अनिवार्य है।

बांसवाड़ा शहर के बीच में से गुजरते कागदी नाले का मूल स्वरूप।
बांसवाड़ा शहर के बीच में से गुजरते कागदी नाले का मूल स्वरूप।

8 अगस्त 2015 को तहसीलदार स्तर पर दी गई अनुमति के हिसाब से श्यामपुरा में पीपलोद निवासी नारायणलाल पुत्र धनजी राणा को यहां कृषि खातेदारी वाली जमीन पर बाउण्ड्रीवाल निर्माण की अनुमति दी गई थी। इसकी शर्त के तहत निर्माण में भूमि का स्वरूप नहीं बदला जाएगा। राजस्व अभिलेख में यह जमीन कृषि भूमि ही रहेगी। निर्माण से पहले पटवारी हल्का से सीमा ज्ञान कराया जाएगा। निर्माण से समीपवर्ती लोगों को असुविधा नहीं होनी चाहिए। निर्माण से पहले स्थानीय निकाय या फिर ग्राम पंचायत से अनुमति लेनी होगी। निर्माण कार्य सड़क सीमा से 132 फीट छोड़कर करना होगा। नाला होने की दशा में 15 फीट छोड़कर निर्माण कार्य होगा। किसी भी एक शर्त के उल्लंघन पर अनापत्ति को निरस्त माना जाएगा।

मौका स्थल देखे तो कागदी नाले की शुरू से बनी हुई प्राकृतिक चौड़ाई का आधा हिस्सा पाटकर संकरा किया जा चुका है। इस मामले को लेकर नगर परिषद से भी कोई अनुमति नहीं दी गई है। भराव से नाले का मूल स्वरूप बदलता दिख रहा है। सड़क से 15 फीट छोड़ने की बात कोसों दूर तक सही नहीं है। कृषि खातेदारी को लेकर माही परियोजना से भी कोई अनापत्ति नहीं दी गई है। यहां सैकड़ों टन पत्थर डालकर भराव करना कई सवाल खड़े कर रहा है।

हाईकोर्ट के आदेश
अब्दुल बनाम सरकार के एक मामले में सुनवाई के दौरान हाइकोर्ट ने वर्ष 2009 में एक आदेश दिया था। इसमें स्पष्ट किया था कि किसी भी प्राकृतिक नाले के बहाव क्षेत्र में कभी कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। न ही नाले के मूल स्वरूप को बदला जाएगा। वहीं, सिंचाई विभाग के नियम के अनुसार ऐसे खातेदारों को खेती के लिए अस्थायी पट्‌टा दिया जाता है। इसका उपयोग पानी नहीं होने की दशा में खेती करने या फिर मछली पालन जैसे कामों में संभव होता है, लेकिन नाले के स्वरूप से छेड़छाड़ करना इसमें शामिल नहीं होता। ऐसा ही उदाहरण माही बांध के बेकवाटर क्षेत्र में जलस्तर कम होने पर होने वाली खेती है।

इसलिए है संकट
संकट इस बात का है कि बरसात के दौरान ड्रेनेज सिस्टम के तहत पूरे शहर का पानी कागदी नाले में जाता है। इस दौरान माही बेक वाटर से पांच नंबर में बनने वाली बिजली के बाद रेस्ट वाटर भी कागदी में आता है। कागदी पिक-अप-वियर के पांच गेट खोलकर यहां के पानी को इसी नाले में छोड़ा जाता है। यह नाला आगे जाकर माही नदी में मिलता है, जो कि अंत में कनाडा बांध गुजरात होते हुए समुद्र में मिलता है। ऐसे में इस निर्माण से बरसात के समय में इस क्षेत्र में पानी के शहर में घुसने की आशंकाएं जन्म ले रही हैं।

पहले से अनुमति
तहसीलदार लक्ष्मीनारायण राठौड़ ने कहा कि मामले में तहसील स्तर पर पहले से अनुमति दी गई है। इसके बाद अगले सवालों पर तहसीलदार की ओर से फोन काट दिया गया।

हमने नहीं दी अनुमति
नगर परिषद आयुक्त प्रभुलाल भाभोर ने बताया कि नगर परिषद की ओर से संबंधित आराजी नंबर पर किसी तरह के निर्माण काे लेकर अनुमति नहीं दी गई है। अगर, बिना अनुमति निर्माण हो रहा है तो गलत है। तहसील स्तर पर भले ही कोई अनुमति जारी हुई हो।

विकास का नंबर, बोले नहीं जानता
आश्चर्य इस बात का है कि मौके पर भराव करा रहे कथित ठेकेदार ने खातेदार का नाम बताते हुए संबंधित भराव को लेकर किसी विकास जी नाम के व्यक्ति से बातचीत करने को कहा। उसकी ओर से दिए गए नंबर पर विकास नाम के शख्स ने बातचीत भी की और खुद काे एक माह से कोरोना के चलते आइसोलेशन में होने की बात कही। यहां विकास ने इस प्रकार की किसी जमीन पर भराव कराने की बात से इनकार किया। साथ ही अनभिज्ञता जताई।

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