डॉ. गुप्ता बोले:रील और रियल नायकों में अंतर करना आज परम आवश्यक है

बांसवाड़ा4 दिन पहले
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कुशलगढ़ के एमबीडी कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते शिक्षाविद्। - Dainik Bhaskar
कुशलगढ़ के एमबीडी कॉलेज में छात्रों को संबोधित करते शिक्षाविद्।

मामा बालेश्वर दयाल राजकीय महाविद्यालय कुशलगढ़ में गुरुवार को राजस्थान विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय शिक्षक संघ (राष्ट्रीय) ने कर्तव्य बोध दिवस मनाया। समारोह के मुख्य वक्ता अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अतिरिक्त महामंत्री डॉ. नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि प्रतिवर्ष कर्तव्य बोध दिवस 12 जनवरी विवेकानन्द जयंती से लेकर 23 जनवरी सुभाषचंद्र जयंती के बीच आयोजित किया जाता है ताकि दोनों महान विभूतियों से प्रेरणा लेकर हर भारतीय अपने कर्तव्यों की ओर अभिमुख हो सके।

डॉ. गुप्ता ने कहा कि संविधान ने हमें अधिकारों के साथ में कर्तव्य भी दिए हैं किंतु हमने अधिकारों को तो अपना लिया और कर्तव्य से धीरे-धीरे विमुख होते गए, जिससे हमारा सौंदर्य बोध और कर्म बोध बहुत कमजोर हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास किया कि रील के नायकों और रियल नायकों में अंतर करना आज की परम आवश्यकता है। फिल्मी दुनिया के कलाकार सेलिब्रिटी हो सकते हैं, परंतु वे राष्ट्रीय नायक नहीं है। राष्ट्रीय नायक स्वामी विवेकानंद, सुभाषचंद्र बोस जैसे महापुरुषों ने अपना सब कुछ समर्पित करके भारत मां का सर उन्नत किया।

उन्होंने धर्म को पुनर्परिभाषित करते हुए कहा कि वस्तुतः धर्म को संकीर्ण दायरों में बांध लिया गया है। धर्म हमें कर्तव्य का बोध करवाता है और वह हमारे जीवन में उन्नत चरित्र को विकसित करने में सहायक है। हमारे समक्ष सत्व गुण और तमस गुण यह दो विकल्प हैं हमें इन दोनों विकल्प में किसी एक का चुनाव करना है। यदि हम सतोगुण का चयन करते हैं तो निश्चित तौर पर व्यक्ति चरित्र विकसित होगा और व्यक्ति के चरित्र से ही राष्ट्र का चरित्र निर्मित होता है। आज हम आधुनिकता की दौड़ में शामिल होकर के हमारी परंपरा, संस्कृति यहाँ तक कि परिवार के महत्व को भी भूल रहे हैं। आज बड़े शहरों में ‘डबल इनकम नो किड्स’ की जो विकृत सोच चल पड़ी है, उससे समाज और परिवार का निर्माण अवरुद्ध होता जा रहा है।

प्रारंभ में विषय प्रतिपादन रुक्टा राष्ट्रीय के प्रदेश महामंत्री डॉ. सुशील बिस्सू ने किया। उन्होंने भारत को जानने के लिए विद्यार्थियों को स्वामी विवेकानंद के जीवन चरित्र को पढ़ने पर बल दिया और साथ ही विद्यार्थियों को देश की प्रगति में अपना योगदान देने का आह्वान किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. कल्याणमल सिंघाड़ा ने विद्यार्थियों को सीख देते हुए कहा कि विद्यार्थी दूसरों की मदद करना सीखें और साथ ही स्वयं प्रेरित होना सीखे। स्वामी विवेकानंद और सुभाषचंद्र बोस दोनों ही युवाओं के लिए आदर्श हैं। विवेकानंद ने जहां चरित्र निर्माण के द्वारा भारत का मान बढ़ाया वहीं सुभाष चंद्र बोस ने देशभक्ति का पाठ पढ़ाया और संपूर्ण विश्व में सेना इकट्ठी करके भारत की आजादी के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया। इस अवसर पर संकाय सदस्य और विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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