4 कमरों में चल रहा 12वीं तक स्कूल:किचन शेड में बैठकर पढ़ रहे बच्चे, बांसलीखेड़ा उमावि में हैं 427 बच्चे

बांसवाड़ाएक महीने पहले
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बांसलीखेड़ा स्थित राउमावि में किचन शेड में बड़ी क्लास के बच्चों को पढ़ाते हुए शिक्षक। - Dainik Bhaskar
बांसलीखेड़ा स्थित राउमावि में किचन शेड में बड़ी क्लास के बच्चों को पढ़ाते हुए शिक्षक।

घाटोल के बांसलीखेड़ा में 12वीं तक की स्कूल 4 कमरों में चल रही है। कक्षा एक से 12वीं तक बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल को आए दिन विकल्प तलाशने पड़ते हैं। सर्दी में धूप वाली जगह तलाशी जाती है। वहीं गर्मी के दिनों में इस स्कूल के बच्चों को पढ़ाने के लिए पेड़ों की छांव ढूंढी जाती है। लेकिन, कम संशाधनों के बीच एकाग्रता बनाए रखना संभव नहीं हो पाता। अभी के हालात और चौंकाने वाले हैं। यहां बच्चों को किचन शेड में बैठकर पढ़ाया जा रहा है।

एक कमरे में छोटी क्लास के बच्चे एक साथ।
एक कमरे में छोटी क्लास के बच्चे एक साथ।

अब तक नहीं बनी प्रयोगशाला
स्कूल में बैठक व्यवस्था और कमरों की कमी के चलते नामांकन भी कम हो रहे हैं। मजबूरी में सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे ही यहां आते हैं। आलम यह है कि कक्षा 12वीं (आर्टस) में 6 और 11वीं (आर्टस) में 16 विद्यार्थी पढ़ते हैं। लेकिन, ऐसे में पढ़ाई की समस्याओं के बीच प्रेक्टिकल की समस्या गंभीर बनी हुई है। कमरों के अभाव में बच्चों के लिए यहां प्रयोगशाला ही नहीं बन पाई है।

तंग कमरों में कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाते हुए शिक्षक।
तंग कमरों में कई कक्षाओं के बच्चों को एक साथ पढ़ाते हुए शिक्षक।

13 साल पहले सेकंडरी और 8 साल पहले सीनियर सेकंडरी
वर्ष 2008 में यह स्कूल प्राथमिक से माध्यमिक में क्रमोन्नत हुआ था। वहीं वर्ष 2013 में इस स्कूल को क्रमोन्नत कर सीनियर सेकंडरी बनाया गया था, लेकिन शिक्षा विभाग की अनदेखी के चलते यहां 13 वर्ष में भी विकास और व्यवस्थाएं नहीं जुट पाई हैं। स्थिति यह है कि वर्ष 2008 में भी यहां 4 कमरे थे और आज भी हाल जस के तस हैं। वर्तमान में इस क्रमोन्नत स्कूल में 427 बच्चे पढ़ते हैं।

ये है घाटोल ब्लॉक का बांसलीखेड़ा स्कूल।
ये है घाटोल ब्लॉक का बांसलीखेड़ा स्कूल।

ये पद पड़े हैं खाली, कैसे हो पढ़ाई

  • प्रधानाचार्य
  • एक व्याख्याता
  • एक वरिष्ठ अध्यापक (गणित)
  • लेवल 2 में हिन्दी अध्यापक
  • लेवल 2 में सामाजिक अध्यापक
  • चतुर्थ श्रेणी के दो पद

पेयजल और शौचालय भी नहीं
कहने को स्कूल परिसर में ग्राम पंचायत की ओर से पनघट योजना के तहत RO प्लांट लगाया गया था। अब हैंडपंप खराब होने से RO भी बंद है। बच्चों को पेयजल की सुविधा के लिए आधा किलोमीटर दूर से पानी लाना पड़ रहा है। दूसरी ओर शौचालय के नाम पर ऐसा खंडहर पड़ा है, जहां स्टाफ और बालिकाओं को जाने में डर लगता है।
जिम्मेदार का जवाब
इधर, माध्यमिक शिक्षा विभाग के DEO मावजी खांट ने जवाब दिया कि स्कूल की समस्या उनकी जानकारी में नहीं है। लेकिन, स्कूल की ओर से इस बारे में प्रयास नहीं किए गए होंगे। नहीं भी किए होंगे तो अब समग्र शिक्षा अभियान के तहत स्कूल के लिए प्रस्ताव तैयार कराए जाएंगे।

कंटेंट : किशोर बुनकर (घाटोल)