बांसवाड़ा में एक ही जगह पर दो टोल:एक र केवल निजी कार और दूसरे पर कमर्शियल वाहनों से वसूली, वाहन चालकों को हो रही परेशानी

बांसवाड़ा6 महीने पहले
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पहले टोल पर मौजूद कर्मचारी निजी वाहन को देखकर लपके की तरह व्हील वाले बेरिगेट्स को आड़ा कर देते हैं। - Dainik Bhaskar
पहले टोल पर मौजूद कर्मचारी निजी वाहन को देखकर लपके की तरह व्हील वाले बेरिगेट्स को आड़ा कर देते हैं।

बांसवाड़ा-रतलाम राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों से शुल्क वसूली के लिए बनाए गए टोल वाहन सवारों के लिए आश्चर्य का विषय बने हुए हैं। खास बात यह है कि मात्र 40 मीटर की दूरी पर यहां अलग-अलग दो टोल बने हुए हैं। इनमें एक टोल केवल प्राइवेट वाहनों से वसूली कर रहा है तो दूसरे पर कमर्शियल वाहनों की वसूली हो रही है। बांसवाड़ा से रतलाम जाते समय पहले निजी वाहन यानी कार से पहले टोल पर किराया वसूला जा रहा है, जबकि कमर्शियल वाहनों को इस टोल पर नहीं रोका जाता।

इसी तरह रतलाम से बांसवाड़ा आते समय पहले कमर्शियल वाहनों को रोका जाता है, जबकि आगे वाले टोल पर उनके लिए बेरीगेट्स हटा लिया जाता है। ऐसा पहली बार ही देखने को मिला है कि इतनी कम दूरी पर दो टोल एक साथ अलग-अलग वाहनों से वसूली करते हैं। विशेष बात यह भी है कि वसूली में सक्रिय दाेनों एजेंसियां भी अलग-अलग हैं तो कायदे भी भिन्न हैं।

आरएसआडीसी की वसूली

करीब 5 साल पहले बनकर तैयार हुई सड़क पर वसूली संग्रहण के लिए पहले एक ही टोल था। तब तत्कालीन वसुंधरा सरकार की ओर से निजी चौपहिया वाहनों को इस टोल पर नि:शुल्क कर दिया गया था। तब आमंत्रित टोल वसूली निविदा में निजी वाहनों से वसूली का प्रावधान नहीं रखा गया था। बाद में 2019 में प्रदेश की गहलोत सरकार के कार्यकाल में एक बार फिर चौपहिया वाहनों से वसूली का प्रावधान हुआ। तब राजस्थान स्टेट रोड डवलपमेंट कार्पोरेशन (आरएसआरडीसी) ने एक बार फिर निजी वाहनों से वसूली के लिए टोल निविदा आमंत्रित की। इसके बाद यहां सड़क के बीच में एक अतिरिक्त टोल केंद्र बनाया गया है। नई टोल व्यवस्था केवल निजी वाहनों पर लागू है।

चौंक जाता है वाहन चालक

राष्ट्रीय राजमार्ग पर बने दो टोल की खामी यह है कि बांसवाड़ा से जाते समय पहले टोल पर मौजूद कर्मचारी निजी वाहन को देखकर लपके की तरह व्हील वाले बेरिगेट्स को आड़ा कर देते हैं। सड़क के बीच में छोटे एक केबिन से संचालित टोल किसी भी तरह से संग्रहण केंद्र नहीं दिखता। इसलिए वाहन सवार को आगे दिखने वाले टोल बूथ का ख्याल रहता है। वहीं आगे जाकर वाहन चालक खुद ही कमर्शियल वसूली वाले नाके पर रूक जाता है, जहां मौजूद स्टाफ वाहन जाने देने का इशारा करता है। ऐसा ही कमर्शियल वाहनों के चालकों के साथ भी समझने में उलझन होती है। छोटे टोल पर वाहन चालक खुद-ब-खुद वाहन रोक देता है। लागू व्यवस्था से रोड भी संकरी हो गई है। वाहनों को सड़क के नीचे उतारकर लेना पड़ता है। राजस्थान में आरएसआरडीसी के अधीन प्रतापगढ़-मंदसौर मुख्य मार्ग पर भी ऐसे ही दो टोल की दुविधा पहली बार इस मार्ग से गुजरने वाले वाहन चालकों को हैरत में डालती है।

अगस्त में निविदा

आरएआरडीसी के प्रोजेक्ट ऑफिसर विजय मीणा ने कहा कि वसुंधरा सरकार के कार्यकाल में निजी चौपहिया वाहनों से वसूली नहीं होती थी। वहीं बाद में गहलोत सरकार ने वसूली लागू कर दी। इस कारण से निजी वाहनों की वसूली को लेकर अलग से निविदा हुई। नई पार्टी को वर्कऑर्डर जारी किया गया। अब अगस्त में फिर निविदा होगी। तब एक ही टोल व्यवस्था लागू होगी।

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