शिविर में पट्‌टे बांटना सरकार का ड्रामा:BTP प्रदेशाध्यक्ष घोघरा बोले:  चुनाव से पहले आदिवासी को मंत्री बनाने की नौटंकी पुरानी

बांसवाड़ा13 दिन पहले
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बांसवाड़ा में प्रेसवार्ता को संबोधित करते BTP प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम घोघरा एवं अन्य। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा में प्रेसवार्ता को संबोधित करते BTP प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम घोघरा एवं अन्य।

BTP (भारतीय ट्राइबल पार्टी) के प्रदेशाध्यक्ष वेलाराम घोघरा ने कहा कि प्रशासन गांवों के संग अभियान के नाम से अशोक गहलोत सरकार केवल ड्रामा कर रही है। आदिवासी क्षेत्र में एक स्थान पर 5 पीढ़ियों से रहने वाले बुजुर्ग लोग कागज इधर-उधर ले जाते हुए मर गए। उनके परिवार को पट्‌टे नहीं मिले। सरकार को चाहिए कि अनुसूचित क्षेत्र के लिए अलग से विधेयक पास कर पीढ़ियों से रहने वाले सभी लोगों को उस जमीन के लिए अधिकृत करें। बांसवाड़ा में मंदारेश्वर क्षेत्र स्थित BTP कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए घोघरा ने बुधवार को कहा कि CM गहलोत की ओर से मंत्रिमंडल में बांसवाड़ा के दो आदिवासी नेताओं को जगह देने के मामले में घोघरा ने कहा कि हर चुनाव के पहले सरकार आदिवासी नेताओं को मंत्री पद देकर खुश करती आ रही है। ऐसा बीते 70 साल से हर पार्टी (कांग्रेस और भाजपा) करती आ रही है, लेकिन, सच यह है कि ऐसे नेताओं को आदिवासी हित में बोलने नहीं दिया जाता है। आदिवासियों का उपयोग सरकार केवल वोटबैंक के लिए करती है।
धारा 244 A गायब
प्रदेशाध्यक्ष घोघरा ने आरोप लगाए कि सत्ता में रहने वाली हर सरकार आदिवासी हित की बातें करती है, लेकिन कड़वा सच है कि संविधान में धारा 244 A होने के बावजूद प्रदेश की किसी भी सत्ता ने राज्यपाल को उसके अधिकार नहीं दिए। संविधान की व्यवस्था के तहत आदिवासियों के संरक्षक राष्ट्रपति और राज्यपाल दोनों हैं। लेकिन, प्रदेश के विधानमंडल और CM ने कभी भी राज्यपाल को उनके अधिकारों का उपयोग नहीं करने दिया।
तो ये क्यों नहीं करती सरकार

  • घोघरा ने कहा कि वास्तव में सरकार आदिवासी हित चाहती है तो गहलोत सरकार को कडाना विस्थापित आदिवासियों को त्रिुपरा सुंदरी में आरक्षित की गई जमीनों पर उनका हक दिलाना चाहिए।
  • त्रिुपरा सुंदरी में 623 हैक्टेयर जमीन के लिए प्रभावित आदिवासी 3 साल से लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन उनके हिस्से की जमीन सरकार नहीं दिला पाई। वहीं उद्योगपतियों को वहीं जमीनें सौंप दी।
  • आदिवासी क्षेत्र (वागड़) में सरकार को छोटे एनीकट बनाकर कृषि उत्पादन बढ़ाने पर जोर देना चाहिए।
  • ट्राइफेड संस्था की ओर से नहरी क्षेत्र वाले इलाकों में कुंडाल बनाकर अच्छे बीज तैयार करने के प्रयास होने चाहिए।
  • पढ़ने वाले जनजाति बच्चों को छात्रवृत्ति देनी ही है तो उन्हें हर माह की एक तारीख को उसका भुगतान करना चाहिए।
  • प्रत्येक कॉलेज स्तर पर NCC की अनिवार्यता की जानी चाहिए।
  • आदिवासी क्षेत्र में ग्राम सभाओं की अनुशंसा के बाद फाइल कलेक्टर को भेजने वाली परंपरा बंद होनी चाहिए। केवल ग्राम सभाओं का निर्णय अंतिम होना चाहिए।
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