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योजना:जनजातीय भागीदारी योजना में कलेक्टर 10 लाख दे सकेंगे; 9 अगस्त काे विश्व आदिवासी दिवस पर होगा शुभारंभ

बांसवाड़ा2 महीने पहले
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  • विकास के लिए 25 लाख तक आयुक्त टीएडी, 25 लाख से अधिक की स्वीकृति विभाग स्तर पर हाेगी

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के जनजाति समुदाय के विकास के लिए जनजाति भागीदारी योजना के प्रारूप को मंजूरी दी है। योजना का शुभारंभ 9 अगस्त काे विश्व आदिवासी दिवस पर किया जाएगा। योजना के तहत जनजाति समुदाय के समावेशी विकास के लिए उनकी आवश्यकता के अनुरूप कार्य करवाएं जा सकेंगे। इनमें सामुदायिक संपत्तियों का निर्माण एवं मरम्मत, संवर्धन और संरक्षण के साथ-साथ रोजगार सृजन, कौशल प्रशिक्षण, डेयरी, पशुपालन आदि क्षेत्रों से संबंधित कार्य शामिल होंगे।

उदाहरण के तौर पर विद्यालय, छात्रावास, चिकित्सा केंद्र, आंगनबाड़ी केंद्र, मां-बाड़ी केंद्र, सड़क-पुलिया, जल संग्रहण ढांचे, एनिकट, पेयजल योजना, सामुदायिक शौचालय, बस स्टैण्ड आदि के निर्माण एवं मरम्मत, बल्क कूलर की स्थापना, हैचरी प्लांट, विभिन्न प्रकार के कोचिंग एवं प्रशिक्षण जैसे कार्य इस योजना के तहत हो सकेंगे। योजना के तहत वही कार्य अनुमत होंगे, जिनके माध्यम से लाभान्वित होने वाली जनसंख्या का कम से कम 50 प्रतिशत भाग जनजाति समुदाय का हो।

बताया जा रहा है कि निजी भूमि पर योजना के तहत निर्माण अनुमत नहीं होगा। भूमि अधिग्रहण के बदले मुआवजे का भुगतान, धार्मिक स्थलों का निर्माण, जातिगत या धार्मिक आधार पर सामुदायिक भवनों का निर्माण भी अनुमत नहीं होगा और आवृत्ति व्यय के लिए कोई राशि स्वीकृत नहीं की जा सकेगी। योजना में मुख्य रुप से नवीन कार्य और गतिविधियां की जाएगी। विशेष परिस्थितियों में अन्य योजनाओं के अपूर्ण कार्यों को वित्त पोषित किया जा सकेगा।

योजना में किए जाने वाले कार्य एवं गतिविधियों के लिए जरूरी राशि का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा जन सहयोग, स्वयंसेवी संस्थाओं, दानदाताओं या अन्य किसी सरकारी योजना, कार्यक्रम अथवा फंड से उपलब्ध कराना होगा।

योजना के तहत 10 लाख रुपए तक के कार्याे की स्वीकृति जिला कलेक्टर, 10 लाख से अधिक और 25 लाख तक के कार्यों की स्वीकृति आयुक्त जनजाति क्षेत्रीय विकास तथा 25 लाख से अधिक की स्वीकृतियां जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के स्तर से जारी की जाएंगी। योजना में कराए जाने वाले कार्यों का क्रियान्वयन राजकीय विभाग या राज्य सरकार के उपक्रम, निगम, बोर्ड आदि से कराया जाएगा। सृजित होने वाली परिसंपत्तियों का स्वामित्व राज्य सरकार का होगा।

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