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  • Because, 3 Lakh Units Of Electricity Is Getting Less Every Day, So After 5 Hours Cut, The Mercury 36 Degrees In October After 4 Years.

पारा चढ़ा:क्योंकि, रोज 3 लाख यूनिट बिजली कम मिल रही, इसलिए 5 घंटे कटौती 4 साल बाद अक्टूबर में पारा 36 डिग्री

बांसवाड़ा20 दिन पहले
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  • त्योहारी सीजन में बिजली कटौती और गर्मी ने व्यापारियों की बढ़ाई टेंशन​​​​​​​

त्याेहारी सीजन में बिजली संकट ने लाेगाें काे पसीने-पसीने कर दिया है। चार दिनों से हर दिन 4 से 5 घंटे की अघोषित कटौती हो रही है। जिले में हर दिन करीब 20 लाख 7 हजार यूनिट बिजली की खपत है। जिसके मुकाबले विद्युत प्रसारण निगम काे 17 से 18 लाख यूनिट बिजली ही मिल पा रही है। इसलिए गांवों में 5 से 6 घंटे तक कटौती की जाने लगी है।

आने वाले दिनों में यह कटौती और ज्यादा बढ़ने की भी आशंका जताई जा रही है। डिस्कॉम का कहना है कि 33 केवी के अलग-अलग जीएसएस पर सप्लाई कम की जा रही है। जिसके कारण बिजली कटौती का काेई समय निर्धारित भी नहीं है। कटौती से लोग खासे परेशान हैं। 2 अक्टूबर के बाद से ही जिले को कम बिजली में रही है। इधर, चार साल बाद ऐसा हुआ है कि अक्टूबर में पारा 36 डिग्री तक पहुंच गया है। इससे पहले 2017 में पारा 36 डिग्री रहा था। वातावरण में आद्रता 61 प्रतिशत रही और हवा की गति 6 किलोमीटर प्रतिघंटा की दर से दक्षिण से पूर्व दिशा की ओर बनी रही। जिले में अब औसत 1000 एमएम की तुलना में 8़18.36 एमएम बारिश हो चुकी है।

सीजन के समय बिजली संकट से व्यापार पर असर
व्यापारी सनत जैन ने बताया कि 2 साल बाद अब इस सीजन में व्यापार सही तरीके से शुरू हुआ है। लेकिन दिन में 3 से 4 घंटे की बिजली कटौती हो रही है। कपड़ा व्यापार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मनीष मेहता ने बताया कि बिजली कटौती से ग्राहक पर असर पड़ रहा है। जहां कपड़ा फिनिशिंग हो, वाॅशिंग करवानी हो, जो छोटे कारीगर करते हैं, वे भी अब जो काम 2 दिन में होना चाहिए, वह 7 दिनों में भी नहीं हो रहा है।

सीजन के समय बिजली संकट से व्यापार पर असर
व्यापारी सनत जैन ने बताया कि 2 साल बाद अब इस सीजन में व्यापार सही तरीके से शुरू हुआ है। लेकिन दिन में 3 से 4 घंटे की बिजली कटौती हो रही है। कपड़ा व्यापार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष मनीष मेहता ने बताया कि बिजली कटौती से ग्राहक पर असर पड़ रहा है। जहां कपड़ा फिनिशिंग हो, वाॅशिंग करवानी हो, जो छोटे कारीगर करते हैं, वे भी अब जो काम 2 दिन में होना चाहिए, वह 7 दिनों में भी नहीं हो रहा है।

एक्सपर्ट व्यू-बारिश ने पैटर्न बदला इसलिए अक्टूबर में भी पारा 360
महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उदयपुर के निदेशालय अनुसंधान के पूर्व निदेशक डॉ. जी एस आमेटा ने बताया कि अब हर मौसम के आने में पिछले वर्षों की तुलना में कुछ देरी हो रही है। पहले अक्टूबर के पहले और दूसरे सप्ताह में पहले 34 डिग्री से नीचे तापमान नहीं जाता था। लेकिन इस बार बारिश के पैटर्न में काफी बदलाव देखा गया है। जिसमें 22 और 7 दिनों का लगातार अंतर रहा है। यही कारण रहा है कि इस बार मानसून के दौरान सितंबर में ही अधिक बारिश होने से बारिश का कोटा कुछ हद तक पूरा हुआ है। इस बार सितंबर में अक्टूबर के पहले सप्ताह में बारिश हाेने के बाद गर्मी का असर बढ़ा है। जो पिछले पांच सालों की तुलना में दो डिग्री अधिक हो कर 36 डिग्री हो गया है। वहीं अभी वातावरण में आद्रता 65 प्रतिशत बनी हुई है। इससे खरीफ की फसल की नमी में बढ़ते तापमान से कमी आएगी। अभी फसलों में नमी 25 से 30 प्रतिशत है जाे गर्मी से 11 से 12 प्रतिशत तक रह जाएगी। उन्होंने बताया कि अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में तापमान में कुछ कमी आ सकती है।

अब यह तो सभी जगह संकट चल रहा है। आगे क्या रहने वाला है यह तो सरकार के लेवल का काम है। हमें तो जो बिजली मिल रही है। उस हिसाब वितरण कर रहे हैं। अभी संकट के चलते अगल-अगल क्षेत्रों में कटौती तो हो रही है।
-एमडी चौधरी, कार्यवाहक एसई, डिस्कॉम

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