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  • Claims Of Women's Education Failed In Tribal dominated Banswara, Local Leaders Did Not Even Try, A Few Days Ago The State Government Released The Upgraded College List

26 साल बाद भी अपग्रेड नहीं हुआ गर्ल्स कॉलेज:जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा में महिला शिक्षा के दावे फेल, स्थानीय नेताओं ने भी नहीं किए प्रयास, कुछ दिनों पहले प्रदेश सरकार ने जारी की क्रमोन्नत कॉलेज सूची

बांसवाड़ा4 महीने पहले
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बांसवाड़ा। हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय। - Dainik Bhaskar
बांसवाड़ा। हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय।

जनजाति बाहुल्य बांसवाड़ा जिले में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने वाले सरकारी दावे हवा हो रहे हैं। यही वजह है कि 26 साल बाद भी जिले के एकमात्र राजकीय कन्या महाविद्यालय का अपग्रेडेशन (क्रमोन्नयन) नहीं हो सका है। जुबली इयर मना चुके हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय के इस बार क्रमोन्नति के पूरे चांस थे, लेकिन स्थानीय नेताओं के साथ सरकार की अनदेखी से इस बार भी यह सपना अधूरा रह गया।

इसके कारण ग्रेज्युएट डिग्री के बाद बालिकाओं को पढ़ाई बीच में छोड़नी पड़ रही है। या फिर मजबूरी में दूसरे कॉलेज में भटकना पड़ रहा है। बहुत सी बालिकाएं विकल्प के तौर पर रेग्युलर पढ़ाई छोड़कर प्राइवेट पढ़ाई कर रही हैं। गौरतलब है कि बांसवाड़ा में वर्ष 1995 में यहां पुराने बस स्टैण्ड क्षेत्र स्थित पुरानी जेल में राजकीय कन्या महाविद्यालय की स्थापना हुई थी।

बाद में इस कॉलेज का नाम बदलकर हरिदेवजोशी कन्या महाविद्यालय किया गया था। तबसे अब तक यहां केवल ग्रेज्युशन वाली कक्षाएं चल रही हैं। पीजी कक्षा के नाम पर केवल होम साइंस का यहां विकल्प मिला हुआ है। इस कॉलेज में करीब 70 फीसदी लड़कियां अनुसूचित जनजाति की हैं।

हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय परिसर।
हरिदेव जोशी राजकीय कन्या महाविद्यालय परिसर।

हर साल 400 बच्चियां पासआउट
वर्तमान में इस कॉलेज में 1800 लड़कियां पढ़ती हैं। इनमें हर साल न्यूनतम 400 बच्चियां पास आउट होती हैं, जिन्हें आगे पढ़ने के लिए दूसरे कॉलेज में जाना होता है या आगे की पढ़ाई प्राइवेट पूरी करनी पड़ती है। वहीं करीब 600 नई लड़कियां हर साल दाखिला लेती हैं। ग्रेजुएशन के नाम पर बीए के अलावा यहां बीएससी (गणित), बीएससी (बायोलॉजी) और कॉमर्स का विकल्प है। पीजी होम साइंस में केवल 20 लड़कियों का कोटा है।
सेक्शन का भी संकट
कॉलेज में वर्तमान में साइंस के नाम पर केवल एक सेक्शन है। यानी की एक साल में केवल 70 लड़कियां ही दाखिला ले सकती हैं। दूसरी ओर साइंस में दाखिले के लिए हर साल करीब 400 आवेदन आते हैं। ऐसे में मेरिट बनने के बाद बहुत सी योग्य लड़कियों को निराशा हाथ लगती है। दाखिला नहीं मिलने से आवेदन करने वाली लड़कियों को सब्जेक्ट बदलकर पढ़ाई निरंतर करनी पड़ती है, लेकिन, प्रयासों के बावजूद कॉलेज में नए सेक्शन को लेकर भी स्वीकृति नहीं मिल पाई है।
इन विषयों में पीजी की खास जरूरत
कॉमर्स के नाम पर लड़कियों की संख्या यहां कम है। लेकिन, साइंस को देखते हुए पीजी में जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और वनस्पति विज्ञान की कक्षाओं की आवश्यकता है, जबकि आर्ट्स कक्षाओं के हिसाब से हिंदी व अंग्रेजी साहित्य, पोलटिकल, संस्कृत व हिस्ट्री जैसी कक्षाओं की क्रमोन्नति की आवश्यकता बनी हुई है।
सरकारी आदेश में केवल 4 कॉलेज
राजस्थान सरकार के उच्च शिक्षा (ग्रुप-3) विभाग के शासन उप सचिव संजय शर्मा की ओर से 22 जुलाई को प्रदेश के क्रमोन्नत कॉलेज की सूची जारी की गई। इसमें मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र यानी जोधपुर के राजकीय महाविद्यालय का नाम था। इसके अलावा कोलायत (बीकानेर), बिलाड़ा जोधपुर और सपोटरा (करौली) कॉलेज का नाम था। आदेश के साथ ही यहां विषयवार स्वीकृत पदनाम भी जारी हुए। लेकिन, अब तक करीब 25 बार सरकार से क्रमोन्नति का प्रार्थना-पत्र लिख चुके इस कॉलेज की राजनीतिक अनदेखी की गई।
हमने किए प्रयास
कॉलेज प्राचार्य डाॅ. सरला पण्ड्या ने बताया कि उनकी ओर से कॉलेज क्रमोन्नति को लेकर सरकार से निरंतर पत्र व्यवहार होता है। पीजी कक्षाओं की लंबे समय से जरूरत है। मेरे हिसाब से स्टाफ की समस्या भी कुछ हद तक यहां जिम्मेदार है। संभवत: इसके चलते ही इस बार क्रमोन्नति नहीं दी गई है। हमारी ओर से इस बारे में हमेशा डिमांड की जाती है।