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दवा और दुआ ने बचाई जिंदगी:हिम्मत नहीं हारा, पर गलती नहीं की दुबारा, हमारी गलती का खमियाजा परिवार उठाता है; कोरोना से बचने का सावधानी ही समाधान है

बांसवाड़ा11 दिन पहले
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सुभाष नगर निवासी हर्षी खन्ना। - Dainik Bhaskar
सुभाष नगर निवासी हर्षी खन्ना।
  • युवाओं से कहा हल्के से नहीं लेे महामारी, लेकिन डरने की भी जरूरत नहीं

सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। शुरुआत के सिटी स्केन में इन्फेक्शन कम था। दूसरी बार और बढ़ गया। बांसवाड़ा के निजी अस्पताल में करीब 15 दिन आइसोलेट रहा, लेकिन राहत नहीं मिली। परिवार वाले बिना समय गंवाएं उन्हें अहमदाबाद के निजी हॉस्पिटल ले गए। वहां 10 दिन चुनौती भरे रहे, लेकिन हिम्मत नहीं हारा।

बस हर पल खुद को इस बीमारी से लड़ने के लिए जगाता रहा। हर लम्हे से कुछ सीखता रहा। अब सबसे हाथ जोड़कर अपील करता रहता हूं कि लापरवाही मत करो। मास्क को बोझ मत समझो। स्वास्थ्य का ध्यान रखो। कुछ ऐसी ही कहानी है बांसवाड़ा के सुभाष नगर निवासी हर्षी खन्ना की।

बकौल हर्षी वे कोरोना की जंग जीत चुके हैं। भगवान ने उन्हें नई जिंदगी दी है, लेकिन, अब वे दूसरों को सावधान करने वाला कोई मौका नहीं खोते। बल्कि लोगों को सैनेटाइज और मास्क भी फ्री में मुहैया कराते हैं। हर्षी की मानें तो शुरुआत के दिनों में उन्होंने बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया था, लेकिन बाद में खुद के बीमार पड़ने पर उन्हें अहसास हुआ कि बीमार एक आदमी होता है, लेकिन समस्याएं पूरे परिवार की बढ़ जाती हैं।

आदमी खुद से तो जीत जाता है, लेकिन परिवार को टूटता हुआ देख संभलना मुश्किल हो जाता है। हर्षी ने बताया कि काेरोना की जंग जीतने में उनके पिता बहुत बड़े आदर्श बने। पिता के छोटे-बड़े कर करीब 24 ऑपरेशन हो चुके हैं।

वे तीन बार वॉल्व बदलवा चुके हैं। एक बार तो अकेले मुंबई जाकर अस्पताल में ऑपरेशन कराकर घर लौट आए थे। बस आइसोलेशन के दौरान उनके पिता उन्हें ऐसे ही किस्से सुनाते रहे, जिससे उनका आत्मबल बढ़ता गया और वह लगातार बीमारी से लड़ते रहे। हर्षी का कहना है कि वे माता-पिता के अकेले बेटे हैं। इसलिए उनके बीमार होने पर माता-पिता से लेकर पत्नी ने बहुत संघर्ष किया।

अब कोई लापरवाही नहीं

हर्षी खन्ना अब खुद का ध्यान ही नहीं रखते पूरे परिवार के हर सदस्य को लापरवाही पर टोकतें हैं। जागरूकता के लिए अड़ोस-पड़ौस वालों से भी अपील करते रहते हैं। कोरोना के बाद से वे बिना काम के घर से बाहर नहीं निकले। उल्टा दोस्तों को भी बगैर काम के घूमने से रोकते हैं। हर्षी का कहना है कि इस बीमारी में सावधानी ही समाधान है।

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