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चाचाकोटा में दिखा दुर्लभ नीलकंठ:वागड़ में मनाया पक्षी दिवस, पेंटिंग प्रतियाेगिता में अव्वल रहे 70 बच्चों का किया सम्मान, बच्चों के साथ बड़ों ने भी भाग्य के लिए लगाई दौड़

बांसवाड़ा3 महीने पहले
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माहीडेम के बेक वाटर स्थित चाचा कोटा गांव पहुंचे बच्चे और उनके परिवारजन। - Dainik Bhaskar
माहीडेम के बेक वाटर स्थित चाचा कोटा गांव पहुंचे बच्चे और उनके परिवारजन।

बांसवाड़ा में दशहरे के मौके पर शुक्रवार को पक्षी दिवस मनाया गया। सदियों से चली आ रही परंपरा को निभाते हुए लोगों ने माहीडैम के बैकवाटर के चाचा कोटा गांव पहुंचकर नीलकंठ पक्षी की अटखेलियों को करीब से देखा। संस्कृति और पर्यावरण को सुरक्षित रखने का उद्देश्य यहां तब सफल दिखाई दिया, जब वागड़ पर्यावरण संस्थान की इस यात्रा में शामिल नई पीढ़ी ने पौधरोपण के साथ पक्षियों को सुरक्षित रखने का संकल्प लिया। अथाह पानी के बीच सुनसान इलाके में दुर्लभ नीलकंठ की अदाकारी से बच्चे न केवल खुश हुए। बल्कि उनके भीतर दुर्लभ पक्षियों को सुरक्षित रखने की भावनाओं ने भी जन्म लिया।

पृथ्वीनाथ मंदिर में विजेताओं को सम्मानित करते कुलपति त्रिवेदी।
पृथ्वीनाथ मंदिर में विजेताओं को सम्मानित करते कुलपति त्रिवेदी।

इससे पहले संस्थान की ओर से जिले के 25 स्कूलों में हुई नीलकंठ पेंटिंग प्रतियोगिता में शामिल श्रेष्ठ 70 प्रतियोगियों को यहां प्रकृति की गोद में स्थित बायीं तालाब के पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर में सम्मानित किया गया। यहां प्रकृति की खूबसूरती यह है कि तालाब के पानी के साथ हरियाली की चादर ओढ़े यह जगह बहुत ही खूबसूरत है। इस मौके पर GGTU (गोविंद गुरु ट्राइबल यूनिवर्सिटी) के कुलपति आई.बी. त्रिवेदी ने विजेता प्रतियोगियों को सम्मानित किया। संस्थान के दीपक द्विवेदी ने बताया कि सभी विजेता प्रतियोगियों की सूची विद्यालयों की ओर से भेजी गई थी।

प्राप्त करने के बाद सामूहिक फोटोग्राफ में प्रतियोगी।
प्राप्त करने के बाद सामूहिक फोटोग्राफ में प्रतियोगी।

2 घंटे में 2 नीलकंठ दिखे
चाचाकोटा गए बच्चों और उनके परिजनों को चाचाकोटा में नीलकंठ की झलक पाने के लिए दो घंटे इंतजार करना पड़ा। इसके बाद यहां पहला नीलकंठ दिखाई दिया। वहीं कुछ देर बाद ही दूसरा नीलकंठ पक्षी देखने को मिला। यह देख सभी बच्चे खुश दिखाई दिए। संस्थान की ओर से पक्षियों को दूर से देखने के लिए दूरबिन जैसी व्यवस्था भी की गई थी।

कैमरे में कैद हुआ नीलकंठ।
कैमरे में कैद हुआ नीलकंठ।

ऐसी है धार्मिक मान्यता
धार्मिक मान्यता है कि दशहरा पर्व पर नीलकंठ पक्षी से मिन्न्त कर लोगों ने उनकी बात को भगवान शिव तक पहुंचाने की कोशिश की थी। मान्यता है कि विजय दशमी के दिन भगवान राम ने भी नीलकंठ के दर्शन किए थे। ऐसा कहा जाता है कि, इस दिन नीलकंठ का दर्शन अत्यंत शुभ और भाग्य को जगाने वाला माना जाता है। इसीलिए विजयादशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन की परम्परा रही है।