56 दिन कैसे पूरी होंगे ब्लड की जरूरतें:18 से 45 वाले वैक्सीनेशन के बाद नहीं कर सकेंगे रक्तदान, इंतजाम में जुटा ब्लड बैंक

बांसवाड़ा7 महीने पहले
बांसवाड़ा। जिला मुख्यालय स्थित ब्लड बैंक।
  • समाजसेवियों ने उठाया जिम्मेदारी का बीड़ा

समस्या तब हावी हो रही है, जब इस ब्लड बैंक से 71 थैलीसीमिया के जरूरतमंद जुड़े हुए हैं। उनकी जिंदगी बैंक के रक्तकोष से जुड़ी हुई है। फिलहाल, तो स्वयंसेवी संगठनों की ओर से डोनेशन कैंप के माध्यम से रक्त एकत्र किया जा रहा है, लेकिन आने वाले दिनों में मुंह बाए समस्या को लेकर फिलहाल कोई स्थायी विकल्प नहीं सूझ रहा है। रक्तदाताओं की मंशा के बावजूद भविष्य की मजबूरी कुछ और ही तस्वीर बयां कर रही है।

रक्तदाताओं के भरोसे
जिला अस्पताल की बात करें तो यहां पर ब्लड बैंक की व्यवस्थाएं रक्तदाताओं के भरोसे ही संचालित हैं। जागरूक संगठन और युवाओं के सहयोग से यहां नियमित तौर पर ब्लड की जरूरतें पूरी होती आ रही हैं। जनवरी 2021 की बात करें तो यहां पर 427 यूनिट रक्त संग्रहित हुआ, जिसमें 334 यूनिट ब्लड की खपत दर्ज हुई।

इसी तरह फरवरी में 339 यूनिट संग्रहण में 363 यूनिट खपत रही। मार्च में 350 यूनिट के जवाब में 320 और अप्रैल में अब तक 325 यूनिट रक्त संग्रहण के जवाब में 300 यूनिट खपत दर्ज की गई। इसमें खास तौर पर 71 बच्चे वो हैं, जो थैलीसीमिया जैसे रोग से जूझ रहे हैं।

बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में मौजूद ब्लड बैंक।
बांसवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय में मौजूद ब्लड बैंक।

35 दिन बाद खून खराब

अब चिंता इस बात की है कि 45 वर्ष तक वैक्सिनेशन के दौरान ऐसा युवा आगामी 56 दिन तक रक्तदान नहीं कर सकेगा। इसके लिए स्वयं सेवी संस्थाएं अभी से ब्लड का स्टोर करने में सहयोग कर रही हैं, लेकिन समस्या यह है कि ब्लड की गुणवत्ता 35 दिनों तक ही रहती है। ऐसे में आगे के 21 दिनों को लेकर मंथन किया जा रहा है। वजह एक यह भी है रक्तदाताओं का बड़ा समूह 40 साल की उम्र का है।
स्वयं सेवियों के प्रयास

बांसवाड़ा में सपना फाउण्डेशन, सनातनधर्मी रूधिर फाउण्डेशन, रेड ड्रॉप इंटरनेशनल एवं विप्र फाउण्डेशन जैसी मुख्य संस्थाएं हैं, जो कि स्वयंसेवी संगठन के तौर पर बांसवाड़ा ब्लड बैंक में ब्लड की आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग करती हैं। ये संगठन युवाओं को ब्लड डोनेशन के लिए प्रेरित करते हैं। ऐसे में इन संगठनों की ओर से भविष्य के संकट को लेकर गत दिनों सभापति जैनेंद्र त्रिवेदी के निर्देशन में बैठक हुई। इसमें समस्या के समाधान पर मंथन हुआ।

गांवों में दौड़ेगी वैन

वर्तमान में स्वयं सेवी संगठन अच्छी तादाद में रक्त संग्रहण के प्रयास में हैं, लेकिन इससे जरूरतें पूरी नहीं होती देख आगामी दिनों में ग्रामीण स्तर पर वैन संचालित करने पर सहमति बनी है। ताकि कोरोनाकाल में ग्रामीण को शहर मुख्यालय तक नहीं आना पड़े। इसी तरह संगठनों की ओर से चिकित्सालय के बाहर निजी स्थान पर रक्त संग्रहण केंद्र बनाने पर विचार चल रहा है। यहां पर चिकित्सालय का स्टाफ सुरक्षित माहौल में रक्तदान कर सकेगा। कारण आने वाले लोगों को कोरोना का संकट नहीं रहेगा। इस केंद्र में केवल एक स्टाफ और रक्तदाता मौजूद होगा।

8 से 10 दिन का गैप

एमजी हॉस्पिटल के सीनियर टेक्निकल नरेंद्र बघेल की मानें तो वैक्सिनेशन एक टीके के बाद दूसरे टीकाकरण में 28 दिन का गेप रखना होगा। इसके साथ ही अगला टीका 42 से 56 दिन के बीच में लगेगा। इस प्रक्रिया में आम रक्तदाता को बीच में 8 से 10 दिन का गेप मिलेगा, जब वह इच्छानुसार रक्तदान कर सकेगा।

बघेल ने कहा कि रक्त की खपत में तो बहुत बड़ा फर्क नहीं आया है, लेकिन कोरोना में रक्त संग्रहण में तकलीफें आ रही हैं। आगामी दिनों में व्यवस्था बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। इस मामले में ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. प्रवीण गुप्ता से बातचीत के प्रयास किए, लेकिन दोपहर 12 बजे से उनका फोन बंद बताता रहा।

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